उदित वाणी, चांडिल: झारखण्ड की जीवनरेखा माने जाने वाले टाटा–रांची खंड स्थित एनएच-33 पर चिलगु–शहरबेड़ा के बीच निर्माणाधीन पुल की सुस्त रफ्तार अब लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। पिछले वर्ष नवंबर में जर्जर पुराने पुल को तोड़े जाने के बावजूद चार माह बीत जाने के बाद भी निर्माण एजेंसी राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (आरकेएससीपीएल) एक भी पिलर खड़ा नहीं कर सकी है। इससे साफ है कि परियोजना लंबी खिंच सकती है, जबकि यह मार्ग कोलकाता को जमशेदपुर होते हुए रांची से जोड़ने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण आर्थिक कॉरिडोर है।
•सिंगल लेन और डायवर्शन बना दुर्घटना का गढ़, 40 से अधिक मौतें
पुल जर्जर होने के बाद से एनएचआई ने यहां चार लेन सड़क को सिंगल लेन में तब्दील कर दिया है। अव्यवस्थित डायवर्शन, टूटी डिवाइडर और सड़क किनारे जमी धूल-मिट्टी के कारण यहां लगातार हादसे हो रहे हैं। विधायक सविता महतो द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, बीते एक वर्ष में ही 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। स्थानीय लोग बताते हैं कि अब तक सैकड़ों दुर्घटनाएं इस स्थल पर हो चुकी हैं, जिससे यह क्षेत्र ‘ब्लैक स्पॉट’ बन चुका है।
•जनप्रतिनिधियों के वादे हवा-हवाई, प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय लोगों में जनप्रतिनिधियों के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है। पूर्व में सांसद संजय सेठ ने शीघ्र निर्माण का आश्वासन दिया था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। लोगों का कहना है कि अधूरी व्यवस्था और लापरवाही ने हालात बद से बदतर कर दिए हैं। उन्होंने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य में तेजी लाने और वैकल्पिक व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है, ताकि इस जानलेवा स्थिति पर जल्द रोक लग सके।


