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	<title>Anti Snake Venom Jharkhand Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
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		<title>झारखण्ड में सर्पदंश अधिसूचित रोग घोषित: नेशनल स्नेकबाइट मैनेजमेंट प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करने का निर्देश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 May 2026 17:48:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Anti Snake Venom Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand Health Department]]></category>
		<category><![CDATA[National Snakebite Management Protocol]]></category>
		<category><![CDATA[Shashi Prakash Jha NHM]]></category>
		<category><![CDATA[Snakebite Notified Disease]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : राज्य में बारिश और उमस भरी गर्मी शुरू होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश (साँप काटने) की घटनाओं में होने वाली अचानक वृद्धि को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), झारखण्ड के अभियान निदेशक ने सर्पदंश से होने वाली आकस्मिक घटनाओं के [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>राज्य में बारिश और उमस भरी गर्मी शुरू होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश (साँप काटने) की घटनाओं में होने वाली अचानक वृद्धि को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), झारखण्ड के अभियान निदेशक ने सर्पदंश से होने वाली आकस्मिक घटनाओं के बचाव, रोकथाम तथा उपचार से सम्बंधित मार्गदर्शिका के अनुपालन का निर्देश दिया है. हाल ही में राज्य सरकार ने सर्पदंश के मामलों और इससे होने वाली मौतों को अधिसूचित रोग (Notified Disease) के रूप में अधिसूचित कर दिया है.</p>
<p>इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखण्ड के अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा ने राज्य के सभी सिविल सर्जनों को पत्र जारी कर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा निर्धारित &#8216;नेशनल स्नेकबाइट मैनेजमेंट प्रोटोकॉल&#8217; का हर स्तर पर कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">वर्ष 2030 तक मौतों को आधा करने का लक्ष्य</span></strong><br />
भारत सरकार के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) द्वारा शुरू की गई राष्ट्रीय कार्य योजना का लक्ष्य वर्ष 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों और विकलांगता को 50 प्रतिशत तक कम करना है. इसी के तहत झारखण्ड में वित्तीय वर्ष 2024-25 से ही &#8216;स्नेक बाइट प्रीवेंशन एंड कंट्रोल प्रोग्राम&#8217; (Snake Bite Prevention and Control Program) का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जा रहा है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">झारखण्ड में तेजी से बढ़े सर्पदंश के आंकड़े; झाड़-फूंक बनी बड़ी चुनौती</span></strong><br />
IDSP-IHIP पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में सर्पदंश के मामलों में लगातार चिंताजनक इजाफा हुआ है. जहाँ वर्ष 2022 में महज़ 392 मामले आए थे, वहीं वर्ष 2023 में यह संख्या बढ़कर 1647 (15 मृत्यु), वर्ष 2024 में 2760 (22 मृत्यु), और वर्ष 2025 में 4078 मामलों के साथ 26 मौतों तक पहुँच गई. चालू वर्ष 2026 में भी अकेले अप्रैल महीने तक ही सर्पदंश के 561 मामले प्रतिवेदित किए जा चुके हैं.</p>
<p>स्वास्थ्य विभाग के गहन विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि सर्पदंश से होने वाली मौतों का सबसे मुख्य कारण अस्पताल पहुँचने और इलाज शुरू होने में होने वाली देरी के साथ-साथ समुदाय में जागरूकता की भारी कमी है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग साँप काटने पर झाड़-फूंक, नीम-हकीम, पारंपरिक ओझाओं और जादू-टोने के जाल में फंस जाते हैं, जो चिकित्सा विभाग के सामने मौतों के आंकड़ों को रोकने में सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">निजी क्लीनिक और कॉर्पोरेट अस्पतालों के लिए भी रिपोर्टिंग अनिवार्य</span></strong><br />
अब सर्पदंश के अधिसूचित रोग घोषित होने के बाद राज्य के भीतर काम करने वाले सभी चिकित्सा संस्थानों—चाहे वे सरकारी अस्पताल हों, निजी क्लिनिक हों, कॉर्पोरेट अस्पताल, रेलवे, आर्मी व आयुष के स्वास्थ्य केंद्र हों या फिर पैथोलॉजिकल और रेडियोलॉजिकल लैब्स हों—उन सभी के लिए सर्पदंश के प्रत्येक पुष्ट या संदिग्ध मामले की पाक्षिक (Fortnightly) रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है.</p>
