
* रक्षामंत्री राजनाथ सिंह व योगगुरू बाबा रामदेव ने दिशोम गुरु दिवंगत शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन के पैर छुकर लिया आर्शीवाद
उदित वाणी, रांची : नेमरा में आयोजित दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संस्कार भोज में शामिल होने के लिए कई दिग्गजों के साथ ही जनसैलाब उमड़ा. रक्षामंत्री राजनाथ सिह केन्द्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में संस्कार भोज में शामिल हुए. उनके साथ रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ भी नेमरा पहुंचे. इनके अलावा राज्यपाल संतोष गंगवार, राज्य के मंत्री-विधायक, योग गुरु बाबा रामदेव, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेडडी, पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, पूर्व राज्यसभा सांसद आर के आनंद समेत देश के दिग्गज नेता, प्रमुख हस्तियों के अलावा राजनीतिक कार्यकर्ता, सरकारी अधिकारी, सामाजिक प्रतिनिधि और पारिवारिक रिश्तेदार समेत आमलोग भी श्राद्ध भोज में शामिल होकर पूर्व मुख्यमंत्री सह राज्यसभा सदस्य शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि दी तथा स्वजनों से भी मिले.
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह व योगगुरू बाबा रामदेव ने दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि देकर दिवंगत शिबू सोरेन की पत्नी व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन के पैर छुकर आर्शीवाद लिया. वहीं झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के अंतर्गत संचालित 64 क्लस्टरों और सभी ग्राम संगठनों में सैकड़ों स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया. पांच विशाल पंडालों में आंगतुको को 12 तरह के व्यंजन परोसे गये थे. श्राध्द भोज के लिए 300 से अधिक चूल्हों पर 12 से ज्यादा व्यंजन तैयार किए गए. हर पंडाल में गुरुजी की तस्वीर लगाई गई थी. जहां लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे थे. बिजली की कोई समस्या न हो. इसके लिए 200 से ज्यादा जनरेटर लगाए गए थे.

गुरुजी सिर्फ आदिवासियों के ही नहीं, बल्कि अन्य समाज के भी अभिभावक के रूप में जाने जाते थे-राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह ने गुरुजी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी तथा मुख्यमंत्री एवं उनके पारिवारिक सदस्यों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन से मेरी कई मुलाकातें हुई. उनकी सहजता, सरलता एवं व्यक्तित्व मुझे प्रभावित करती थी. गुरुजी सिर्फ आदिवासियों के ही नहीं, बल्कि अन्य समाज के भी अभिभावक के रूप में जाने जाते थे. मैं अपनी ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.

लोग भले ही मुझे योगगुरु मानते हैं, लेकिन मैं शिबू सोरेन को गुरु मानता हूं- बाबा रामदेव
बाबा रामदेव ने कहा कि जब भी मैंने कोई योग शिविर या कोई कार्यक्रम आयोजित किया, गुरूजी हमेशा शामिल होते थे. लोग भले ही मुझे योगगुरु मानते हैं. लेकिन मैं शिबू सोरेन को गुरु मानता हूं और उन्हें श्रद्धांजलि देने आया हूँ. बाबा रामदेव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कामों की भी तारीफ़ की और कहा कि जो झारखंड के लोगों के लिए संघर्ष करते हैं. हेमंत सोरेन उनके लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा हैं. लोगों को उनसे भी एक बड़ी सीख लेनी चाहिए. उन्होंने गुरुजी को युगपुरुष और राष्ट्रपुरुष बताते हुए कहा कि इनका सम्मान केवल झारखंड में ही नहीं बल्कि पुरे देश और सभी आदिवासी समाज में सर्वसमाज उन्हें एक गुरु की तरह मानता है.

सुरक्षा के लिए किये गये थे कड़े इंतजाम
श्राद्ध भोज में शामिल हर उम्र के लोग शामिल हुए. जिनमें बच्चे, बूढ़े, महिलाएं और दिव्यांगजन भी शामिल थे. भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. सुरक्षा को लेकर 10 आईपीएस अधिकारी, 60 पुलिस उपाधीक्षक, 65 निरीक्षक और 2500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे. पार्किंग की व्यवस्था स्वयं पेयजल व स्वच्छता तथा उत्पाद मंत्री योगेन्द्र प्रसाद महतो व रामगढ़ एसपी ने संभाल रखा था. बड़े स्तर पर पार्किंग की व्यवस्था की गई थी. 6 बड़े पार्किंग स्थल बनाए गये थे. लुकईयाटांड में लगभग 3000 वाहनों, नेमरा में वीवीआईपी के लिए 50 वाहनों और अन्य स्थानों पर कुल मिलाकर 5000 से अधिक वाहनों के लिए पार्किंग की सुविधा दी थी.
नेमरा की माटी फिर एक बार भावुक हो उठी
उन्होंने कहा कि नेमरा की माटी आज फिर भावुक हो उठी. जब लाखों की संख्या में आगंतुक यहां अपने महानायक के स्मृति शेष दिशोम गुरु शिबू सोरेन को नमन करने उमड़ पड़े. सभी ने स्मृति शेष दिशोम गुरु जी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अद्वितीय योगदान को स्मरण किया. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने स्मृति शेष शिबू सोरेन के संस्कार भोज में शामिल होने के लिए राज्य के कोने-कोने से आए लोगों के प्रति आभार जताया. उन्होंने कहा कि बाबा जब नई दिल्ली के एक अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे थे. उन कठिन परिस्थितियों में राज्य वासियों का हमारे परिवार को संबल प्राप्त हुआ उसे कभी भूल नहीं सकता हूं. बाबा भले ही हमें हमेशा के लिए छोड़कर चले गए. लेकिन इस राज्य के मार्गदर्शक एवं पथ प्रदर्शक के रूप में वे सदैव याद रखे जायेंगे.

संस्कार भोज में शामिल लोगों ने दिशोम गुरु की जिंदगी और व्यक्तित्व की ही दिखे बातें करते
संस्कार भोज में शामिल लोगों ने दिशोम गुरु की जिंदगी और व्यक्तित्व की ही बातें करते दिखे. उनका कहना था कि उनका जीवन संघर्षों से भरा था. लेकिन उन्होंने संघर्ष को ही अपना हथियार बनाया. बाबा का पूरा जीवन इस राज्य के लिए समर्पित रहा. वे एक तरफ त्याग और संघर्ष की मिसाल थे तो दूसरी तरफ आदिवासी चेतना के वाहक. शोषण एवं अत्याचार के खिलाफ उलगुलान उनकी पहचान बनी तो झारखंड आंदोलन के अग्रदूत भी थे. झारखंड अलग राज्य बना तो यह उनके ही आंदोलन की ही देन है. वे एक कुशल नेतृत्वकर्ता तथा संगठन कर्ता थे. उन्हें हम ना हम कभी भूले थे. ना भूले हैं और ना ही भूलेंगे. वे हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे. उनके आदर्शों को हम अपने जीवन में आत्मसात करेंगे.

