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	<title>bill Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
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	<title>bill Archives - Udit Vani</title>
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		<title>JHARKHAND में डिलीवरी बॉय से लेकर ओला-उबर-रैपिडो चलाने वालों के हक में पारित विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-platform-based-gig-workers-welfare-bill/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Dec 2025 17:29:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : झारखंड में फूड-पिज्जा की डिलीवरी या इस तरह के काम करने वाले लोगों को सामाजिक सुरक्षा और उनके वाजिब अधिकारों के लिए मानसून सत्र में विधानसभा से पारित झारखंड प्लेटफॉर्म बेस्ड गिग वर्कर्स (रजिस्ट्रेशन एंड वेलफेयर) विधेयक, 2025 को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>झारखंड में फूड-पिज्जा की डिलीवरी या इस तरह के काम करने वाले लोगों को सामाजिक सुरक्षा और उनके वाजिब अधिकारों के लिए मानसून सत्र में विधानसभा से पारित झारखंड प्लेटफॉर्म बेस्ड गिग वर्कर्स (रजिस्ट्रेशन एंड वेलफेयर) विधेयक, 2025 को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मंजूरी दे दी है.</p>
<p>इसके साथ ही राज्य में गिग श्रमिकों के पंजीकरण और कल्याण के लिए एक वैधानिक ढांचा लागू होने का रास्ता साफ हो गया है. विधेयक के अनुसार, झारखंड प्लेटफॉर्म बेस्ड गिग वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड का गठन किया जाएगा. बोर्ड का मुख्यालय रांची में होगा. श्रम विभाग के मंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होंगे, जबकि विभागीय सचिव सहित कुल पांच अन्य सदस्य बोर्ड में शामिल रहेंगे.</p>
<p>बोर्ड के सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा. बोर्ड के माध्यम से गिग श्रमिकों के साथ-साथ सेवा देने वाली कंपनियों और एग्रीगेटर्स का पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा.</p>
<p>विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, गिग श्रमिकों के लिए कार्य में लगाए गए समय और तय दूरी के आधार पर न्यूनतम पारिश्रमिक निर्धारित किया जाएगा. सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर योजनाएं तैयार की जाएंगी.</p>
<p>राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कल्याण अंशदान की लागत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ताओं या गिग श्रमिकों पर नहीं डाली जाएगी. सभी एग्रीगेटर्स का पंजीकरण अनिवार्य होगा. एग्रीगेटर्स से राज्य में अर्जित वार्षिक टर्नओवर के आधार पर अधिकतम दो प्रतिशत या न्यूनतम एक प्रतिशत तक कल्याण अंशदान लिया जाएगा.</p>
<p>पंजीकरण के बाद गिग श्रमिकों को एक विशेष यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी. उन्हें न्यूनतम पारिश्रमिक, व्यावसायिक रूप से सुरक्षित परिस्थितियों में काम करने और कार्य शर्तों से जुड़े मामलों में बोर्ड से परामर्श लेने का अधिकार मिलेगा. श्रमिकों को कम से कम साप्ताहिक आधार पर पारिश्रमिक का भुगतान सुनिश्चित करना होगा.</p>
<p>अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर एग्रीगेटर्स पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. दोषसिद्धि के बाद भी उल्लंघन जारी रहने की स्थिति में सुधार होने तक प्रतिदिन पांच हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना वसूला जाएगा.</p>
<p>किसी अपराध की स्थिति में कंपनी के निदेशक, प्रबंधक, कंपनी सचिव या अन्य संबंधित अधिकारी को दोषी मानते हुए कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इस विधेयक के तहत स्विगी, जोमैटो, ओला, उबर, रैपिडो जैसी प्लेटफॉर्म कंपनियों से जुड़े डिलीवरी ब्वॉय और ड्राइवरों सहित अन्य गिग श्रमिकों को न्यूनतम वेतन, बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<title>Jharkhand News : झारखंड में निजी कॉलेजों की मनमानी फीस पर लगेगी लगाम, राज्यपाल ने बिल को दी मंजूरी</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-fee-regulation-bill-approved/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 16:09:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[bill]]></category>
		<category><![CDATA[College]]></category>
		<category><![CDATA[Education]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : झारखंड में इंजीनियरिंग, मेडिकल और मैनेजमेंट जैसे कोर्स की पढ़ाई अब थोड़ी सस्ती और पारदर्शी हो सकती है. झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने ऐसे पाठ्यक्रमों की फीस नियंत्रित करने के लिए विधानसभा से पारित &#8216;झारखंड व्यावसायिक शिक्षण संस्थान (शुल्क विनियमन) विधेयक, 2025&#8217; को मंगलवार को मंजूरी दे दी है. [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>झारखंड में इंजीनियरिंग, मेडिकल और मैनेजमेंट जैसे कोर्स की पढ़ाई अब थोड़ी सस्ती और पारदर्शी हो सकती है. झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने ऐसे पाठ्यक्रमों की फीस नियंत्रित करने के लिए विधानसभा से पारित &#8216;झारखंड व्यावसायिक शिक्षण संस्थान (शुल्क विनियमन) विधेयक, 2025&#8217; को मंगलवार को मंजूरी दे दी है. अब गजट नोटिफिकेशन के बाद यह कानून लागू हो जाएगा.</p>
<p>इस बिल को विधानसभा के पूरक मानसून सत्र में 25 अगस्त को ध्वनिमत से पारित किया गया था. इसके लागू होने के बाद राज्य के निजी व्यावसायिक कॉलेज अपनी मनमर्जी से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे. अब फीस तय करने का जिम्मा एक &#8216;शुल्क विनियमन समिति&#8217; के हाथों में होगा, जो हर कोर्स के लिए तय करेगी कि कौन-सा कॉलेज कितनी फीस ले सकता है.</p>
<p>सदन में बिल पेश करते हुए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा था कि यह कदम छात्रों और अभिभावकों दोनों के हित में है. अब फीस तय करने में पारदर्शिता होगी और कोई भी संस्थान मनमानी नहीं कर सकेगा.</p>