<p>इन सभी चिकित्सा प्रदाताओं को हर महीने की 5वीं और 20वीं तारीख तक अपने जिले के सिविल सर्जन को विहित प्रपत्र में अनिवार्य रूप से रिपोर्ट भेजनी होगी. इसके बाद सिविल सर्जन हर महीने की 10 तारीख तक इस समेकित डेटा को राज्य सरकार के पास समर्पित करेंगे. इसके साथ ही इन सभी मामलों की प्रविष्टि IDSP-IHIP पोर्टल पर करना भी अनिवार्य होगा ताकि एक मजबूत निगरानी तंत्र विकसित किया जा सके और उसी के आधार पर अल्पकालिक व दीर्घकालिक स्वास्थ्य नीतियां बनाई जा सकें.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम रहेगा स्टॉक, स्वास्थ्य कर्मियों को ट्रेनिंग</span></strong><br />
इस आपदा से ससमय निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अस्पतालों, अनुमंडल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सभी मेडिकल कॉलेजों में एंटी स्नेक वेनम सीरम (Anti Snake Venom Serum) की शत-प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित करने का आदेश दिया है, क्योंकि इस जीवन रक्षक दवा को अत्यावश्यक दवा सूची में शामिल किया गया है.</p>
<p>यदि किसी दूरस्थ स्वास्थ्य केंद्र में इसकी कमी होती है, तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से तुरंत दवा की खेप उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही इसकी वास्तविक स्थिति पर राज्य स्तर से नजर रखने के लिए &#8216;ई-औषधि&#8217; के DVDMS पोर्टल पर डेटा प्रविष्टि को अनिवार्य किया गया है. इसके समानांतर, सभी चिकित्सा अधिकारियों और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों को सर्पदंश प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है और अस्पतालों में भारत सरकार द्वारा तैयार पोस्टरों का प्रदर्शन किया जा रहा है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">25% सांप ही विषैले, डर से रुक जाती है हृदय गति</span></strong><br />
आम जनमानस को जागरूक करने और उनके भीतर से मौत के डर को निकालने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जमीनी स्तर पर ए.एन.एम. (ANM), सहिया, एमपीडब्ल्यू (MPW), बीटीटी (BTT) और सहिया साथियों को जिम्मेदारी सौंपी है. ये कर्मी न सिर्फ लोगों को सही जानकारी देंगे बल्कि पीड़ित मरीज को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाने में मदद भी करेंगे.</p>
<p>विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि झारखण्ड में पाई जाने वाली साँपों की 250 से अधिक प्रजातियों में से महज़ 25 प्रतिशत ही विषैली होती हैं, और अधिकांश मौतें साँप के वास्तविक जहर से नहीं बल्कि अत्यधिक घबराहट के कारण हृदय गति रुक जाने (हार्ट अटैक) से होती हैं. खेतों में मिलने वाले रसेल वाइपर के काटने से जहाँ खून पतला होकर ब्लीडिंग शुरू होती है, वहीं सफेद छल्लों वाला करैत भी बेहद खतरनाक होता है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">जनहित में जारी आधिकारिक गाइडलाइन: सर्पदंश होने पर क्या करें और क्या न करें</span></strong><br />
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई आधिकारिक गाइडलाइन के अनुसार, प्राथमिक उपचार के दौरान इन विशेष बातों का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है:</p>
<p>चीरा न लगाएं: साँप काटने की जगह पर किसी भी स्थिति में ब्लेड या चाकू से काटना, चीरा लगाना, दबाना या मुँह से जहर चूसने की कोशिश बिल्कुल नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण और जहर दोनों तेजी से फैलते हैं.</p>
<p>हल्का बांधें: दंश वाले स्थान के ऊपर किसी रुमाल या रस्सी से बहुत कसकर नहीं, बल्कि हल्का बांधना चाहिए.</p>
<p>साफ पानी से धोएं: जहर के बाहरी असर को कम करने के लिए उस स्थान पर साफ पानी की तेज धारा मारनी चाहिए.</p>
<p>सांत्वना दें: मरीज का ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने के लिए उसे सांत्वना देकर शांत रखना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि बीपी जितना बढ़ेगा, शरीर में जहर उतनी ही तेजी से फैलेगा.</p>
<p>पैदल न चलाएं: यदि साँप ने हाथ पर काटा है, तो हाथ को मोड़कर फ्रैक्चर की तरह लटका देना चाहिए और पीड़ित व्यक्ति को कभी भी खड़ा नहीं होने देना चाहिए, पैदल नहीं चलाना चाहिए और न ही सोने देना चाहिए.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">मुफ्त इलाज और हेल्पलाइन नंबर</span></strong><br />
आपातकालीन स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुँचाने के लिए राज्य की निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा हेल्पलाइन नंबर 108 पर तुरंत कॉल किया जा सकता है. इसके अलावा स्वास्थ्य संबंधी किसी भी अन्य जानकारी या शिकायत के लिए 24&#215;7 टॉल-फ्री नंबर 104 और आयुष्मान भारत योजना की जानकारी हेतु 14555 पर संपर्क किया जा सकता है. अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा ने स्पष्ट किया है कि एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर पूरी तरह से निःशुल्क उपलब्ध है, इसलिए झाड़-फूंक में वक्त गंवाए बिना सीधे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाएं.</p>
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