
रांची: झारखंड की धरती पर लोक-संस्कृति की मिठास बिखेरने वाले 82 वर्षीय नागपुरी गायक-गीतकार महावीर नायक को मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया। इस ऐतिहासिक क्षण पर उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “यह सम्मान मेरे दिवंगत पिता-दादा और क्षेत्रीय नागपुरी भाषा के सभी कलाकारों को समर्पित है। यह मुझसे अधिक झारखंड की मधुर संस्कृति का सम्मान है।”
‘भिनसरिया कर राजा’ से अंतरराष्ट्रीय मंच तक
महावीर नायक नागपुरी लोक-संगीत में ‘भिनसरिया कर राजा’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। यह राग विशेषतः सुबह-सुबह गाया जाता है, जब रातभर अखरा या मंच पर नाच-गान के बाद थके हुए लोग उनके मधुर गायन में फिर से डूब जाते थे। गांव-चौपालों से लेकर ताइवान तक, उन्होंने नागपुरी गीतों के माध्यम से झारखंड की सांस्कृतिक छवि को विश्व मंच तक पहुंचाया।
संगीत यात्रा: पांच हजार से अधिक गीतों का संकलन
रांची के कांके स्थित उरूगुटु गांव में 24 नवंबर 1942 को जन्मे महावीर नायक ने नागपुरी भाषा में 5,000 से अधिक गीतों का संकलन किया है, जिनमें से 300 से ज्यादा गीतों की रचना उन्होंने स्वयं की है। उनकी पहली गीत-संग्रह 1962 में प्रकाशित हुई थी। बाद में 1993 में ‘नागपुरी गीत दर्पण’ नामक एक और महत्वपूर्ण पुस्तक सामने आई।
पुरस्कारों की लम्बी श्रृंखला
महावीर नायक को वर्ष 2023 में भारत सरकार की संगीत नाटक अकादमी द्वारा ‘अमृत पुरस्कार’ से भी नवाजा गया था, जो उन्हें उपराष्ट्रपति के हाथों मिला।इसके अतिरिक्त उन्हें कई क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। वे पत्रिकाओं ‘डहर’ और ‘कला संगम’ से भी जुड़े रहे, साथ ही वे आकाशवाणी और दूरदर्शन के लिए 1980 के दशक से लगातार प्रदर्शन करते रहे।
शिक्षक से कलाकार तक: एक समर्पित जीवन
1959 से 1961 तक उन्होंने शिक्षक के रूप में काम किया। बाद में रांची स्थित एचईसी (हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन) में कार्यरत रहे और 2001 में सेवानिवृत्त हुए। लेकिन नौकरी में रहते हुए और उसके बाद भी नागपुरी संगीत उनकी आत्मा में बसा रहा। उन्होंने रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के साथ-साथ 20 से अधिक सांस्कृतिक संस्थाओं के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाई।
कलाकारों की पीढ़ी के लिए प्रेरणा
1992 में वह पद्मश्री रामदयाल मुंडा और पद्मश्री मुकुंद नायक के नेतृत्व में 20 सदस्यीय सांस्कृतिक दल के साथ ताइवान भी गए थे। 2002 में संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली द्वारा आयोजित कार्यशाला में उन्होंने प्रशिक्षक के रूप में योगदान दिया।
एक धरोहर, एक प्रेरणा
महावीर नायक केवल एक गायक नहीं, झारखंड की सांस्कृतिक आत्मा के वाहक हैं। उनका पद्मश्री से सम्मानित होना न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह झारखंड की लोक-संस्कृति, नागपुरी भाषा और क्षेत्रीय परंपरा का राष्ट्रीय स्तर पर गौरवगान है।
(IANS)

