
उदित वाणी गुरुग्राम / जमशेदपुर : हरियाणा के गुरुग्राम जिले के बिलासपुर क्षेत्र में सोमवार शाम हुए दर्दनाक हादसे ने झारखंड के कोल्हान के 6 मजदूरों की हुई मौत उनके परिवारों की खुशियां छीन लीं. सिधरावली स्थित निर्माणाधीन परियोजना में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के लिए खोदे गए करीब 50 फीट गहरे गड्ढे की मिट्टी अचानक धंस जाने से सात मजदूरों की मौत हो गई. मृतकों में झारखंड के छह मजदूर
धनंजय महतो – बनगोड़ा गांव, जादूगोड़ा (पूर्वी सिंहभूम),
भागीरथ गोप – बनगोड़ा गांव, जादूगोड़ा (पूर्वी सिंहभूम),
संजीत गोप उर्फ दुलाल – बनगोड़ा गांव, जादूगोड़ा,
मंगल महतो – बनगोड़ा गांव, जादूगोड़ा,
शिव शंकर सिंह मुंडा – बुरुहातू गांव, ईचागढ़ (सरायकेला-खरसावां)
परमेश्वर महतो – हुड़ी गांव, ईचागढ़ (सरायकेला-खरसावां) शामिल थे.
इसके अलावा राजस्थान के भरतपुर निवासी सुपरवाइजर सतीश की भी मौत हो गई.
यह हादसा दिल्ली–जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित रियल एस्टेट कंपनी , सिगनेचर ग्लोबल के बहुचर्चित प्रोजेक्ट “सिटी ऑफ कलर्स” की साइट पर हुआ, जहां प्लॉटिंग और एसटीपी निर्माण का कार्य चल रहा था.
रोड रोलर की कंपन से गिरी मिट्टी की दीवार:
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एसटीपी प्लांट के लिए लगभग 50 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था. उसी गड्ढे में 11 मजदूर बेसमेंट का काम कर रहे थे.
बताया जाता है कि गड्ढे के ठीक ऊपर भारी रोड रोलर चलाया जा रहा था. रोलर के दबाव और कंपन से कच्ची मिट्टी की विशाल परत अचानक भरभरा कर नीचे गिर गई.
देखते ही देखते गड्ढे में काम कर रहे मजदूर मिट्टी में दब गए. मौके पर चीख-पुकार मच गई और मजदूरों को निकालने के प्रयास शुरू हुए, लेकिन मिट्टी का दबाव इतना अधिक था कि उन्हें बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो गया.
दो घंटे बाद शुरू हुआ राहत एवं बचाव कार्य:
स्थानीय लोगों के अनुसार हादसा शाम करीब सात बजे हुआ, लेकिन पुलिस को इसकी जानकारी काफी देर बाद दी गई.
करीब दो घंटे बाद पुलिस और राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचे और मिट्टी में दबे मजदूरों को बाहर निकाला. सभी घायलों को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने सात मजदूरों को मृत घोषित कर दिया.
अस्पताल के बजाय बॉर्डर पार भेजे गए घायल:
हादसे के बाद कंपनी प्रबंधन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है.
बताया जा रहा है कि घटना के बाद घायलों को पास के अस्पतालों में ले जाने के बजाय राजस्थान के भिवाड़ी स्थित गीतांजलि अस्पताल भेज दिया गया. इस दौरान करीब ढाई घंटे तक गुरुग्राम पुलिस को घटना की जानकारी नहीं दी गई.
मामले का खुलासा तब हुआ जब भिवाड़ी पुलिस ने गुरुग्राम पुलिस को अस्पताल में आए शवों की सूचना दी.
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, सभी मजदूर मिट्टी में दबे हुए हालत में लाए गए थे और उनकी स्थिति बेहद गंभीर थी.
घटनास्थल पर बाउंसरों का पहरा, मीडिया को रोका:
हादसे के बाद जब स्थानीय लोग और मीडियाकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया.
कंपनी की ओर से मुख्य गेट पर 50 से अधिक बाउंसर तैनात कर दिए गए थे. आरोप है कि किसी को भी साइट के अंदर नहीं जाने दिया गया, जिससे सुरक्षा चूकों के सबूत सामने न आ सकें.
सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी का आरोप
मृतक सुपरवाइजर सतीश के भाई विष्णु यादव की शिकायत पर बिलासपुर थाने में कंपनी प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है.
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निर्माण स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे.
