
नई दिल्ली: हूल दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और विभिन्न राज्यों के नेताओं ने 1855 की संथाल क्रांति के वीर सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक्स पर लिखे संदेश में कहा – “हूल दिवस पर मैं सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो और संथाल विद्रोह के अन्य सभी वीर सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं. अन्याय के विरुद्ध उनके संघर्ष की अमर गाथाएं देशवासियों के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत हैं. उनके त्याग और बलिदान को लोग सदैव याद रखेंगे.”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा – “संथाल शौर्य देश की प्रेरणा”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में लिखा – “हूल दिवस हमें हमारे आदिवासी समाज के अदम्य साहस और अद्भुत पराक्रम की याद दिलाता है. संथाल क्रांति से जुड़े इस विशेष अवसर पर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो और सभी वीर-वीरांगनाओं को नमन. उनकी शौर्यगाथा देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्रेरित करती रहेगी.”
संसद के मुखिया और मंत्रियों की श्रद्धांजलि
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने संदेश में संथाल विद्रोह को स्वाभिमान और स्वतंत्रता के अद्वितीय संग्राम की संज्ञा दी. उन्होंने लिखा – “हूल दिवस पर हम उन वीर आदिवासी भाइयों-बहनों को नमन करते हैं जिन्होंने महान सिदो-कान्हू के नेतृत्व में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ क्रांति का शंखनाद किया.”
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा – “‘अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो’ का नारा बुलंद कर विद्रोह का बिगुल फूंक देने वाले वीरों की गौरवगाथा आने वाली पीढ़ियों को अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा देती रहेगी.”
झारखंड, बिहार, मध्यप्रदेश सरकारों ने भी दी श्रद्धांजलि
झारखंड मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से एक्स पर लिखा गया – “हूल दिवस पर अमर शहीद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो सहित हजारों वीरों को शत-शत नमन.”
बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा – “हूल दिवस, आदिवासियों द्वारा अपने अधिकारों हेतु पहले बड़े संगठित विद्रोह की याद दिलाता है. वीर सिदो-कान्हू और उनके साथियों के त्याग को कोटि-कोटि नमन.”
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लिखा – “1855 के संथाल हूल क्रांति के अमर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि. उनके संघर्ष ने स्वतंत्रता की लौ को देश के कोने-कोने में प्रज्ज्वलित किया.”
हूल दिवस: एक ऐतिहासिक जनक्रांति की अमर स्मृति
हर वर्ष 30 जून को हूल दिवस मनाया जाता है. यह दिन 1855 में संथाल आदिवासियों द्वारा ब्रिटिश शासन, जमींदारों और महाजनों के शोषण के खिलाफ किए गए एक सशस्त्र जनविद्रोह की स्मृति में समर्पित है. झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र से शुरू हुआ यह आंदोलन भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय योगदान की पहली संगठित लहर थी. संथाली भाषा में हूल का अर्थ होता है – विद्रोह. इस आंदोलन में हजारों संथालों ने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध हथियार उठाए और अपने अधिकारों की लड़ाई में वीरगति को प्राप्त हुए.
(IANS)

