
उदित वाणी, जमशेदपुर: चांडिल के नारायण प्राइवेट आईटीआई लुपुंगडीह में महर्षि वाल्मीकि जयंती बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों ने महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन दर्शन, उनके आदर्शों और समाज में उनके योगदान पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और महर्षि वाल्मीकि जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर किया गया। उपस्थित अतिथियों ने उनके जीवन से जुड़ी प्रेरणादायक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी ने अपने ज्ञान और तपस्या से समाज को ‘रामायण’ जैसा अमूल्य ग्रंथ दिया, जो आज भी मानवता के लिए मार्गदर्शक है।
संस्थान के संस्थापक डॉ. जटाशंकर पांडे ने अपने संबोधन में कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी भारतीय संस्कृति के प्रथम कवि और आदर्श ऋषि थे। उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि सच्ची निष्ठा और परिश्रम से मनुष्य अपना जीवन बदल सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में प्रकाश महतो, जयदीप पांडे, शांति राम महतो, शुभम साहू, देवाशीष मंडल, पवन कुमार महतो, अजय मंडल और गौरव महतो सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। सभी ने मिलकर महर्षि वाल्मीकि जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। कार्यक्रम का संचालन संस्थान के प्रशिक्षकों द्वारा किया गया और अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और राष्ट्रभावना की गूंज व्याप्त रही।

