
उदित वाणी, जमशेदपुर: साल का पहला चंद्र ग्रहण आज (3 मार्च) को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. यह ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य किया गया है.
3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से सूतक काल:
ग्रहण का सूतक काल लगभग 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है. 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर सूतक काल प्रारंभ हो चूका है. जिसके चलते जमशेदपुर के कई मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए हैं. सूतक काल के दौरान सभी मंगलकारी कार्य वर्जित हो जाते हैं.
सूतक काल में भोजन बनाना, खाना, पूजा-पाठ, हवन, यज्ञ, नए कार्य की शुरुआत या बड़े निवेश आदि करने से बचना चाहिए. इस समय नुकीली वस्तुओं जैसे चांकू, कैंची, आदि का भी उपयोग नहीं करना चाहिए. ग्रहण के दौरान तेल नहीं लगाना चाहिए. बाल और नाखून काटने से भी बचना चाहिए.
मान्यता है कि चंद्र या सूर्य ग्रहण के दौरान आसमान की ओर देखने से बचना चाहिए, खासकर गर्भवती महिलाओं को, क्योंकि इस समय नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होती है और सीधे आसमान की ओर देखने से गर्भवती महिलाओं और उनके गर्भस्थ शिशु पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.
ग्रहण वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर पूजा करें. इस दिन भगवान शिव और सूर्यदेव को जल चढ़ाना शुभ माना जाता है. वहीं, लोगों को सूतक काल शुरू होने से पहले ही भोजन कर लेना चाहिए. ग्रहण के समय मंत्रों का जाप अत्यंत लाभकारी माना जाता है. सबसे शुभ मंत्रों में ओम नमः शिवाय, महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र और सूर्य मंत्र आदि शामिल हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं.
वहीं, ग्रहण समाप्त होने के बाद घर को गंगाजल से शुद्धि कर खुद भी स्नान करना चाहिए. इसके बाद दान करें. माना जाता है चंद्र ग्रहण के बाद दूध, चावल, चीनी, सफेद वस्त्र ,आदि चीजों के दान से विशेष लाभ प्राप्त होते हैं.
चंद्रमा उदय के समय ही ग्रहण में:
साल का पहला चंद्रग्रहण ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण होगा.
इस ग्रहण का नाम “ग्रस्तोदित चंद्रगहण” इसलिए पड़ा, क्योंकि जब चंद्रमा उदय होगा, तब वह पहले से ही ग्रहण की स्थिति में होगा. यानी चांद निकलते ही ग्रहण लगा दिखेगा.
चंद्र ग्रहण दोपहर 3.20 बजे शुरू होगा, लेकिन उस दौरान चांद आसमान में नहीं होगा. भारत में चंद्रमा शाम करीब 6:26-6:32 बजे उदय होगा
इसे चूड़ामणि योग भी कहा जाता है. मान्यता है कि चूड़ामणि योग में दान-पुण्य करने से बहुत अधिक पुण्य मिलता है और आध्यात्मिक लाभ होता है.
राशियों पर भी प्रभाव :
अगर चंद्र ग्रहण की बात करें तो फाल्गुन महीने (2 फरवरी से 3 मार्च) में 5 मंगलवार हैं. चंद्र ग्रहण के असर से लोग नाखुश दिख सकते हैं. यह राजनीतिक उथल-पुथल, लड़ाई-झगड़े, सड़क दुर्घटनाएं या समुद्री तूफान जैसी घटनाओं का संकेत दे सकता है.
चंद्रग्रहण का राशियों पर भी प्रभाव पड़ सकता है. उन्होंने कहा, सबसे ज्यादा असर सिंह राशि पर होगा, क्योंकि ग्रहण सिंह राशि में शुरू होगा. कन्या और मकर राशि वाले भी सतर्क रहें. सिंह राशि वालों को विशेष पूजा-पाठ करना चाहिए. सिंह और मकर राशि वालों के लिए उपाय यह है कि ग्रहण के बाद स्नान करें. तांबे के कटोरे में घी भरें, उस पर चांदी का चंद्रमा, सोने का सूरज और नाग रखें. फिर घाट पर जाकर ब्राह्मणों को दान देने का संकल्प लें. इससे दुर्भाग्य से मुक्ति मिल सकती है.”

