
उदित वाणी, जमशेदपुर: जुगसलाई के नया बाजार में आज दिनांक 2 मार्च को मारवाड़ी समाज की महिलाओं द्वारा होलिका दहन से पूर्व पारंपरिक पूजा-अर्चना की गई। सुबह के समय नई दुल्हनों सहित समाज की महिलाओं ने विधि-विधान से पूजन किया।
पूजन की पारंपरिक विधि
मारवाड़ी समाज की परंपरा के अनुसार गोबर से बने बड़कुला का निर्माण कर होलिका की पूजा की जाती है। इस अवसर पर जमशेदपुर की प्रसिद्ध मंगल पाठ वाचक एवं भजन गायिका सुनीता भारद्वाज ने बताया कि होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
पहली होली का विशेष महत्व
शादी के बाद पहली होली को मारवाड़ी समाज में विशेष महत्व दिया जाता है। परंपरा के अनुसार नवविवाहिता अपनी पहली होली मायके में मनाती है और गणगौर की पूजा के बाद ससुराल लौटती है। इस अवसर पर मूंगदाल का हलवा विशेष रूप से बनाया जाता है, साथ ही काठी दाल और चावल का भी प्रसाद होता है। नवविवाहिता ठंडी अग्नि की पूजा करती है, चार फेरे लेती है और अपने व परिवार के सुखमय जीवन की कामना करती है।
राजस्थानी परिधान और वैदिक मंत्रोच्चार
कई नियमों और विधानों के साथ संपन्न होने वाली इस पूजा में मारवाड़ी समाज के दंपती राजस्थानी परिधान में होलिका दहन स्थल पर पहुंचते हैं। सभी के हाथों में पूजा की थाली, बड़कुला की माला, गोबर से बना ढाल और डंडे में बंधी गेहूं की बाली होती है। जैसे ही आचार्य वैदिक मंत्रोच्चार के साथ होलिका में अग्नि प्रज्वलित करते हैं, श्रद्धालु भक्त प्रह्लाद की जय और बुराई पर अच्छाई की जय के जयकारे लगाते हैं। इसके बाद दंपती होलिका को गोबर से बनी बड़कुला की माला अर्पित करते हैं।
सुख-समृद्धि की कामना
मान्यता है कि इस पूजा के माध्यम से महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, पुत्र की कामना और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करती हैं।
4 मार्च को खेली जाएगी होली
इस वर्ष ग्रहण के कारण होली का पर्व 4 मार्च को खेला जाएगा।

