
उदित वाणी, जमशेदपुर: कोल्हान क्षेत्र के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थान एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल, डिमना की व्यवस्था लंबे समय से अव्यवस्था और लापरवाही की मार झेल रही है। अस्पताल में मरीजों को अक्सर दवाओं की कमी, जांच सुविधाओं के बाधित रहने और प्रशासनिक सुस्ती जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता रहा है।
कभी दवाओं का स्टॉक खत्म हो जाता है तो कभी करोड़ों रुपये की अत्याधुनिक मशीनें मौजूद होने के बावजूद खून जांच सहित अन्य महत्वपूर्ण पैथोलॉजिकल जांच सेवाएं बंद रहने से मरीजों को भारी परेशानियों से गुजरना पड़ता है।इसके अलावा जन्म-मृत्यु निबंधन और प्रमाण पत्र जारी करने में भी लापरवाही के कारण हजारों मामलों का बैकलॉग बन चुका है, जिससे लोगों को अनावश्यक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। अस्पताल की इन समस्याओं की मुख्य वजह व्यवस्था में मॉनिटरिंग की कमी और कुछ कर्मचारियों में कर्तव्यनिष्ठा व जवाबदेही का अभाव माना जा रहा है। इसी स्थिति को सुधारने के उद्देश्य से अस्पताल के उपाधीक्षक और नोडल अधिकारी बनाए गए डॉ. जुझार माझी ने अब व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की दिशा में पहल तेज कर दी है।
वे अस्पताल की पुरानी फाइलों को खंगाल रहे हैं और हर विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में वे अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम झा के साथ समन्वय स्थापित कर विभागवार मॉनिटरिंग भी कर रहे हैं, ताकि समस्याओं की जड़ तक पहुंचकर उनका समाधान किया जा सके। सूत्रों के अनुसार अस्पताल में दवा आपूर्ति व्यवस्था, खून की उपलब्धता, पैथोलॉजिकल जांच और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय होने से आने वाले दिनों में अस्पताल की व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।
यदि यह पहल सफल रही तो लंबे समय से अव्यवस्था की मार झेल रहे एमजीएम अस्पताल में मरीजों को दवाओं की उपलब्धता, जांच सुविधाओं और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे अस्पताल में एक बेहतर और भरोसेमंद स्वास्थ्य वातावरण तैयार हो सकेगा। गौरतलब हो कि अस्पताल की व्यवस्था को दुरुस्त करने को लेकर पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी लगातार समीक्षा करते हैं और वे अक्सर अस्पताल का औचक निरीक्षण करते हुए व्यवस्था को सुधारने हेतु को निर्देशित करते हैं।
अधीक्षक डॉ. बलराम झा एवं कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार भी लगातार निरीक्षण करते हुए व्यवस्था को सुधारने में जुटे हैं। यही वजह है कि आगामी एक अप्रैल से अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए ड्रेस कोड लागू होने जा रहा है।

