
उदित वाणी जमशेदपुर : टाटानगर रेलवे स्टेशन परिसर स्थित रेलवे अस्पताल में गैस की कमी का असर अब मरीजों पर साफ दिखाई देने लगा है। अस्पताल प्रशासन को मजबूरी में शनिवार से मरीजों को मिलने वाला भोजन बंद करना पड़ा है। इससे खासकर उन मरीजों को भारी परेशानी हो रही है जो दूर-दराज से इलाज के लिए आते हैं और जिनके साथ देखभाल करने वाला कोई परिजन मौजूद नहीं होता।
अस्पताल में भर्ती ऐसे मरीजों के सामने अब भोजन की समस्या खड़ी हो गई है। कई मरीजों को बाहर से खाना मंगाने की व्यवस्था करनी पड़ रही है, जबकि कुछ मरीज आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण मुश्किल में पड़ गए हैं। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में इलाज के साथ भोजन की सुविधा भी बंद होने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
इस बीच केंद्र और राज्य सरकार की ओर से गैस की किल्लत को अफवाह बताया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। स्थानीय स्तर पर कई एजेंसी संचालकों पर भी गलत जानकारी देने के आरोप लग रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि गैस की कोई कमी नहीं है तो अस्पतालों और अन्य संस्थानों को इसकी आपूर्ति क्यों नहीं हो पा रही है।
रेलवे अस्पताल के ठीक बगल में स्थित सदर अस्पताल की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। यहां भी गैस आपूर्ति बाधित होने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि जिले में गैस की कोई किल्लत नहीं है तो प्रशासन अस्पतालों को नियमित आपूर्ति क्यों नहीं सुनिश्चित कर पा रहा है। वहीं रेलवे अधिकारियों की ओर से भी इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।
इस मामले में मेंस कांग्रेस के नेता शशि मिश्रा ने बताया कि उन्हें शुक्रवार को ही गैस की कमी की सूचना मिली थी। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में अस्पताल प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए ताकि मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे के रनिंग रूम में भी गैस की भारी किल्लत बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार ब्रांच लाइन के करमपदा, बिमलगढ़ और जरूली जैसे स्टेशनों पर एजेंसी संचालक गैस के अभाव में लकड़ी का इस्तेमाल कर भोजन बना रहे हैं। इसका असर कर्मचारियों के मेनू पर भी पड़ा है। फिलहाल उन्हें सिर्फ दाल-भात और सब्जी ही परोसी जा रही है, जबकि अतिरिक्त या फरमाइशी भोजन की सुविधा बंद कर दी गई है।

