उदित वाणी,जमशेदपुर :झारखंड के अंगीभूत महाविद्यालयों में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी तरह बंद होने के साथ ही वहां वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों के सामने जीवनयापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हाल ही में इंटरमीडिएट द्वितीय वर्ष की परीक्षाओं के संपन्न होते ही कॉलेजों में इंटर की कक्षाएं स्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं। इसके साथ ही राज्य भर के विभिन्न कॉलेजों में कार्यरत लगभग दो हजार से अधिक शिक्षक और कर्मचारी अचानक बेरोजगार हो गए हैं। सबसे विडंबनापूर्ण स्थिति यह है कि इन शिक्षकों के समायोजन को लेकर अब तक सरकार या शिक्षा विभाग की ओर से कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई है। स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में कॉलेज प्रबंधनों ने भी इन शिक्षकों से काम लेना बंद कर दिया है, जिससे वे पूरी तरह से हाशिए पर चले गए हैं।
झारखंड के डिग्री कॉलेजों में इंटर की पढ़ाई पर पूर्ण विराम, शिक्षकों के भविष्य पर संकट
इस बीच, झारखंड अंगीभूत महाविद्यालय इंटरमीडिएट शिक्षक संघ ने इन शिक्षकों की बदहाली और असुरक्षित भविष्य पर गहरा रोष जताया है। संघ के प्रदेश महासचिव डॉ. राकेश कुमार पाण्डेय का कहना है कि जो शिक्षक कल तक छात्र-छात्राओं का भविष्य संवार रहे थे, आज वे स्वयं सड़क पर आ गए हैं। नामांकन प्रक्रिया बंद होने और अंतिम बैच के जाने के बाद अब कॉलेजों में इन शिक्षकों की कोई भूमिका नहीं बची है। वहीं दूसरी ओर, इंटरमीडिएट सेक्शन के खातों में जमा करोड़ों रुपये की राशि को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है। डॉ. पाण्डेय ने आशंका जताई है कि यदि सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो आंतरिक स्रोतों से जमा यह बड़ी राशि बैंक खातों में बेकार पड़ी रह जाएगी या इसका दुरुपयोग हो सकता है।
शिक्षकों के बेरोजगार होने के इस मानवीय पहलू को देखते हुए संघ ने पुरजोर मांग की है कि इस संचित धनराशि का उपयोग उन कर्मियों की आर्थिक मदद के लिए किया जाए, जिन्होंने वर्षों तक बेहद अल्प मानदेय पर अपनी सेवाएं दी हैं। शिक्षकों का तर्क है कि चूंकि यह राशि उनके द्वारा किए गए शैक्षणिक कार्यों और छात्रों के शुल्क से ही एकत्रित हुई है, इसलिए इसे ‘सम्मानजनक विदाई राशि’ के रूप में वितरित कर दिया जाना चाहिए। इससे बेरोजगार हुए शिक्षकों को अपना स्वरोजगार शुरू करने या परिवार चलाने के लिए तात्कालिक वित्तीय संबल मिल सकेगा। इस मुद्दे को लेकर शिक्षक संघ जल्द ही सरकार से मुलाकात कर अपनी मांगों को रखने की तैयारी में है, ताकि हजारों परिवारों को भुखमरी की कगार पर जाने से बचाया जा सके।


