100 रूप्ये से उपर के सभी नोटों को बंद करने समेत कई प्रस्ताव किये गये पारित
उदित वाणी, रांची: लोकनायक जय प्रकाश नारायण जयंती के अवसर पर जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने भ्रष्टाचार विरोधी प्रतिनिधि सम्मेलन आयोजित किया.
सम्मेलन में झारखंड पीपुल अगेंस्ट क्रप्शन [जेपीएसी] का गठन किया गया तथा इस प्लेटफार्म से जुड़कर सप्ताह में एक दिन या एक घंटा भी समय निकालकर जागरूकता अभियान चलाकर भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया गया तथा जल्द ही संगठन को विस्तार देते हुए प्रमंडलीय व जिला स्तर पर भ्रष्टाचार विरोधी प्रतिनिधि सम्मेलन आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया.
इसके साथ ही प्रतिनिधि सम्मेलन में कई प्रस्ताव भी पारित किये गये. जिसके तहत 100 रूपये से बड़े सभी नोटों को बंद करने, संपत्ति को आधार से लिंक करने, बेनामी संपत्ति को शत प्रतिशत जब्त करने, 5000 से अधिक कैश में लेनदेन बंद करने तथा 50 हजार रूपये से अधिक की लेन देन एवं बैंक निकासी में पैन कार्ड अनिवार्य करने की मांग की गई है.
इसके साथ ही नार्को पॉलीग्राफ ब्रेनमैपिंग कानून बनाने, दोष सिद्ध भ्रष्टाचारियों को आजीवन कारावास तक की सजा के लिए कानून बनाने तथा भ्रष्टाचार संबंधी मुकदमों के त्वरित निष्पादन के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की भी मांग की गई.
ताकि भ्रष्टाचार के मुकदमों में न्यायालय एक समय सीमा के भीतर फैसला दे सके। इसके अलावा प्रस्ताव में कहा गया कि सभी सरकारी कार्यालयों के सामने सिटीजन चार्टर लगाया जाय.
सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन स्थल पर प्राक्कलित राशि, संवेदक का नाम व कार्य पूरा होने की अवधि का उल्लेख किया जाय. लोक निर्माण कार्य विभागों में शत प्रतिशत इ-टेंडरिंग व्यवस्था लागू की जाय. भूमि रिकार्ड को पूर्णतः डिजिटाइज किया जाय और इ-रजिस्ट्री व इ-म्युटेशन व्यवस्था भी लागू किया जाय. यदि भू-रिकार्ड का विवाद है तो इसका भी उल्लेख किया जाय.
झारखंड में व्यवस्था परिवर्तन के लिए संगठित प्रयास समय की मांग-सरयू राय
सम्मेलन को संबोधित करते हुए विधायक सरयू राय ने कहा कि झारखंड में व्यवस्था परिवर्तन के लिए संगठित प्रयास समय की मांग है. व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार का उन्मूलन राज्य के त्वरित विकास के लिए निहायत जरूरी है. भ्रष्टाचार उन्मूलन जन दबाव, जन शिक्षण और जनान्दोलन के बिना संभव नहीं है.
व्यवस्था की कमियों को उजागर करना और इसके खिलाफ आवाज बुलंद करना व्यवस्था में परिवर्तन की पहली शर्त है. व्यवस्था में परिवर्तन निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जिसे जेपी ने सतत क्रांति-संपूर्ण क्रांति कहा है.
उन्होंने कहा कि जिनके ऊपर हम भरोसा करते हैं जिनके ऊपर व्यवस्था बनाने और लागू करने की जिम्मेदारी होती है. वही लोग अपने स्वार्थ के लिए भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाते हैं और इसका प्रभाव सिस्टम के अंतिम छोर के अधिकारी व कर्मचारियों पर भी पड़ता है.