50 फीट गहरे गड्ढे में सुरक्षा जाल नहीं लगाया गया था:
मिट्टी को रोकने के लिए कोई मजबूत दीवार नहीं बनाई गई थी
मजदूरों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध नहीं कराए गए थे
पुलिस ने इस मामले में प्रोजेक्ट मैनेजर दिनेशवीर और स्ट्रक्चर इंजीनियर विकास पांडे को गिरफ्तार कर लिया है.
वहीं कंपनी ने बयान जारी कर हादसे की जिम्मेदारी ठेकेदार पर डालते हुए अपने तीन कर्मचारियों को निलंबित करने की बात कही है.
एसडीएम की अध्यक्षता में बनी जांच समिति:
हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं.
मानेसर के एसडीएम दर्शन यादव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है. समिति में सहायक पुलिस आयुक्त पटौदी, जिला नगर योजनाकार (प्रवर्तन) गुरुग्राम तथा लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता को सदस्य बनाया गया है.
समिति को निर्देश दिया गया है कि वह घटना के सभी पहलुओं की जांच कर निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट उपायुक्त कार्यालय को सौंपे.
129 एकड़ में बन रही ‘सिटी ऑफ कलर्स’ टाउनशिप:
दिल्ली–जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे सिधरावली में विकसित की जा रही “सिटी ऑफ कलर्स” परियोजना लगभग 129 एकड़ क्षेत्र में फैली एक मिक्स-यूज इंटीग्रेटेड टाउनशिप है.
इस परियोजना में आवासीय, औद्योगिक और व्यावसायिक प्लॉट विकसित किए जा रहे हैं. यहां प्लॉट का आकार 866 से 1615 वर्ग फुट के बीच रखा गया है और कीमत लगभग 1.09 करोड़ से 2.03 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है.
कंपनी के अनुसार इस परियोजना में 20 से अधिक प्रीमियम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और इसका कब्जा दिसंबर 2028 तक देने का लक्ष्य रखा गया है.
सुरक्षा चूक कैसे बनी मौत की वजह
गुरुग्राम के बिलासपुर में निर्माणाधीन साइट पर हुआ यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी का परिणाम माना जा रहा है. प्राथमिक जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई स्तरों पर लापरवाही सामने आई है, जिसने इस त्रासदी को जन्म दिया.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्माण स्थल पर बुनियादी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था. यह घटना निर्माण परियोजनाओं में सुरक्षा नियमों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करती है. , हादसे के कई कारण बताए जा रहे हैं जिनमें ये प्रमुख हैं.
- 50 फीट गहरे गड्ढे में नहीं थी रिटेनिंग वॉल
निर्माण कार्य के लिए लगभग 50 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था, लेकिन मिट्टी को रोकने के लिए कोई मजबूत रिटेनिंग वॉल या शटरिंग नहीं लगाई गई थी. इतनी गहराई पर कच्ची मिट्टी का सहारा केवल प्राकृतिक ढलान पर था, जिससे धंसने का खतरा लगातार बना हुआ था.
- सुरक्षा जाल और बैरिकेडिंग का अभाव
मजदूरों के काम करने वाले क्षेत्र में सुरक्षा जाल (सेफ्टी नेट) और मजबूत बैरिकेडिंग नहीं लगाई गई थी. ऐसी स्थिति में मिट्टी खिसकने पर मजदूरों के बचने की संभावना लगभग खत्म हो गई.
- भारी मशीन का गड्ढे के ऊपर संचालन
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गड्ढे के ठीक ऊपर भारी रोड रोलर चलाया जा रहा था. विशेषज्ञों के अनुसार इतनी गहराई के गड्ढे के किनारे भारी मशीनों के संचालन से कंपन पैदा होती है, जिससे मिट्टी कमजोर होकर अचानक धंस सकती है.
- भू-तकनीकी सुरक्षा मानकों की अनदेखी
निर्माण कार्य में गहरी खुदाई के दौरान मिट्टी की गुणवत्ता और दबाव का परीक्षण जरूरी होता है. इसके लिए विशेष भू-तकनीकी उपाय किए जाते हैं, लेकिन मौके पर ऐसे किसी वैज्ञानिक उपाय के पर्याप्त संकेत नहीं मिले.
- मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि मजदूरों को हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराए गए थे.
- हादसे के बाद भी राहत में देरी
हादसे के तुरंत बाद पुलिस और प्रशासन को सूचना देने के बजाय घायलों को दूसरे राज्य के अस्पताल भेजा गया. इससे राहत और बचाव कार्य शुरू होने में भी देरी हुई.