<p>शुल्क निर्धारित करने वाली समिति में झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अनुशंसा पर एक अध्यक्ष नियुक्त होंगे. साथ में किसी विश्वविद्यालय के कुलपति, एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और अलग-अलग कोर्स के विशेषज्ञ सदस्य होंगे. फीस तय करने से पहले समिति संस्थानों से उनके खर्च और सुविधाओं का ब्योरा मांगेगी और उसके बाद ही अंतिम फैसला लेगी.</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है कि राज्यों को निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों की फीस नियंत्रण के लिए कानून बनाना चाहिए. महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में यह व्यवस्था पहले से है. अब झारखंड में भी यह कानून धरातल पर उतरने को तैयार है.</p>
<p>राज्य सरकार का दावा है कि इससे &#8216;शिक्षा के नाम पर लूट&#8217; रुकेगी और छात्रों को राहत मिलेगी.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<item>
		<title>JHARKHAND : श्रम मंत्री की अध्यक्षता में गिग श्रमिकों के लिए गठित किया जायेगा बोर्ड</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-gig-workers-welfare-bill-passed/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 Aug 2025 17:36:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[bill]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : झारखंड प्लेटफॉर्म आधारित गिग श्रमिक निबंधन और कल्याण विधेयक 2025 विधानसभा से ध्वनिमत से पारित किया गया. श्रम नियोजन एवं कौशल विकास मंत्री संजय प्रसाद यादव द्वारा पेश किए गए इस विधेयक पर विपक्ष की कुछ आपत्तियों के बीच सदन ने इसे ध्वनि मत से मंजूरी दी. इस विधेयक के पास [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span></strong> झारखंड प्लेटफॉर्म आधारित गिग श्रमिक निबंधन और कल्याण विधेयक 2025 विधानसभा से ध्वनिमत से पारित किया गया. श्रम नियोजन एवं कौशल विकास मंत्री संजय प्रसाद यादव द्वारा पेश किए गए इस विधेयक पर विपक्ष की कुछ आपत्तियों के बीच सदन ने इसे ध्वनि मत से मंजूरी दी. इस विधेयक के पास हो जाने के बाद अब जोमैटो, स्वीगी, ओला जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करनेवाले श्रमिकों को कई तरह की योजनाओं का लाभ मिल सकेगा. इस अधिनियम में गिग वर्करों के लिए बोर्ड का गठन किया जायेगा. जिसमें रजिस्ट्रेशन का प्रावधान होगा.</p>
<p>श्रम मंत्री की अध्यक्षता में बोर्ड का गठन होगा और विभाग के सचिव इसके पदेन सदस्य सचिव होंगे. वित्त, उद्योग व परिवहन विभाग के सचिव या उनके द्वारा नामित सदस्य या उनके द्वारा नामित सदस्य बोर्ड के सदस्य होंगे. इसके अलावा राज्य सरकार सिविल सोसाइटी से तीन सदस्यों को नामित करेगी. डेटा संग्रह, तकनीकी या कार्यात्मक बिशेषज्ञ भी सदस्य होंगे. बोर्ड के नामांकित सदस्यों का कार्यकाल तीन साल होगा. नामांकित सदस्यों में एक तिहाई महिलाएं होंगी. बोर्ड की बर्ष में कम से कम दो बार बैठक होगी.</p>
<p>गिग श्रमिकों के लिए बोर्ड निगरानी तंत्र स्थापित करेगा और बोर्ड समय समय पर प्रत्येक कार्य के लिए खर्च किए गए समय और यात्रा की दूरी के आधार पर प्लेटफॉर्म आधारित गिग श्रमिकों को भुगतान किए जानेवाले न्यूनतम पारिश्रमिक का निर्धारण करने के लिए मानदंड और मैट्रिक्स निर्धारित करेगा. गिग श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के लिए समय-समय पर कल्याणकारी योजनाएं तैयार करेगा और गिग श्रमिकों को कई तरह की सहायता दी जायेगी. दुर्घटना बीमा, दुर्घटना, चिकित्सा, आपात स्थिति और स्वास्थ्य बीमा या अन्य स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ के मामले में सहायता, गिग श्रमिकों के बच्चों और उनके लिए शिक्षा योजनाओं का नाभ दिया जायेगा और श्रमिकों का कौशल उन्नयन किया जाएगा.</p>
<p>अंतिम संस्कार में सहायता व वृद्धावस्था सुरक्षा का लाभ देने की कोशिश की जायेगी. कोई भी प्लेटफॉर्म आधारित गिग श्रमिक जो झारखंड में कार्य निष्पादित करता है. बोर्ड के डेटाबेस में शामिल होने के लिए पात्र होगा. कल्याणकारी योजनाओं के लिए पात्रता बोर्ड द्वारा निर्धारित कई कारकों के आधार पर निर्धारित की जाएगी. महिला और ट्रांसजेंडर श्रमिकों के लिए बिशेष प्रावधान किए जाएंगे. झारखंड के निवासियों के लिए प्राथमिकता होगी. आयु सीमा निर्धारित होगी. गरीबी रेखा से नीचे के श्रमिकों को बिशेष लाभ दिया जाएगा. गिग श्रमिकों की आयु कम से कम 18वर्ष होगी. गिग श्रमिकों के लिए कोष का गठन होगा. इस कोष में श्रमिकों से भी अंशदान लिया जाएगा.</p>
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		<item>
		<title>JHARKHAND : राज्य में अब नया विवि अधिनियम होगा लागू, उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री होंगे प्रति कुलाधिपति</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-state-university-bill-passed/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 Aug 2025 17:29:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[bill]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[State]]></category>
		<category><![CDATA[University]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को सदन में झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 ध्वनिमत से पारित किया गया. विश्वविद्यालय के नये अधिनियम में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में व्यवस्थागत आमूलचूल परिवर्तन होंगे. नये अधिनियम के तहत जहां विश्वविद्याालयों में राज्यपाल सह कुलाधिपति के अधिकारों को सीमित कर [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span></strong> झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को सदन में झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 ध्वनिमत से पारित किया गया. विश्वविद्यालय के नये अधिनियम में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में व्यवस्थागत आमूलचूल परिवर्तन होंगे. नये अधिनियम के तहत जहां विश्वविद्याालयों में राज्यपाल सह कुलाधिपति के अधिकारों को सीमित कर दिया गया है. वहीं विश्वविद्यालयों में कई नये पदों के सृजन की भी व्यवस्था की गई है. विभागीय मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सदन में इस विधेयक को पेश किया. उन्होंने इसके साथ ही उच्च व तकनीकी शिक्षा को लेकर कुल तीन विधेयक सदन में पेश किया. इस विधेयक के अलावा उन्होंने झारखंड कोचिंग सेंटर नियंत्रण एवं विनियमन विधेयक 2025 तथा झारखंड व्यवसायिक शिक्षण संस्थान शुल्क विनियमन विधेयक 2025 भी सदन में पेश किया. जिसे भी ध्वनिमत से पारित किया गया. राज्य में अब उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के मंत्री विश्वविद्यालयों के प्रति कुलाधिपति होंगे.</p>
