
उदित वाणी जमशेदपुर: शहर की व्यापारिक पहचान माने जाने वाले सैरात बाजार एक बार फिर चर्चा में हैं. 52.73 एकड़ में फैले लगभग 110 से 115 साल पुराने इन बाजारों में किराया वृद्धि को लेकर पिछले कुछ वर्षों से विवाद जारी है.
टाटा स्टील से प्रबंधन मिलने के बाद जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) ने किराये का नया ढांचा प्रस्तावित किया, जिससे हजारों दुकानदार प्रभावित हुए. फिलहाल इस मामले में सरकार और प्रशासन संतुलित समाधान तलाशने में जुटे हैं.
क्या हैं सैरात बाजार
जमशेदपुर में उन बाजारों या दुकानों को सैरात बाजार कहा जाता है जो सरकारी जमीन पर बने हैं और जिनका स्वामित्व नगर निकाय के पास होता है. इन दुकानों को व्यापारियों को किराये या लाइसेंस प्रणाली के तहत दिया जाता है. दुकानदार यहां व्यापार करते हैं, लेकिन दुकान के मालिक नहीं होते. शहर में कुल 10 प्रमुख सैरात बाजार हैं, जिनमें लगभग 7,700 से अधिक दुकानें संचालित होती हैं. इनमें साकची और बिष्टुपुर सबसे बड़े और पुराने बाजार माने जाते हैं. इन सभी बाजारों का विस्तार करीब 57 एकड़ सरकारी जमीन पर फैला हुआ है साकची बाजार अकेले ही लगभग 47 प्रतिशत सैरात दुकानों का केंद्र है.
शहर के प्रमुख सैरात बाजार
साकची बाजार: लगभग 3,644 दुकानें
बिष्टुपुर बाजार: लगभग 1,640 दुकानें
बारीडीह: 606 दुकानें
कदमा: 567 दुकानें
गोलमुरी: 347 दुकानें
बर्मामाइंस: 306 दुकानें
सिदगोड़ा: 280 दुकानें
सोनारी: 233 दुकानें
मनीफीट / कालीमाटी: 52 दुकानें
धतकीडीह: 43 दुकानें

2022 में टाटा स्टील से जेएनएसी को मिला प्रबंधन
इन बाजारों का प्रबंधन लंबे समय तक टाटा स्टील के लैंड डिपार्टमेंट के पास था. अप्रैल 2022 में कंपनी द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र (एन ओ सी ) जारी किए जाने के बाद इन सभी बाजारों का संचालन और किराया वसूली की जिम्मेदारी पूरी तरह जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) के पास आ गई. सरकार का मानना था कि इन व्यावसायिक संपत्तियों से मिलने वाला राजस्व नगर निकाय को मिले ताकि शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं पर खर्च किया जा सके.
किराये में भारी बढ़ोतरी से शुरू हुआ विवाद
शहर के 10 सैरात बाजारों में संचालित दुकानों का मासिक किराया बिना किसी पूर्व सूचना के कई गुना बढ़ा दिया गया है. टाटा स्टील के समय इन दुकानों का किराया दशकों पुराने नियमों के आधार पर लिया जाता था. अधिकतर दुकानों का मासिक किराया 30 रुपये से 300 रुपये के बीच था.
जेएनएसी ने जब नया प्रस्ताव जारी किया तो किराया वर्ग फुट और बाजार मूल्य के आधार पर तय किया गया. इसके बाद कई दुकानों का किराया बढक़र 3 हजार से 15 हजार रुपये प्रति माह तक पहुंच गया.
इस भारी वृद्धि के खिलाफ व्यापारियों ने जोरदार विरोध किया. नया किराया 1 फरवरी 2026 से प्रभावी माना गया है. जिसकी वसूली 6 मार्च से शुरू हो चुकी है.
तीन श्रेणियों में बांटी जाएंगी दुकानें
कैटेगरी ए: मुख्य सडक़ पर स्थित दुकानें (किराए में 7 रुपए रुपए प्रति स्क्वायर फीट की बढ़ोतरी)
कैटेगरी बी: मुख्य सडक़ से जुड़ी अंदरूनी सडक़ें ( ₹6 प्रति स्क्वायर फीट की बढ़ोतरी)
कैटेगरी सी: बाजार के कम व्यस्त या दूर के इलाके (₹5 प्रति स्क्वायर फीट की बढ़ोतरी )
व्यापारियों का तर्क है कि यह वृद्धि तार्किक नहीं है और इससे छोटे दुकानदारों का रोजगार बुरी तरह प्रभावित होगा. दुकानदारों का कहना है कि प्रशासन को कोई भी फैसला लेने से पहले उनके संगठन के साथ विचार-विमर्श करना चाहिए था. उन्होंने मांग की है कि यदि किराया बढ़ाना ही है, तो उसे तार्किक आधार पर तय किया जाए.
‘बिना किसी पूर्व सूचना या पारदर्शी नियम के सैरात दुकानों के किराए में बेतहाशा वृद्धि करना व्यापारियों के साथ अन्याय है। हम इस मनमाने आर्थिक बोझ का कड़ा विरोध करते हैं और मांग करते हैं कि इसे तत्काल वापस लिया जाए, अन्यथा व्यापारी आंदोलन को मजबूर होंगे।‘ – हरविंदर सिंह मंटू, अध्यक्ष, जमशेदपुर ऑल मार्केट एसोसिएशन
विरोध के बाद फिलहाल बढ़ोतरी पर रोक
उपायुक्त के निर्देश पर एक कमेटी गठित की गई है, जो किराया निर्धारण की नई नीति तैयार कर रही है. इसके साथ ही जेएनएसी दुकानों का डिजिटल सर्वे कर रहा है और प्रत्येक दुकान को 6 अंकों का यूनिक शॉप आईडी दिया जा रहा है, जिसे दुकान के सामने लिखना अनिवार्य किया गया है.

