
उदित वाणी, जमशेदपुर : 4 मार्च 2007, होली का दिन. रंगों और उत्साह के बीच घाटशिला अनुमंडल के किशनपुर गांव के बाघुड़िया का फुटबॉल मैदान लोगों से खचाखच भरा था. जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे निर्वाचित झामुमो सांसद सुनील महतो बतौर मुख्य अतिथि एक फुटबॉल प्रतियोगिता में पहुंचे थे. मैदान में बड़ी संख्या में ग्रामीण, खिलाड़ी और समर्थक मौजूद थे. मंच पर सुनील महतो, प्रभाकर महतो समेत अन्य लोग बैठे थे और कार्यक्रम चल रहा था.
इसी दौरान घात लगाकर पहुंचे नक्सलियों ने भीड़ का फायदा उठाते हुए अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. हमलावरों ने बेहद नजदीक से सांसद सुनील महतो पर गोलियां चलाईं. 41 वर्ष की आयु में उनकी मौके पर ही हत्या कर दी गई. इस हमले में उनके दो अंगरक्षक और झामुमो नेता प्रभाकर महतो भी मारे गए. हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद हथियार लूटकर फरार हो गए.
होली का दिन देखते ही देखते दहशत और मातम में बदल गया. उस समय सुनील महतो झारखंड की राजनीति में उभरते हुए युवा चेहरों में गिने जाते थे और ग्रामीण इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी. यह घटना राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक और भयावह अध्याय बनकर दर्ज हो गई.
दहल गया था झारखंड
19 साल पहले हुआ सुनील महतो हत्याकांड पूरे झारखंड को दहला गया था. रंगों का त्योहार देखते ही देखते मातम में बदल गया था. उनकी हत्या को नक्सलियों द्वारा सुनियोजित हमला बताया गया. इस दुस्साहसिक वारदात ने न केवल पूर्वी सिंहभूम बल्कि पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया. एक निर्वाचित सांसद की इस तरह दिनदहाड़े हत्या ने झारखंड की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया.
CBI जांच के बावजूद रहस्य बरकरार
नक्सली हत्याकांड के बाद केंद्र व राज्य सरकारों पर अपराधियों को तत्काल पकड़कर कड़ी सजा दिलाने का भारी दबाव बना. मामले की गंभीरता को देखते हुए केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को जांच सौंपी गई. सीबीआई ने विस्तृत तफ्तीश की, कई शक के लोगों से हवालात ली, कुछ को गिरफ्तार किया और चार्जशीट भी दाखिल की. फिर भी स्थानीय निवासी व परिजन मानते हैं कि हत्या के सभी आयामों का सम्पूर्ण उद्घाटन अब तक नहीं हो सका.
अनुत्तरित प्रश्न बने हुए
हमले की षड्यंत्रकारी योजना किस स्तर पर बनी और क्या सभी उत्तरदायी व्यक्ति न्याय के दायरे में आए—ये सवाल अभी भी अनसुलझे हैं. 4 मार्च 2026 को सुनील महतो की शहादत दिवस पर इस केस का निष्पक्ष व अंतिम खुलासा सुनिश्चित करने की मांग दोबारा उठेगी. समर्थक, सामाजिक संगठन व राजनीतिक कार्यकर्ता श्रद्धांजलि सभा करेंगे. संयोग से 2007 के बाद 2026 में भी 4 मार्च को होली ही है.
न्याय की आस बनी हुई
घाटशिला व आसपास इलाकों में आज भी लोग उस घटना की स्मृति मात्र से आहत हो उठते हैं. बाघुड़िया का वह मैदान—जो कभी खेल-उत्सव का केंद्र था-अब इतिहास के काले पृष्ठ का गवाह बन चुका. 19 वर्ष व्यतीत होने पर भी यह प्रकरण जनमानस में सजग बना रहता. प्रतिवर्ष शहादत दिवस पर स्मरणोत्सव के साथ न्याय की पुकार गूंजती है. 4 मार्च 2026 को होली के रंगों के बीच सुनील महतो की शहादत की स्मृति गहरा जाएगी और समर्थकों की पुकार बलवती होकर लौटेगी कि हत्याकांड का संपूर्ण सत्य उजागर हो. आनंदोत्सव पर हुई इस क्रूरता का प्रतिकार ही सच्ची सलामी होगी.
चाकुलिया में शहीद सुनील महतो की प्रतिमा:
पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया प्रखंड अंतर्गत सिमदी गांव में शहीद सुनील महतो की प्रतिमा स्थापित है. 22 जून 2025 को विधायक समीर मोहंती ने इस प्रतिमा के माध्यम से उनके संघर्ष, सिद्धांतों और योगदान को सदैव स्मरण रखने का संकल्प लिया, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनसे प्रेरणा ले सकें.