<p>प्रति कुलाधिपति ही विश्वविद्यालयों के सीनेट के भी अध्यक्ष होंगे और सीनेट की बैठकों की अध्यक्षता करेंगे. यद्यपि कुलाधिपति राज्यपाल ही रहेंगे. लेकिन राज्यपाल सह कुलाधिपति के अधिकार अब सीमित होंगे. परंतु राज्यपाल अब विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति नही ंकर पायेंगे. कुलपतियों की नियुक्ति अब राज्यपाल की जगह यूजीसी द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों के अनुसार राज्य सरकार द्वारा की जाएगी. कुलपतियों की नियुक्ति के लिए एक खोज समिति गठित की जायेगी. खोज समिति में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अपर सचिव, प्रधान सचिव या सचिव पदेन अध्यक्ष होंगे. इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा नामित संसद के अधिनियम द्वारा स्थापित उच्च राष्ट्रीय प्रतिष्ठा प्राप्त संस्था या विश्वविद्यालय के निदेशक या प्रमुख, यूजीसी का प्रतिनिधि और कुलाधिपति द्वारा नामित प्रतिष्ठित शिक्षाविद प्रतिनिधि खोज समिति के सदस्य होंगे.</p>
<p>खोज समिति में संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलसचिव सदस्य सचिव होंगे. लेकिन उन्हें वोटिंग अधिकार नहीं होगा. खोज समिति द्वारा कुलपतियों और प्रति कुलपतियों के नामों का पैनल तैयार करते समय अगर सदस्यों के बीच मतैक्य नहीं होने पर समिति के अध्यक्ष को निर्णायक मत देने का अधिकार होगा. यदि राज्य सरकार अनुशंसित व्यक्तियों में से किसी को भी अनुमोदित नहीं करती है, तो वह फिर से समिति को पैनल भेजने का निर्देश दे सकती है. कुलपति के चयन की प्रक्रिया रिक्ति से छह माह पूर्व प्रारंभ की जाएगी. आवेदन के समय कुलपति के लिए अभ्यर्थी की आयु 65 बर्ष से अधिक नहीं होगी. कुलपति का कार्यकाल तीन बर्षों के लिए होगा. कुलपति के अलावा अन्य प्रशासनिक पदों समेत कई तरह के निदेशकों की नियुक्ति के लिए भी अधिनियम में व्यवस्था की गई है तथा कई तरह के विश्वविद्यालयों में कई तरह के बोर्डों व समितियों का भी गठन किया जायेगा. वहीं विश्वविद्यालयों के अध्यापकों, शिक्ष्केत्तर कर्मियों व प्रधानाचार्यों की नियुक्ति के लिए झारखंड राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग गठित किया जायेगा.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">कोचिंग सेंटरों पर लगेगा लगाम, बनेगा नये कानून</span></strong><br />
छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामले, आग की घटनाओं, मूलभूत सुविधाओं की कमी के अलावा अनियमित ढंग से बढ़ते कोचिंग सेंटरों और अत्यधिक फीस वसूलने के अलावा कई अन्य तरह की विसंगतियों पर रोकथाम के लिए राज्य सरकार द्वारा झारखंड कोचिंग सेंटर कंट्रोल एंड रेगुलेशन बिल 2025 भी विधानसभा से पारित कराया गया. ऐसे सेंटर जहां 50 से अधिक छात्रों को स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर किसी भी अध्ययन कार्यक्रम या प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए शैक्षणिक सहायता के लिए कोचिंग प्रदान की जा रही है. इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन के लिए जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में डिस्ट्रिक्ट कोचिंग सेंटर रेगुलेटरी कमेटी एवं राज्य स्तर पर झारखंड स्टेट कोचिंग सेंटर रेगुलेटरी अथॉरिटी गठित किया जायेगा. जिसके तहत अब कोचिंग संस्थान खोलने के लिए ऑथारिटी के समक्ष रजिष्ट्रेशन कराना होगा.</p>
<p>विद्यार्थियों को सभी तरह की मूलभूत सुविधायें मुहैया कराने होंगे. लेटर ऑफ इंटेंट निर्गत होने की तिथि से 30 दिनों के अंदर पांच लाख रुपए की बैंक गारंटी जमा करनी होगी. फिर कमेटी द्वारा लेटर टू स्टार्ट की अनुमति दी जाएगी. कोचिंग सेंटर का पंजीकरण पांच बर्ष की अवधि के लिए मान्य होगा. अवधि समाप्त होने पर पंजीकरण का नवीकरण किया जा सकेगा. कोचिंग सेंटरों को वेब पोर्टल पर सारा डाटा रखना होगा. कोचिंग सेंटरों द्वारा नियमों का उल्लंघन किए जाने पर पहली बार 5 लाख रुपए और दूसरी बार के लिए 10 लाख रुपए का दंड लगाया जा सकेगा. वित्तीय अनियमितता, कुप्रबंधन, कुप्रशासन की स्थिति पैदा होने पर कोचिंग संस्थान को पांच बर्षों के लिए ब्लैक लिस्टेड किया जा सकेगा. झारखंड स्टेट कोचिंग सेंटर रेगुलेटरी अथॉरिटी के अध्यक्ष जिला न्यायाधीश स्तर के सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी होंगे. कोचिंग सेंटरों को संचालित करने के क्रम में उत्पन्न विवादों के हल के लिए झारखंड राज्य कोचिंग सेंटर नियामक प्राधिकरण का भी गठन होगा. प्राधिकरण में सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी जो प्रधान जिला न्यायाधीश के पद से अन्यून हो अध्यक्ष होंगे.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">निजी संस्थान अब इंजीनियरिंग, मेडिकल व मैनेजमेंट समेत अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए नहीं ले पायेंगे मनमानी फीस</span></strong><br />
