
उदित वाणी जमशेदपुर : पारडीह क्षेत्र की एक जमीन के लगान निर्धारण के बदले 20 लाख रुपये रिश्वत मांगने के आरोप में धालभूम भूमि सुधार उपसमाहर्ता (एलआरडीसी) कार्यालय के बड़ा बाबू भीम सोरेन के खिलाफ अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकी है। एलआरडीसी सच्चिदानंद महतो द्वारा की गई लिखित शिकायत के बावजूद बिष्टूपुर थाना ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया है।
थाना प्रभारी का कहना है कि यह मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा है, इसलिए इसकी जांच और कार्रवाई का अधिकार एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के पास है। ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता को सीधे एसीबी में जाकर मामला दर्ज कराना चाहिए।
दूसरी ओर एसीबी के अधिकारियों का कहना है कि उनकी टीम आमतौर पर अग्रिम सूचना के आधार पर ट्रैप कर घूस लेते हुए आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ती है। उनके अनुसार, इस तरह की लिखित शिकायतें सामान्यत: उनके पास दर्ज नहीं होतीं।
नतीजतन, रिश्वतखोरी का गंभीर आरोप फिलहाल थाना और एसीबी के बीच उलझकर रह गया है। दिलचस्प बात यह है कि जिले के उपायुक्त ने स्वयं एलआरडीसी को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद अब तक मामला दर्ज न होना प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है।
इस घटनाक्रम के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर भ्रष्टाचार के इतने गंभीर आरोप के बावजूद कार्रवाई की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हो पा रही है और शिकायतकर्ता को न्याय दिलाने की प्रक्रिया किस स्तर पर अटक गई है।

