
उदित वाणी, जमशेदपुर : शहर समेत देशभर में बैंक कर्मियों ने पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर बुधवार को एकदिवसीय हड़ताल की. इस हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक और ग्रामीण बैंक पूरी तरह बंद रहे. बैंक कर्मियों ने कामकाज से खुद को अलग रखते हुए अपने-अपने बैंकों के सामने धरना-प्रदर्शन किया. इसके कारण चेक क्लीयरेंस, नकद निकासी, जमा, ड्राफ्ट और अन्य जरूरी बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं, जिससे आम ग्राहकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी.
हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) के आह्वान पर की गई. बैंक कर्मियों का कहना है कि वे वर्ष 2015 से लगातार पांच दिनों की ड्यूटी लागू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है. कर्मियों के अनुसार, देश के कई सरकारी विभागों और संस्थानों में पहले ही पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है, ऐसे में बैंक कर्मियों को इससे वंचित रखना उचित नहीं है.
धरना दे रहे कर्मचारियों ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर में काम का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. स्टाफ की कमी, बढ़ते लक्ष्य, डिजिटल लेनदेन का अतिरिक्त भार और लंबा कार्य समय कर्मचारियों के स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर नकारात्मक असर डाल रहा है. पांच दिवसीय कार्य सप्ताह से न केवल कर्मचारियों को राहत मिलेगी, बल्कि बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता और कार्यकुशलता भी बेहतर होगी.
जमशेदपुर में विभिन्न बैंकों के कर्मी हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए. उन्होंने सरकार से मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की. बैंक कर्मियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में और उग्र आंदोलन किया जाएगा.