झारखंड में निजी संस्थानों द्वारा अब इंजीनियरिंग, मेडिकल व मैनेजमेंट समेत अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए मनमानी फीस नहीं वसूल सकेंगे. उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा इसको लेकर सभी तरह के व्यावसायिक पाठयक्रमों के लिए शुल्क विनियमन विधेयक की सदन से मंजूरी ली गई. इसके लिए राज्य सरकार द्वारा शुल्क विनियमन समिति गठिति की जायेगी. झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अनुशंसा पर रिटायर जज की अध्यक्षता में शुल्क निर्धारण समिति का गठन किया जायेगा. इस कमेटी में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव द्वारा नामित राज्य के किसी भी विश्वविद्यालय के कुलपति इसके उपाध्यक्ष होंगे. इनके अलावा अध्यक्ष द्वारा नामित एक प्रतिश्ठित चार्टर्ड अकाउंटेंट और अलग-अलग व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से जुड़े लोग समिति में सदस्य बनाए जायेंगे. उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य या कृषि विभाग के सचिव समिति के पदेन सचिव होंगे. शुल्क विनियमन समिति द्वारा संस्थानों में शुल्क में निगरानी रखेगी और शुल्क का निर्धारण भी करेगी.</p>
<p>समिति के अनुमोदन के बिना पठयक्रमों में प्रवेश के नाम पर शुल्क नहीं लिया जा सकेगा. इसके अलावा भी विधेयक में कई तरह की व्यवस्थायें की गई है. किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान द्वारा कैपिटेशन शुल्क वसूलने या मुनाफाखोरी की किसी भी शिकायत की जांच शुल्क विनियमन समिति द्वारा की जाएगी. यद्यपि शुल्क विनियमन समिति उस संस्थान के प्रबंधन को साक्ष्य और स्पष्टीकरण के लिए अवसर देने के बाद ही दंडात्मक कार्रवाई करेगी. अधिनियम के किसी भी नियम का उल्लंघन या किसी आदेश का अनुपालन नहीं होने के लिए दोषी पाए जाने पर समिति 20 लाख रुपए तक का दंडात्मक जुर्माना लगा सकती है.अधिरोपित कर सकती है. इससे निजी संस्थानों की मनमानी फीस वसूली से त्रस्त अभिभावकों को राहत मिलेगी.</p>
<p>The post <a href="https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-state-university-bill-passed/">JHARKHAND : राज्य में अब नया विवि अधिनियम होगा लागू, उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री होंगे प्रति कुलाधिपति</a> appeared first on <a href="https://uditvani.in">Udit Vani</a>.</p>
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		<title>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में आज पेश करेंगी नया इनकम टैक्स बिल 2025</title>
		<link>https://uditvani.in/politics/revised-income-tax-bill-nirmala-sitharaman/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 Aug 2025 07:07:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नई दिल्ली : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को लोकसभा में संशोधित इनकम टैक्स बिल 2025 पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. अपडेटेड इनकम टैक्स बिल 2025 में संसदीय चयन समिति के 285 सुझाव शामिल हैं. नए कानून का उद्देश्य कर प्रक्रियाओं को सरल बनाना और पिछली कमियों को दूर [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #800080;"><strong>उदित वाणी, नई दिल्ली : </strong></span>केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को लोकसभा में संशोधित इनकम टैक्स बिल 2025 पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. अपडेटेड इनकम टैक्स बिल 2025 में संसदीय चयन समिति के 285 सुझाव शामिल हैं. नए कानून का उद्देश्य कर प्रक्रियाओं को सरल बनाना और पिछली कमियों को दूर करना है, जिससे देश में आयकर परिदृश्य में संभावित रूप से बदलाव आ सकता है. पिछले हफ्ते, आयकर विधेयक, 2025 को सरकार ने औपचारिक रूप से वापस ले लिया था, जिसे मौजूदा आयकर अधिनियम, 1961 के स्थान पर 13 फरवरी को लोकसभा में पेश किया गया था.</p>
<p>भाजपा सांसद बैजयंत जय पांडा की अध्यक्षता वाली चयन समिति द्वारा की गई अधिकांश सिफारिशों को शामिल करते हुए, आयकर विधेयक का एक नया संस्करण अब संसद में पेश किया जाएगा. विधेयक के कई संस्करणों से भ्रम की स्थिति से बचने और सभी परिवर्तनों को शामिल करते हुए एक स्पष्ट और अपडेटेड संस्करण प्रदान करने के लिए, आयकर विधेयक का नया संस्करण सदन के विचारार्थ प्रस्तुत किया जाएगा.</p>
<p>इस कानून की समीक्षा के लिए जिम्मेदार संसदीय चयन समिति के अध्यक्ष पांडा के अनुसार, नया कानून पारित होने के बाद, भारत के दशकों पुराने कर फ्रेमवर्क को सरल बनाएगा, कानूनी उलझनों को कम करेगा और व्यक्तिगत करदाताओं तथा एमएसएमई को अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचने में मदद करेगा. पांडा के अनुसार, &#8220;वर्तमान आयकर अधिनियम 1961 में 4,000 से ज्यादा संशोधन हो चुके हैं और इसमें 5 लाख से ज्यादा शब्द हैं. यह बहुत जटिल हो गया है.</p>
<p>नया विधेयक इसे लगभग 50 प्रतिशत तक सरल बनाता है, जिससे आम करदाताओं के लिए इसे पढ़ना और समझना कहीं ज्यादा आसान हो जाता है.&#8221; उन्होंने आगे कहा कि इस सरलीकरण का सबसे ज्यादा लाभ छोटे व्यवसाय के मालिकों और एमएसएमई को होगा, जिनके पास अक्सर जटिल कर संरचनाओं से निपटने के लिए कानूनी और वित्तीय विशेषज्ञता का अभाव होता है.</p>
<p>नए उपाय प्रत्यक्ष कराधान की एक निष्पक्ष और न्यायसंगत प्रणाली बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जो यह सुनिश्चित करेगी कि देश के कामकाजी और मध्यम वर्ग पर प्रत्यक्ष करों का कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े. सभी करदाताओं को लाभ पहुंचाने के लिए स्लैब और दरों में व्यापक बदलाव किए गए हैं. सरकार के अनुसार, नया स्ट्रक्चर मध्यम वर्ग के करों में कमी लाता है और उनके हाथों में अधिक धन उपलब्ध करवाता है, जिससे घरेलू उपभोग, बचत और निवेश को बढ़ावा मिलता है.</p>
<p>वित्त अधिनियम, 2025 ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 87ए के तहत कर छूट का दावा करने हेतु आय सीमा को धारा 115बीएसी के अंतर्गत नई कर व्यवस्था के अंतर्गत कर योग्य निवासी व्यक्तियों के लिए 7 लाख रुपए से बढ़ाकर 12 लाख रुपए कर दिया है और अधिकतम छूट राशि 25,000 रुपए से बढ़ाकर 60,000 रुपए कर दी गई है. वित्त मंत्रालय के अनुसार, नई कर व्यवस्था के तहत पहले दी गई मार्जिनल राहत 12,00,000 रुपए से थोड़ी अधिक आय पर भी लागू है. नया इनकम टैक्स बिल आम नागरिकों और छोटे उद्योगों के लिए कर दाखिल करना आसान बना देगा.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<title>JHARKHAND : कुलपति व प्रतिकुलपतियों की नियुक्ति में राज्यपाल के अधिकार होंगे खत्म</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-university-bill-governor-jpsc-powers-curtailed/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Jul 2025 17:43:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[bill]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[Political]]></category>
