
उदित वाणी जमशेदपुर/रांची : स्टील क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टाटा स्टील लिमिटेड (Tata Steel Ltd) ने झारखंड सरकार के जीएसटी विभाग द्वारा जारी किए गए भारी भरकम टैक्स डिमांड के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.. कंपनी ने 11 मार्च 2026 को एक रिट पिटीशन (Writ Petition) दाखिल कर जमशेदपुर के सीजीएसटी कमिश्नर द्वारा पारित ‘टैक्स डिमांड ऑर्डर’ को रद्द करने की मांग की है..
मामले का पूरा विवरण
यह विवाद वित्त वर्ष 2018-19 से 2022-23 के दौरान इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के कथित गलत उपयोग (Irregular Availment) से जुड़ा है.. जमशेदपुर स्थित सीजीएसटी और केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त के कार्यालय ने 18 दिसंबर 2025 को एक आदेश पारित किया था, जिसमें कंपनी को भारी जुर्माना और टैक्स चुकाने का निर्देश दिया गया था..
टैक्स और पेनल्टी का ब्रेकअप:
- विवादित टैक्स डिमांड: ₹493.35 करोड़
- लगाया गया जुर्माना (Penalty): ₹638.83 करोड़
- कुल मांग: ₹1,132.18 करोड़ (प्लस लागू ब्याज)
टाटा स्टील का पक्ष: “500 करोड़ से अधिक का पहले ही हो चुका है भुगतान”
टाटा स्टील ने अपनी याचिका और स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में स्पष्ट किया है कि विभाग द्वारा की गई मांग अनुचित है.. कंपनी के मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:
- नियमित भुगतान: टाटा स्टील का कहना है कि उसने सामान्य व्यावसायिक गतिविधियों के दौरान ₹514.19 करोड़ का जीएसटी पहले ही चुका दिया था.. कंपनी का तर्क है कि इस राशि को विभाग द्वारा जारी नोटिस में सही ढंग से समायोजित (Appropriated) नहीं किया गया..
- तथ्यों की अनदेखी: कंपनी ने आरोप लगाया कि एडजुडिकेशन प्रक्रिया के दौरान उनके द्वारा दिए गए विस्तृत जवाबों और सबूतों पर प्रशासन ने उचित संज्ञान नहीं लिया..
- मेरिट पर भरोसा: कंपनी ने हाईकोर्ट को बताया कि कानूनी रूप से उनका पक्ष मजबूत है और विभाग का आदेश कानून की नजर में टिकने योग्य नहीं है..
बाजार और परिचालन पर प्रभाव
टाटा स्टील ने निवेशकों को आश्वस्त किया है कि इस कानूनी कार्यवाही का कंपनी के दैनिक परिचालन (Operational activities) या वित्तीय स्थिति पर तत्काल कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा.. कंपनी ने सेबी (SEBI) के नियमों के तहत एक्सचेंजों को सूचित किया है कि वे इस आदेश को रद्द कराने के लिए सभी कानूनी विकल्पों का उपयोग कर रहे हैं..
आगे की राह
झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल इस रिट पिटीशन पर जल्द ही सुनवाई होने की उम्मीद है.. यदि कोर्ट से कंपनी को राहत मिलती है, तो यह टाटा स्टील के लिए बड़ी जीत होगी.. अन्यथा, यह मामला लंबी कानूनी प्रक्रिया में जा सकता है..
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