उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटा-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस में परोसे गए दही में कीड़े मिलने के वायरल वीडियो से उपजे विवाद पर अब डेयरी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी अमूल (GCMMF) ने अपना पक्ष रखा है. कंपनी ने सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘भ्रामक’ और ‘असंभव’ करार दिया है.
जांच में क्या आया सामने?
बीते 15 मार्च 2026 को एक यात्री द्वारा साझा किए गए वीडियो के बाद आईआरसीटीसी (IRCTC) और अमूल के अधिकारियों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक हुई. अमूल के अनुसार:
सप्लाई चेन का हिस्सा नहीं: जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिस बैच के दही पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वह अमूल के अधिकृत नेटवर्क के जरिए उस ट्रेन में सप्लाई ही नहीं किया गया था.
उत्पादन मानक: कंपनी ने स्पष्ट किया कि दही का निर्माण ISO-प्रमाणित संयंत्रों में पूरी तरह से स्वचालित (Automated) प्रक्रिया के तहत होता है, जहाँ इंसानी हस्तक्षेप न्यूनतम है.
वैज्ञानिक तर्क: क्यों मुमकिन नहीं ‘वीविल्स’?
अमूल ने तकनीकी पक्ष रखते हुए बताया कि दही का वातावरण अम्लीय (Acidic) और ऑक्सीजन-रहित होता है. ऐसे में ‘वीविल्स’ (घुन या कीड़े) का जीवित रहना नामुमकिन है. इसके अलावा:
तापमान: दही को हमेशा ठंडे तापमान पर स्टोर किया जाता है, जबकि वीविल्स को पनपने के लिए गर्म और शुष्क वातावरण चाहिए.
हाइजीन ऑडिट: उत्पादन से लेकर वितरण तक के सभी ऑडिट में कोई खामी नहीं पाई गई.
अमूल का कहना है कि वीडियो के विश्लेषण से प्रतीत होता है कि कीड़े संभवतः सर्विंग ट्रे या ऑनबोर्ड वेंडर की स्वच्छता में कमी के कारण वहां पहुंचे होंगे. अमूल उत्पादों की शुद्धता पर सवाल उठाना निराधार है.
क्या था पूरा मामला?
हाल ही में टाटा-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे एक यात्री ने परोसे गए खाने के साथ मिले दही के कप का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था. वीडियो में दही की ऊपरी सतह पर छोटे काले कीड़े (वीविल्स) रेंगते हुए दिखाई दे रहे थे. इस घटना के बाद रेल यात्रियों की सुरक्षा और खान-पान की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हुए थे. आईआरसीटीसी ने तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित वेंडर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और जांच के आदेश दिए थे.
यह पहली बार नहीं है जब वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों में कैटरिंग को लेकर शिकायतें आई हैं, लेकिन अमूल के इस स्पष्टीकरण ने अब गेंद आईआरसीटीसी और ऑनबोर्ड वेंडरों के पाले में डाल दी है. बताते चलें कि इस मामले में आईआरसीटीसी पर 10 लख रुपए और ठेकेदार पर 50 लख रुपए का जुर्माना हुआ है.