		<category><![CDATA[University]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>* यूनिवर्सिटी सर्विस कमीशन का किया जायेगा गठन, विवि व कॉलेजों के तमाम पदो पर कमीशन करेगा नियुक्ति * कैबिनेट ने दी झारखंड राज्य विवि विधेयक समेत 21 प्रस्तावों पर मंजूरी उदित वाणी, रांची : राज्य सरकार द्वारा बिरसा कृषि विश्वविद्यालय को छोड़कर अन्य सभी सरकारी विश्वविद्यालयों के तमाम पदों पर नियुक्ति के मामले में [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>* यूनिवर्सिटी सर्विस कमीशन का किया जायेगा गठन, विवि व कॉलेजों के तमाम पदो पर कमीशन करेगा नियुक्ति</strong><br />
<strong>* कैबिनेट ने दी झारखंड राज्य विवि विधेयक समेत 21 प्रस्तावों पर मंजूरी</strong></p>
<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>राज्य सरकार द्वारा बिरसा कृषि विश्वविद्यालय को छोड़कर अन्य सभी सरकारी विश्वविद्यालयों के तमाम पदों पर नियुक्ति के मामले में राज्यपाल सह कुलाधिपति व झारखंड लोकसेवा आयोग के अधिकारों को समाप्त करने का अहम फैसला लिया गया है. इसको लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में गुरूवार को आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक-2025 की मंजूरी दी गई है. विधेयक को 1 अगस्त से आहूत राज्य विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जायेगा.</p>
<p>इस विधेयक में विश्वविद्यालय सेवा आयोग [यूनिवर्सिटी सर्विस कमीशन] गठित करने का प्रावधान किया गया है तथा यूनिवर्सिटी सर्विस कमीशन के माध्यम से ही विश्वविद्यालयों में कुलपतियों, प्रति कुलपतियों, रजिष्ट्रार, परीक्षा संचालक, वित पदाधिकारी, विश्वविद्यालय व अंगीभूत कॉलेजों के प्राध्यापक, प्राचार्यों व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति होगी. जबकि फिलवक्त विश्वविद्यालयों में कुलपति व प्रतिकुलपतियों की नियुक्ति राज्यपाल सह कुलाधिपति द्वारा मुख्यमंत्री के सलाह पर की जाती है.</p>
<p>वहीं रजिष्ट्रार, वित पदाधिकारी परीक्षा संचालक व विश्वविद्यालयों व अंगीभूत कॉलेजों में प्राध्यापकों व प्राचार्यों की नियुक्ति झारखंड लोकसेवा आयोग के माध्यम से की जाती है. ज्ञात हो कि राज्य में फिलवक्त रांची विश्वविद्यालय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय रांची, कोल्हान विश्वविद्यालय, जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय, पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय, सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका, बिनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग, विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय धनबाद, नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय पलामू, झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय रांची व झारखंड रक्षाशक्ति विश्वविद्यालय रांची राजकीय विश्वविद्यालय संचालित हैं.</p>
<p>इन विश्वविद्यालयों के तमाम पदों विश्वविद्यालयों व इसके अंतर्गत आनेवाले अंगीभूत कॉलेजों के प्राचार्यों व शिक्षकों की नियुक्तियां अब यूनिवर्सिटी सर्विस कमीशन के माध्यम से ही जायेगी. कैबिनेट की प्रधान सचिव ने राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा लिये गये निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में फिलवक्त सभी विश्वविद्यालयों के लिए अलग-अलग अधिनियम एक्ट है. राज्य सरकार द्वारा सभी विश्वविद्यालयों में समेकित रूप से एकरूपता लाने के लिए नया झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक-2025 लाया गया है. वहीं उन्होंने बताया कि मंत्रिपरिषद द्वारा कुल 21 प्रस्तावों पर मंजूरी दी गई है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">अटल मोहल्ला क्लीनिक का नाम अब मदर टेरेसा एडवांस हेल्थ क्लीनिक</span></strong><br />
सरकार द्वारा अटल मोहल्ला क्लीनिक का नाम बदला गया. अटल मोहल्ला क्लीनिक का नाम परिर्विर्तत कर मदर टेरेसा एडवांस हेल्थ क्लीनिक करने का निर्णय लिया गया है. मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य के प्रारम्भिक विद्यालयों में उर्दू सहायक शिक्षकों के पूर्व में सृजित 3712 पदों के प्रत्यर्पण करते हुए इंटरमीडियट प्रशिक्षित सहायक आचार्य के 3287 पद व मध्य विद्यालयों में स्नाातक प्रशिक्षित सहायक आचार्य के 1052 कुल 4339 पद से सृजित करने का निर्णय लिया गया है.</p>
<p>उग्रवादी घटनाओं अथवा राष्ट्र की सीमा के रक्षार्थ कर्तव्य निर्वहन के दौरान वीरगति प्राप्त होने वाले राज्य निवासी केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों के कर्मियों के आश्रितों को भी राज्य सरकार बिशेष अनुग्रह अनुदान एवं अनुकंपा के आधार पर सरकारी सेवा में नियुक्ति देगी. इस संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. झारखंड राज्य के पुलिस, कक्षपाल, सिपाही [गृह रक्षा वाहिनी], उत्पाद सिपाही संयुक्त भर्ती संशोधन नियमावली-2025 गठित करने व पुलिस के उक्त पदों के लिए पूर्व से प्रकाशित सभी विज्ञापनों को रद्य करने और नियुक्ति में पूर्व किये गये आवेदकों को शुल्क के भुगतान में छूट के साथ-साथ सभी कोटि के आवेदकों को अधिकतम उम्र सीमा में भी छूट देने की स्वीकृति दी गई.</p>
<p>डा कुमारी रेखा चिकित्सा पदाधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुसाबनी, डा रीना कुमारी चिकित्सा पदाधिकारी यपैथोलाजिस्टद्धए सदर अस्पताल बोकारो व डा वीणा कुमारी एम चिकित्सा पदाधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कसमार बोकारो को सेवा से बर्खास्त करने की स्वीकृति दी गई. प्रयोगशाला वाहक की [भर्ती एवं अन्य सेवा शर्तें] नियमावली- 2025 के गठन की स्वीकृति दी गई. राज्य में भवन निर्माण के कार्य के लिए संवेदकों को झारखंड सरकार से निर्गत जीएसटी प्रमाण पत्र आवश्यक किया गया है.</p>
