
उदित वाणी, रांची : राज्य में नगर निकायों का चुनाव अब जल्द कराने को लेकर सरकार के शीर्ष स्तर पर सैद्धांतिक सहमति बनी है. इसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष व सदस्य पद पर नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा गया है. प्राप्त जानकारी के अनुसार आनेवाले सप्ताह में ही आयोग के अध्यक्ष व सदस्य के एक रिक्त पद पर नियुक्ति कर दी जाएगी. बताया गया कि इसके अलावा राज्य निर्वाचन आयोग के अध्यक्ष पद पर भी जल्द नियुक्ति कर दी जायेगी.
जानकारों के मुताबिक कई संवैधानिक व वैधानिक कारणों से सरकार ने अब निकाय चुनाव को नहीं लटकाने का फैसला किया है. दूसरी ओर झारखंड हाईकोर्ट का भी निकाय चुनाव को लेकर कड़ा रूख है. सरकार नियुक्तियों के बाद राज्य में नगर निकायों के चुनाव की दिशा में तेजी लायेगी. यद्यपि बरसात के बाद और दुर्गा पूजा से पूर्व ही राज्य में निकायों के चुनाव कराये जाने की संभावना है. जबकि राज्य सरकार के आदेश पर आयोग ने सभी 24 जिलों में ट्रिपल टेस्ट का काम पूरा कर लिया है और उसके कंपाइलेशन के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया भी जारी कर दी गई है. कंपाइलेशन के बाद आंकड़े को राज्य सरकार को भेजना है. लेकिन आयोग में अध्यक्ष के नहीं रहने के कारण इसमें बिलंब हो रहा है.
मालूम हो कि पिछड़ा वर्ग आयोग में अध्यक्ष के अलावा सदस्य के तीन पद हैं. सदस्य पद पर नंद किशोर मेहता और लक्ष्मण यादव पदस्थापित हैं. लेकिन आयोग के पूर्ण गठन हो जाने पर ही ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी हो पायेगी और चुनाव कराने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो पायेगा. राज्य के 13 नगर निकायों में बर्ष 2020 से ही चुनाव लंबित है. दूसरी ओर 35 अन्य शहरी निकायों का कार्यकाल भी बर्ष 2023 के मार्च-अप्रैल महीने में समाप्त हो चुका है. चुनाव नहीं कराने से अब तक झारखंड को लगभग 1600 करोड़ से अधिक की राशि केंद्र से अनुदान के रूप में प्राप्त नहीं हो पाया है और निकायों को केंद्रीय अनुदान की राशि नहीं मिलने की वजह से कई योजनाएं लंबित है.
