
उदित वाणी, रांची: Election Commission of India (ECI) ने झारखंड में अप्रैल से शुरू होने वाले मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की तैयारियां पूरी कर ली हैं।
यह देश में नौवां एसआईआर अभ्यास होगा। इससे पहले आठ बार इस तरह का पुनरीक्षण किया जा चुका है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा कि यह पुनरीक्षण एक ही चरण में संपन्न किया जाएगा। झारखंड भर में मतदाताओं का घर-घर सत्यापन किया जाएगा। राज्य में निवास करने वाले सभी मतदाताओं की पहचान का सत्यापन होगा।
बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) से लेकर राज्य मुख्यालय तक सभी स्तरों पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
2003 की मतदाता सूची बनेगी आधार
झारखंड में होने वाले आगामी एसआईआर के लिए वर्ष 2003 की मतदाता सूची को आधार बनाया जाएगा। इस अभ्यास का उद्देश्य मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी है।
जिन व्यक्तियों के नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में दर्ज हैं, उन्हें अपनी पात्रता दोबारा सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं होगी। जिनका नाम सूची में नहीं है, वे अपने माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्यों के आधार पर पात्रता सिद्ध कर सकते हैं, जिनके नाम वर्ष 2003 की सूची में दर्ज थे।
सत्यापन के लिए विभिन्न वैध सरकारी दस्तावेजों को प्रमाण के रूप में अधिसूचित किया गया है। 1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे व्यक्तियों को जन्म तिथि और जन्म स्थान का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे व्यक्तियों को अपनी जन्म तिथि और जन्म स्थान के प्रमाण के साथ माता या पिता में से किसी एक का दस्तावेज देना होगा। 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे व्यक्तियों को अपनी तथा अपने माता-पिता दोनों की जन्म तिथि और जन्म स्थान का प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
आयोग ने कहा कि इस गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य सभी पात्र नागरिकों को शामिल करना और अपात्र व्यक्तियों को नामांकन से रोकना है।
इसी बीच, अन्य राज्यों में चलाए गए समान पुनरीक्षण अभियानों के दौरान प्राप्त आवेदनों की जांच में झारखंड से संबंधित दस्तावेजों के आधार पर किए गए सैकड़ों दावों को निरस्त किया गया है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अनुसार, पश्चिम बंगाल से 2,769 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 316 दस्तावेजों में विसंगतियों के कारण अमान्य पाए गए। छत्तीसगढ़ से प्राप्त 106 आवेदनों में से 14 अस्वीकृत किए गए। गोवा में 69 में से 12 आवेदन रद्द किए गए। मध्य प्रदेश से प्राप्त 25 में से 2 आवेदन निरस्त हुए।
इसी प्रकार गुजरात से प्राप्त 109 में से 6, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से 58 में से 3, राजस्थान से 25 में से 6 तथा उत्तर प्रदेश से 44 में से 9 आवेदन अमान्य पाए गए।
अब तक प्राप्त 3,208 आवेदनों में से 368 आवेदन सत्यापन के दौरान दस्तावेजों में अनियमितता पाए जाने पर रद्द किए जा चुके हैं।