<p>जिसके मद्येनजर जीएसटी प्रमाण पत्र की अनिवार्यता के लिए झारखंड भवन निर्माण संवेदक निबंधन नियमावली-2015 एवं भवन निर्माण विभाग के स्टैंडर्ड बिडिंग डाक्यूमेंट में संशोधन की स्वीकृति दी गई. राज्य के सेवानिवृत्त सरकारी सेवकों को भी न्यायालय द्वारा आहूत सम्मन के क्रम में साक्ष्य देने के लिए किए गए यात्रा पर होनेवाले व्यय की प्रतिपूर्ति देने की मंजूरी दी गई. झारखंड राज्य आयुष स्वास्थ्य सेवा [भर्ती, प्रोन्नति एवं अन्य सेवा शर्त] [संशोधन] नियमावलीण् 2024 का गठन की स्वीकृति दी गई. सीएजी के रिपोर्टों को मानसून सत्र के दौरान झारखंड विधानसभा में पेश करने की मंजूरी दी गई.</p>
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		<title>JHARKHAND : कोचिंग सेंटरों पर नकेल कसने के लिए राज्य सरकार मानसून सत्र में लायेगी झारखंड कोचिंग सेंटर कंट्रोल एंड रेगुलेशन बिल</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-coaching-centre-regulation-bill/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Jul 2025 17:47:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[bill]]></category>
		<category><![CDATA[Coaching]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : कोचिंग सेंटरों पर नकेल कसने के लिए राज्य सरकार ने झारखंड कोचिंग सेंटर [कंट्रोल एंड रेगुलेशन] विधेयक-2025 लाने का फैसला किया है. उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा तैयार विधेयक पर विधि और कार्मिक विभाग की स्वीकृति लेने के पश्चात इसे कैबिनेट के समक्ष रखा जायेगा. इसके बाद इस विधेयक को [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>कोचिंग सेंटरों पर नकेल कसने के लिए राज्य सरकार ने झारखंड कोचिंग सेंटर [कंट्रोल एंड रेगुलेशन] विधेयक-2025 लाने का फैसला किया है. उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा तैयार विधेयक पर विधि और कार्मिक विभाग की स्वीकृति लेने के पश्चात इसे कैबिनेट के समक्ष रखा जायेगा. इसके बाद इस विधेयक को झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में पारित कराया जायेगा. छात्रों की आत्म हत्या के बढ़ते मामलों, सेंटरों में आग लगने की घटनाओं, मूलभूत सुविधाओं की कमी के अलावा अनियमित ढंग से बढ़ते कोचिंग सेंटरों और अत्यधिक फीस वसूलने के अलावा कई अन्य तरह की विसंगतियों पर रोकथाम के लिए यह विधेयक लाया जा रहा है.</p>
<p>कोचिंग सेंटरों द्वारा नियमों का उल्लंघन किए जाने पर पहली बार 5 लाख रुपए और दूसरी बार के लिए 10 लाख रुपए तक का दंड लगाने के साथ वित्तीय अनियमितता, कुप्रबंधन, कुप्रशासन की स्थिति पैदा होने पर कोचिंग संस्थान को पांच बर्षों के लिए ब्लैक लिस्टेड भी किया जा सकेगा. झारखंड स्टेट कोचिंग सेंटर रेगुलेटरी अथॉरिटी के अध्यक्ष जिला न्यायाधीश स्तर के सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी होंगे. राज्य सरकार के संयुक्त सचिव व उससे उपर रैंक के सेवानिृत अधिकारी इसके उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव रैंक से नीचे के अधिकारी सदस्य होंगे. ज्ञात हो कि केंद्र सरकार ने भी राज्य सरकारों को कोचिंग सेंटरों को रेगुलेट करने के लिए कानून बनाने का सुझाव दिया है. उस सुझाव पर बिहार, गोवा, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मणिपुर, राजस्थान जैसे राज्यों ने कोचिंग संस्थानों पर नकेल कसने के लिए कंट्रोल एंड रेगुलेशन कानून बनाया है. जानकारी के मुताबिक कोचिंग सेंटरों के लिए लाये जा रहे प्रस्तावित विधेयक में 50 से अधिक छात्रों को कोचिंग देने के लिए कोचिंग संस्थानों को राज्य व जिला स्तर पर कानून के तहत रजिष्ट्रेशन कराना होगा.</p>
<p>इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन के लिए जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में डिस्ट्रिक्ट कोचिंग सेंटर रेगुलेटरी कमेटी एवं राज्य स्तर पर झारखंड स्टेट कोचिंग सेंटर रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाएगा. डिस्ट्रिक्ट कोचिंग सेंटर रेगुलेटरी कमिटी जिले के अंतर्गत किसी कोचिंग सेंटर के पंजीकरण या स्थापना के लिए आवेदन को स्वीकृत अथवा अस्वीकृत किया जा सकेगा. छात्रों या अभिभावकों की शिकायतों के निवारण के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर शिकायत निवारण प्रकोष्ठ गठित किया जायेगा. कोचिंग से जुड़े छात्रावासों में नियमित पुलिस गश्त सुनिश्चित किया जा सकेगा. किसी भी शिकायत का भौतिक व डिजिटल रूप में रिकार्ड रखने का प्रावधान होगा.</p>
<p>कानून के लागू होने की तिथि से छह महीने के भीतर कोचिंग संस्थानों को डिस्ट्रिक्ट कोचिंग सेंटर रेगुलेटरी कमिटी के समक्ष आवेदन देना होगा. आवेदन नहीं करनेवाले कोचिंग संस्थानों को दंडित किया जा सकेगा. वहीं कोचिंग संस्थानों द्वारा किए गए आवेदनों पर कमिटी को 60 दिनों के भीतर निर्णय लेना होगा. अगर कोचिंग सेंटर संचालित करनेवाले व्यक्ति के पास जिले के भीतर या बाहर कई परिसर या शाखाएं है तो ऐसे प्रत्येक परिसर या शाखा को अलग-अलग कोचिंग सेंटर माना जायेगा और संबंधित जिलों में अलग-अलग आवेदन देना होगा. यदि कोई कोचिंग सेंटर फ्रेंचाइजी मोड में संचालित हो रहा है तो इसके फ्रेंचाइजी को भी नियमों के अनुरूप आवेदन करना होगा.</p>
<p>कोचिंग सेंटर की स्थापना के लिए आवेदन के साथ आधारभूत संरचना, पाठ्यक्रम, मूल्यांकन एवं शुल्क, आसान निकास नीति, शुल्क वापसी नीति एवं विद्यार्थियों के स्थानांतरण नीति की भी जानकारी देनी होगी. आवेदन के साथ अंडरटेकिंग भी देना होगा कि नियोजित या नियोजन किए जानेवाले किसी भी ट्युटर के पास स्नातक की न्यूनतम योग्यता है और किसी न्यायालय द्वारा उसे किसी अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया गया है. 16 बर्ष से कम आयु के या माध्यमिक विद्यालय परीक्षा नहीं देनेवाले विद्यार्थियों को उनके अभिभावक की स्पष्ट लिखित सहमति के बिना नामांकित नहीं किया जायेगा.</p>
