
उदित वाणी, गुवा : किरीबुरू अस्पताल की रेफरल व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं. 18 जनवरी 2026 को रात्रि पाली में एक कर्मचारी की मौत के बाद खदान बंद हो गई, जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है. कर्मचारियों का आरोप है कि समय पर रेफरल कागजात न मिलने से इलाज में बाधा आई.
ब्रेन स्ट्रोक से कोमा, रेफरल में देरी
किरीबुरू खदान अधिकारी को ब्रेन स्ट्रोक से कोमा हुआ. अपोलो अस्पताल भुवनेश्वर रेफर किया गया, लेकिन दो लाख की सीमा समाप्त होने पर रिन्यूअल कागजात सेल प्रबंधन व अस्पताल ने समय पर नहीं दिए. अस्पताल ने मरीज को डिस्चार्ज कर दिया. मौत वाले दिन भी “नो पेशेंट, नो रेफर” कहकर इंकार कर दिया.
आक्रोशित कर्मचारियों ने रात्रि पाली में खदान जाम कर दी. इंटक, एटक, एचएमएस, बीएमएस, सीटू, झारखंड मजदूर यूनियन व झरखेड़ा मजदूर संघर्ष संघ सभी शामिल हुए. रात एक बजे जीएम खान पी.आर. शिरपुरकर, सीजीएम एचआर डी. मिश्रा सहित अधिकारी पहुंचे और वार्ता की. प्रबंधन ने ईडी माइंस से समाधान का आश्वासन दिया.
यूनियनों का आरोप: डॉक्टरों-व्यवस्था की कमी
यूनियनों ने कहा कि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर व गंभीर इलाज की सुविधा नहीं, फिर भी रेफरल में बाधाएं. झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडेय ने चेतावनी दी, “व्यवस्था सुधार न होने पर आंदोलन तेज होगा.”

