
उदित वाणी, रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के मदरसा शिक्षकों को पेंशन और ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है. न्यायमूर्ति आनंदा सेन की बेंच ने 13 जून 2024 को इस संबंध में पारित आदेश का पालन नहीं करने को गंभीर माना है और इसे लेकर मानव संसाधन विभाग के प्रधान सचिव राहुल पुरवार और माध्यमिक शिक्षा एवं साक्षरता निदेशालय के निदेशक को अगली सुनवाई में सशरीर उपस्थित होने को कहा है.
अदालत ने विभाग के शीर्ष अफसरों को यह बताने को कहा है कि अदालत के आदेश की अवमानना के आरोप में उन पर क्यों नहीं चार्ज फ्रेम किया जाए? अदालत ने स्पष्ट किया है कि आदेशों की अनदेखी न्यायिक प्रक्रिया के विरुद्ध है. मामले की अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद निर्धारित की गई है.
अदालत में सुनवाई के दौरान याचियों की ओर से बताया गया कि सरकार ने वर्ष 2014 में एक संकल्प जारी किया था कि 2014 के बाद सेवानिवृत्त होने वाले मदरसा शिक्षकों को पेंशन और ग्रेच्युटी का लाभ नहीं दिया जाएगा. इस संकल्प को चुनौती देने पर 24 अक्टूबर 2014 को हाईकोर्ट ने सरकार के निर्णय को रद्द करते हुए संबंधित शिक्षकों को पेंशन और ग्रेच्युटी का भुगतान करने का आदेश दिया था. इसके बावजूद आदेश का अनुपालन नहीं होने पर प्रार्थियों ने अवमानना याचिका दायर की.
इस दौरान सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर दावा किया गया कि संबंधित शिक्षकों को भुगतान कर दिया गया है. हालांकि, याचियों की ओर से इसके विपरीत कहा गया कि उन्हें भुगतान नहीं मिला है. इसी क्रम में मोहम्मद एजाबुल हक एवं अन्य की ओर से फिर से हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई. अगली सुनवाई में दोनों अधिकारियों को अपने-अपने पक्ष में जवाब पेश करना होगा, अन्यथा अदालत आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करेगी.
(आईएएनएस)