<p>कोचिंग सेंटर के लिए दिये गये आवेदन से संतुष्ट होने पर डिस्ट्रिक्ट कमिटी द्वारा लेटर ऑफ इंटेंट निर्गत किया जायेगा. लेटर ऑफ इंटेंट निर्गत होने की तिथि से 30 दिनों के अंदर पांच लाख रुपए की बैंक गारंटी जमा करनी होगी. फिर कमेटी द्वारा लेटर टू स्टार्ट की अनुमति दी जाएगी. कोचिंग सेंटर का पंजीकरण पांच बर्ष की अवधि के लिए मान्य होगा. अवधि समाप्त होने पर पंजीकरण का नवीकरण किया जा सकेगा. कोचिंग सेंटरों को वेब पोर्टल पर सारा डाटा रखना होगा. इसके साथ ही विधेयक में नियम-कानूनों का पालन नहीं करनेवाले कोचिंग सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भी कई तरह के प्रावधान किया गया है.</p>
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		<title>JHARKHAND राज्य विश्वविद्यालय विधेयक-2025 का प्रारूप तैयार, मानसून सत्र में विस में किया जा सकता है पेश</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/state-university-bill-draft-reform/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Jun 2025 17:44:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[bill]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[Political]]></category>
		<category><![CDATA[State]]></category>
		<category><![CDATA[University]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : राज्य सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में समरुपता और पारदर्शिता लाने के लिए झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक-2025 का प्रारूप तैयार कर लिया गया है तथा इसे शीघ्र ही राज्य मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जायेगा. इसके साथ इसे आगामी मानसून सत्र के दौरान [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>राज्य सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में समरुपता और पारदर्शिता लाने के लिए झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक-2025 का प्रारूप तैयार कर लिया गया है तथा इसे शीघ्र ही राज्य मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जायेगा. इसके साथ इसे आगामी मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में पेश करने की तैयारी है. यद्यपि अभी भी अधिनियम के कुछ बिंदुओं पर वित्त विभाग की सहमति नहीं है. लेकिन बताया गया कि वित्त विभाग की उन आपत्तियों को सुधार कर सरकार इसे जल्द स्वीकृति प्रदान करने के पक्ष में है. ताकि विधानसभा के मानसून सत्र में इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सदन की भी स्वीकृति ली जा सके. विश्वविद्यालय अधिनियम का प्रारूप देश के अन्य राज्यों के कानूनों का अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया है. जिनमें महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात व अन्य राज्य शामिल हैं. <span style="font-size: 14px;">बताया गया कि इस अधिनयम के माध्यम से राज्य के सभी 10 राजकीय विश्वविद्यालयों और तीन तकनीकी विश्वविद्यालयों में एकरूपता लाया जायेगा. </span></p>
<p><span style="font-size: 14px;">राज्य सरकार का मानना है कि सभी विश्वविद्यालय यूजीसी नॉर्म्स से संचाालित होते हैं. विश्वविद्यालयों को यूजीसी के गाइड लाइन को समान रूप से पालन करना है. लेकिन विश्वविद्यालयों के क्रिया कलापों में अक्सर काफी अंतर देखा जा रहा है. इसलिए राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के लिए एक मॉडल एक्ट लाने का निर्णय लिया गया है. इस विधेयक में राज्यपाल के अधिकार को सीमित कर दिया गया है. विधेयक के अनुसार राज्यपाल सभी राजकीय और तीन अन्य तकनीकी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति तो होंगे. लेकिन कुलपतियों व प्रतिकुलपतियों की नियुक्ति में राज्यपाल की भूमिका नहीं होगी. जबकि उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के मंत्री इसके पदेन प्रो चांसलर होंगे. </span></p>
<p><span style="font-size: 14px;">वहीं विधेयक के प्रारूप में विश्वविद्यालय सेवा आयोग गठित करने का भी प्रावधान किया गया है और कहा गया है कि विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से ही कुलपति, प्रति कुलपति समेत परीक्षा नियंत्रक, रजिष्ट्रार, वित्त पदाकधकारी व अन्य की नियुक्ति होगी. महाविद्यालयों में एक गवर्निंग बॉडी गठित होगी. गवर्निंग बॉडी द्वारा अन्य बिषयों पर निर्णय लेने के अलावा जरूरत के अनुसार पद सृजित भी किया जा सकेगा. लेकिन पद सृजन के बाद नियुक्तियों पर खर्च होनेवाली राशि स्वयं महाविद्यालय द्वारा वहन करने का प्रावधान है. वहीं विधेयक में विश्वविद्यालयों को कई तरह के बोर्ड के गठित करने का भी अधिकार दिया गया है. जिसके तहत बोर्ड ऑफ रिसर्च, बोर्ड ऑफ इनोवेशन, बोर्ड ऑफ इंटरप्रेन्योरशिप, ह्युमन रिसोर्स मैनेजमेंट बोर्ड इत्यादि गठित किया जा सकता है.</span></p>
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		<title>JHARKHAND में गिग वर्कर्स के हक में कानून लाएगी सरकार, कैबिनेट ने दी मंजूरी</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-gig-workers-welfare-bill-cabinet-approval/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Jun 2025 16:06:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[bill]]></category>
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		<category><![CDATA[Political]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : ऑनलाइन सामान की डिलीवरी या इस तरह के काम करने वाले लोगों को सामाजिक सुरक्षा और उनके वाजिब अधिकारों को झारखंड सरकार कानूनी तौर पर संरक्षण देगी. इसके लिए कानून बनाया जाएगा. बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में इससे संबंधित विधेयक के प्रारूप को [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>ऑनलाइन सामान की डिलीवरी या इस तरह के काम करने वाले लोगों को सामाजिक सुरक्षा और उनके वाजिब अधिकारों को झारखंड सरकार कानूनी तौर पर संरक्षण देगी. इसके लिए कानून बनाया जाएगा.</p>
