
उदित वाणी, घाटशिला : झारखंड आंदोलनकारियों की समग्र सामाजिक सुरक्षा एवं झारखंड में समरसता पर व्यापक चर्चा के लिए गुरुवार 22 नवंबर को फुलडुंगरी स्थित बाबा तिलका माझी क्लब में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई. बैठक की अध्यक्षता प्रो. श्याम मुर्मू, आदित्य प्रधान, सुरई बास्के एवं अजीत तिर्की ने संयुक्त रूप से की और राज्य में आंदोलनकारियों के अधिकार, सम्मान एवं सामाजिक सुरक्षा को लेकर विस्तृत विमर्श किया.
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि झारखंड राज्य के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आंदोलनकारियों की बेहतर सामाजिक सुरक्षा योजना, झारखंडी समाज के ज्वलंत मुद्दों तथा पारंपरिक सामाजिक समरसता को बनाए रखने के सवाल पर राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक संयुक्त विचार-पत्र तैयार किया जाएगा. इसी कड़ी में आगामी 13 दिसंबर को राजधानी रांची में राज्य-स्तरीय झारखंड आंदोलनकारी एकजुटता सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें राज्य भर से आंदोलनकारी संगठनों व साथियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया.
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि झारखंड राज्य गठन के 25 वर्ष और धरती आबा वीर बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष पर राज्य के विभिन्न जिलों से आए आंदोलनकारी सामाजिक सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों के प्रश्न पर एक मंच पर जुट रहे हैं. ‘झारखंड आंदोलनकारी सेनानी समन्वय आह्वान’ की ओर से आयोजित इस बैठक में आंदोलनकारियों ने कहा कि यह अवसर केवल उत्सव का नहीं, बल्कि संघर्ष की विरासत को संरक्षित कर अधिकारों की मजबूती का भी है.
आयोजन समिति की ओर से बताया गया कि वर्तमान सामाजिक सुरक्षा नीति सीमित दायरे में होने के कारण हजारों वास्तविक आंदोलनकारी—खासकर वे जो जेल नहीं गए, लेकिन लंबे समय तक आंदोलन में सक्रिय रहे—अब भी पेंशन, जीवन एवं स्वास्थ्य बीमा और सम्मानजनक जीवन से वंचित हैं. इस परिस्थिति में एक मजबूत संयुक्त मंच और राज्य सरकार से संस्थागत संवाद की जरूरत पर बल दिया गया, ताकि आंदोलनकारियों के प्रति न्यायपूर्ण और सम्मानजनक नीति लागू की जा सके.
बैठक का मुख्य एजेंडा और प्रस्ताव
बैठक में संयुक्त मांग-पत्र के तहत निम्न प्रमुख प्रस्तावों पर सहमति बनी—
* सभी झारखंड आंदोलनकारियों के लिए समान सामाजिक सुरक्षा एवं प्रशस्ति पत्र अविलंब प्रदान किए जाएं.
* पेंशन राशि में महंगाई के अनुरूप बढ़ोतरी और नियमित भुगतान की ठोस गारंटी सुनिश्चित हो.
* सभी आंदोलनकारियों को समूह जीवन एवं स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के अंतर्गत तत्काल शामिल किया जाए.
* आंदोलनकारियों के आश्रितों को सरकारी सेवा में सीधी नियुक्ति देने की व्यवस्था की जाए.
* झारखंड आंदोलनकारियों के इतिहास, योगदान और बलिदान को संरक्षित करने हेतु झारखंड आंदोलनकारी संग्रहालय सह स्मारक का निर्माण कराया जाए.
* झारखंड आंदोलनकारी चिह्नीकरण आयोग का पुनर्गठन व सुदृढ़ीकरण कर पारदर्शी पहचान प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए.
* राज्य सरकार से अपेक्षा की गई कि वह आंदोलनकारियों के मुद्दों पर सम्मानजनक संवाद प्रारंभ कर शीघ्र समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए, ताकि आंदोलनकारी गौरवान्वित महसूस कर सकें.
विशिष्ट अतिथि व सम्मान
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि श्री प्रभाकर तिर्की उपस्थित रहे. विशिष्ट अतिथि के रूप में वयोवृद्ध झारखंड आंदोलनकारी श्री हलधर सोरेन, ललित महतो, श्रीमती सुप्रीत मुर्मू, सुधा रानी बेसरा, मानव घोष दोस्तीदार, रतन तिर्की, राजू महतो, जॉय वाखला, सेल्सटीन कुजूर, परवेज आलम, परवीन कच्छप, लालटू महतो एवं पंकज मंडल समेत अनेक वरिष्ठ आंदोलनकारी शामिल हुए. इस अवसर पर वरिष्ठ आंदोलनकारी श्री हलधर सोरेन को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया.
बैठक में बहरागोड़ा, घाटशिला, मुसाबनी, जमशेदपुर, गुमला, लातेहार, पलामू सहित अनेक क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आंदोलनकारी साथियों ने शिरकत की. कार्यक्रम का संचालन गौतम कुमार बोस ने किया.
कार्यक्रम को सफल बनाने में संदीप महापात्र, तारिणी कुमार महतो, दामु बेसरा, अभय पांडेय, ब्रेरना कांडुलना, कनीज फातिमा, अनिमा बोस, नासिर खान, संजय बेहरा, नारायण सोरेन, सुनील मार्डी, विद्याधर मन्ना, धनंजय महतो, तरुण मुखर्जी, विनीता खलखो, बहादुर सोरेन, देवाशीष सहित अनेक आंदोलनकारियों का विशेष योगदान रहा.
अंत में आयोजन समिति ने सभी आंदोलनकारियों एवं संबंधित संगठनों से अपील की कि वे रांची में होने वाले प्रस्तावित प्रदेश-स्तरीय सम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर संयुक्त संघर्ष को सशक्त और व्यापक बनाएं. आयोजन समिति की ओर से प्रो. श्याम मुर्मू, आदित्य प्रधान, सुरई बास्के एवं अजीत तिर्की ने संयुक्त रूप से धन्यवाद ज्ञापित किया.

