
उदित वाणी जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में उलगुलान के महानायक और धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा का शहादत दिवस (पुण्यतिथि) श्रद्धापूर्वक मनाया गया। साकची स्थित भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थल पर आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह ने की। इस अवसर पर भारी संख्या में जुटे कांग्रेसजनों ने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके ऐतिहासिक संघर्षों को याद किया।
जल, जंगल और जमीन की रक्षा के नायक थे भगवान बिरसा मुंडा: परविंदर सिंह
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का संघर्ष, त्याग और बलिदान सदैव देशवासियों को अन्याय के विरुद्ध लड़ने तथा सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए प्रेरित करता रहेगा।
उन्होंने आगे कहा, “भगवान बिरसा मुंडा केवल आदिवासी समाज के ही नायक नहीं थे, बल्कि वे देश के महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक एवं जन-जागरण के अग्रदूत थे। उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत, शोषण और अन्याय के विरुद्ध संगठित संघर्ष का बिगुल फूंका तथा जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए ऐतिहासिक आंदोलन का नेतृत्व किया।” परविंदर सिंह ने बताया कि बिरसा मुंडा ने समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ अभियान चलाकर लोगों को आत्मसम्मान, शिक्षा और संगठन की राह दिखाई थी।
उलगुलान आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का स्वर्णिम अध्याय
श्रद्धांजलि सभा के दौरान वक्ताओं ने उनके ऐतिहासिक आंदोलन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अल्पायु में ही भगवान बिरसा मुंडा ने जिस अदम्य साहस, त्याग और संघर्ष का परिचय दिया, वह आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का अटूट स्रोत है। अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला देने वाला उनके नेतृत्व में चला “उलगुलान” आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है।
9 जून 1900 को रांची कारागार (जელ) में उनका निधन हुआ था, किंतु उनके विचार, संघर्ष और सर्वोच्च बलिदान आज भी हर भारतीय के जनमानस में जीवित हैं। देश और समाज के प्रति उनके इस अप्रतिम योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
समतामूलक समाज के निर्माण का संकल्प
समारोह में उपस्थित कांग्रेसी नेताओं और वक्ताओं ने सर्वसम्मति से कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन सामाजिक न्याय, समानता, स्वाभिमान और जनकल्याण के मूल्यों का जीवंत प्रतीक है। आज के समय में उनके बताए मार्ग और सिद्धांतों पर चलकर ही एक समतामूलक एवं न्यायपूर्ण समाज का निर्माण किया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में सभी ने उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