<p>बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में इससे संबंधित विधेयक के प्रारूप को मंजूरी दी गई. कैबिनेट में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए वित्त सचिव प्रशांत कुमार ने बताया कि इस विधेयक का नाम “द झारखंड प्लेटफॉर्म बेस्ड गिग वर्कर्स (रजिस्ट्रेशन एंड वेलफेयर) बिल, 2025” रखा गया है.</p>
<p>इस विधेयक में ऐसे प्रावधान हैं, जिससे स्विगी-जोमैटो जैसी तमाम कंपनियों के लिए ऑनलाइन डिलीवरी करने वाले, ई-कॉमर्स कंपनियों के डिलीवरी ब्वॉय, ओला-उबर-रैपिडो जैसी कंपनियों के ड्राइवर और इस प्रकृति के काम करने वाले वर्कर्स को मिनिमम वेज, बीमा, स्टाइपेंड और अन्य प्रकार की सामाजिक सुरक्षा हासिल हो सके. ऐसे श्रमिकों का पंजीकरण करने के लिए एक प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा और प्रत्येक को एक यूनिक आईडी जारी की जाएगी.</p>
<p>गिग वर्कर्स के मामलों की सुनवाई के लिए “झारखंड प्लेटफॉर्म बेस्ड गिग वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड” का गठन किया जाएगा. कैबिनेट की बैठक में कुल 12 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. राज्य में पाकुड़-बड़हरवा मुख्य पथ से पाली गगन पहाड़ी पश्चिम बंगाल बॉर्डर भाया कुसमा फाटक पथ के चौड़ीकरण, मजबूतीकरण एवं पुनर्निर्माण कार्य के लिए कुल 40 करोड़ 39 लाख 98 हजार तीन रुपए की राशि मंजूर की गई है.</p>
<p>इसी तरह गढ़वा नगर परिषद अंतर्गत गढ़वा शहरी जलापूर्ति योजना के लिए 59 करोड़ 71 लाख 63 हजार की राशि की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई. झारखंड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड के पदेन अध्यक्ष के रूप में सचिव, खान एवं भूतत्व विभाग एवं पदेन प्रबंध निदेशक के रूप में निदेशक, खान को नामित करने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान की है. राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय, बोकारो एवं राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय, गोड्डा में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् के मापदंडों के आलोक में शिक्षकों एवं आवश्यकतानुसार शिक्षकेत्तर कर्मियों का पद सृजित किया जाएगा.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<title>वक्फ संशोधन बिल पास होने पर झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी ने जताई नाराजगी, बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[UditVani News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Apr 2025 09:36:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[bill]]></category>
		<category><![CDATA[Constitution]]></category>
		<category><![CDATA[loksabha]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी: लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने के बाद झारखंड सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता इरफान अंसारी ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल जबरन संसद में लाया गया और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कुचलने की साजिश का हिस्सा है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर निशाना साधते [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>उदित वाणी:</strong> लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने के बाद झारखंड सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता इरफान अंसारी ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल जबरन संसद में लाया गया और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कुचलने की साजिश का हिस्सा है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रही है।</p>
<p>इरफान अंसारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, <em>&#8220;</em><em>वक्फ</em> <em>बिल</em> <em>हमारे</em> <em>संविधान</em> <em>पर</em> <em>सीधा</em> <em>हमला</em> <em>है।</em> <em>आज</em> <em>का</em> <em>दिन</em> <em>इतिहास</em> <em>में</em> <em>काले</em> <em>अक्षरों</em> <em>में</em> <em>लिखा</em> <em>जाएगा।</em> <em>बीजेपी</em> <em>ने</em> <em>पूरे</em> <em>देश</em> <em>को</em> <em>तबाही</em> <em>के</em> <em>कगार</em> <em>पर</em> <em>ला</em> <em>खड़ा</em> <em>किया</em> <em>है।</em><em>&#8220;</em> उन्होंने कहा कि भारत हमेशा शांति और सद्भाव का प्रतीक रहा है, लेकिन मौजूदा सरकार ने नफरत और सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा देने का काम किया है।</p>
<p><strong>&#8216;</strong><strong>तानाशाही</strong> <strong>रवैया</strong> <strong>अपना</strong> <strong>रही</strong> <strong>है</strong> <strong>सरकार</strong><strong>&#8216;</strong></p>
<p>मंत्री ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने और एक वर्ग विशेष के अधिकारों को समाप्त करने पर आमादा है। उन्होंने कहा, <em>&#8220;</em><em>आज</em> <em>सरकार</em> <em>की</em> <em>नजर</em> <em>एक</em> <em>समुदाय</em> <em>की</em> <em>जमीन</em> <em>पर</em> <em>है</em><em>, </em><em>तो</em> <em>कल</em> <em>दूसरे</em> <em>अल्पसंख्यकों</em> <em>के</em> <em>अधिकार</em> <em>भी</em> <em>छीने</em> <em>जा</em> <em>सकते</em> <em>हैं।</em> <em>यह</em> <em>पूरी</em> <em>तरह</em> <em>असंवैधानिक</em> <em>है</em> <em>और</em> <em>नागरिकों</em> <em>के</em> <em>मूल</em> <em>अधिकारों</em> <em>का</em> <em>उल्लंघन</em> <em>करता</em> <em>है।</em><em>&#8220;</em></p>
<p>झारखंड के मंत्री ने वक्फ संशोधन विधेयक को पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि कांग्रेस इस अन्याय के खिलाफ हर संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई सिर्फ अल्पसंख्यकों की नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की रक्षा के लिए है।</p>
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