
# कभी चार एकड़ जमीन का मालिक था परिवार, अब 20 एकड़ की खरीदारी की
# घर बना आलीशान. दिखने लगीं महंगी-महंगी गाडिय़ा, रुतबा भी बढ़ गया
उदित वाणी, रांची : आइएएस अधिकारी पूजा सिंघल की अवैध संपत्ति पर ईडी की छापेमारी का तार तार बिहार के सहरसा से जुड़ रहा है. उनके सीए सुमन कुमार सिंह के रांची के ठिकाने से 19 करोड़ रुपये नकद मिले हैं. सुमन सहरसा जिले के पतरघट ओपी क्षेत्र के बिशनपुर पंचायत स्थित बासा टोला स्थित वार्ड दो का रहनेवाला है. अब इडी की नजर सुमन के पैतृक गांव पर भी है. सीए सुमन सिंह के ठिकानों पर छापे व उनके ईडी के शिकंजे में फंस जाने की चर्चा गांव-जवार में भी खूब हो रही है. अब लोगों को लग रहा कि इतने कम समय में सुमन की संपत्ति में बेहिसाब बढ़ोत्तरी कैसे हुईू.
कभी सुमन के परिवार के पास महज चार एकड़ जमीन हुआ करती थी. घर भी साधारण था. सुमन हस्तरेखा के जरिए लोगों से संपर्क बढ़ाने का काम करता था. साथ में सीए की पढ़ाई भी.
अब उसके पिता राधेश्याम सिंह उर्फ फुलेश्वर सिंह आलीशान भवन में रहते हैं और दो महंगी गाडिय़ां उनके पास हैं. वे घर में अकेले ही रहते हैं. वे सीसीएल में नौकरी करते थे. हजारीबाग में पदस्थापित थे. क्लर्क थे. 2012 में कोल फील्ड से सेवानिवृत्त हुए. अभी घर पर रहकर ही खेती बाड़ी का काम देखते हैं. फिलहाल उनके घर पर सन्नाटा पसरा हुआ है.
सुमन की मां फूलो देवी का निधन 2016 में हो गया था. वह दो भाई (दूसरा पवन कुमार सिंह- पेशे से पत्रकार रहा) और एक बहन नीलम कुमारी उर्फ ममता सिंह है. सभी शादीशुदा व बाल-बच्चेदार हैं. वे लोग सपरिवार रांची में ही जमीन खरीदकर अपना मकान बनाकर रहते हैं.
गांव के लोगों के बीच चर्चा है कि सीसीएल कोल फील्ड हजारीबाग से क्लर्क ग्रेड से सेवानिवृत्त राधेश्याम सिंह उर्फ फुलेश्वर सिंह के पास सेवानिवृत्ति तक भव्य मकान और महंगी गाडिय़ां नहीं थी. पिछले कुछ सालों गांव में दो महंगी गाडिय़ां हो गयीं. पुश्तैनी जमीन, जो पहले चार एकड़ थी, अब बढ़ कर 20 एकड़ से अधिक हो गयी है. वैसे यह जांच का विषय है कि उनके पास सही में किसके नाम से अब कितनी जमीन हैं.
गांव वाले कहते हैं कि वे इन्हीं गाडिय़ों से अपने खेत देखने जाते हैं. राधेश्याम सिंह उर्फ फुलेश्वर सिंह चार भाई हैं. पैतृक हिस्सेदारी में इन्हें चार एकड़ जमीन मिली है, जबकि अब तक लगभग 20 एकड़ से अधिक जमीन गांव में होने की बात कही जा रही है. फुलेश्वर सिंह के सभी भाई अलग-अलग रहते हैं. वे सब अब भी साधारण जिंदगी जी रहे हैं. उनलोगों के पास ना आलीशान भवन है और ना महंगी गाडिय़ां. ग्रामीणों के अनुसार गांव की महंगी जमीन जो यहां किसी को भी खरीदने की हैसियत नहीं है, वैसी जमीन के मालिक हैं.

