
उदित वाणी, जमशेदपुर : आज पूरी दुनिया में हर 40 सेकेंड में आत्महत्या की एक घटना हो रही है. भारत सहित झारखंड राज्य में भी आत्महत्या की घटनाओं में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है. यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है और समाज को इस दिशा में गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है. आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल शारीरिक स्वास्थ्य नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक सहयोग (इमोशनल सपोर्ट) पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है. ये विचार ‘जीवन’ संस्था की संयुक्त निदेशक गुरप्रीत भाटिया ने एल.बी.एस.एम कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग द्वारा आयोजित व्याख्यान श्रृंखला-2.1 के अंतर्गत “आत्महत्या की प्रवृत्ति एवं उसकी रोकथाम” विषय पर आयोजित कार्यशाला में व्यक्त किए.
गुरप्रीत भाटिया ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से तनाव, अवसाद, चिंता-विकृति और आत्महत्या की मानसिक अवस्थाओं को विस्तार से समझाया. उन्होंने कहा कि हमारे समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की भारी कमी है, जबकि यह आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है. उन्होंने सकारात्मक सोच अपनाने, तनाव के कारणों को पहचानने और उन्हें कम करने, स्वयं के साथ समय बिताने तथा अपने सकारात्मक गुणों को पहचानकर उनका उपयोग करने पर बल दिया.
इस दौरान ‘जीवन’ संस्था की पूरबी और नील कुमार ने भी प्रस्तुति में सहयोग किया. कार्यशाला के दौरान छात्रों के साथ संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सवाल पूछे. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई. मनोविज्ञान विभाग के डॉ. प्रशांत ने अतिथियों को पौधा, स्मृति चिह्न भेंट कर एवं शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया.
नीड के लिए प्रकृति के पास बहुत कुछ, ग्रीड के लिए नहीं : डॉ. अशोक कुमार झा
अध्यक्षीय वक्तव्य में एलबीएसएम कॉलेज के प्राचार्य डॉ. (प्रो.) अशोक कुमार झा ने कहा कि आत्महत्या के आंकड़े भले ही भयावह हों, लेकिन जीवन से मूल्यवान कुछ भी नहीं है. उन्होंने कहा कि आज जो देश जितना विकसित है, वह उतना ही कर्जदार भी है. बाजारवाद ने ऐसी कृत्रिम आवश्यकताएं पैदा कर दी हैं, जिनकी दौड़ में लोग फंसते जा रहे हैं. इसी होड़ और प्रतिस्पर्धा के कारण अवसाद और मानसिक तनाव बढ़ रहा है.
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नीड के लिए प्रकृति में बहुत कुछ है, लेकिन ग्रीड के लिए नहीं. लोभ की कोई सीमा नहीं होती.
कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुधीर कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन मनोविज्ञान विभाग की प्रो. प्रमिला किस्कू ने किया. इस अवसर पर आईक्यूएसी की संयोजक डॉ. मौसमी पॉल, कॉमर्स विभाग के अध्यक्ष डॉ. विजय प्रकाश, डॉ. अजय वर्मा, डॉ. रानी सहित अन्य शिक्षक उपस्थित थे. आयोजन की तैयारी में रामू और अरुण की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही.

