
उदित वाणी जमशेदपुर : शहर के सोनारी थाना क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से एक नाम लगातार चर्चा में रहा है—प्रिया सिंह (35) जिसे इलाके में लोग ‘चटनी डॉन’ के नाम से जानते हैं। हैरानी की बात यह है कि यह नाम किसी पुरुष अपराधी का नहीं, बल्कि एक युवती का है। विवादों, आपराधिक मामलों और सोशल मीडिया पर चर्चाओं के कारण यह नाम पूरे इलाके में पहचान बन चुका है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रिया सिंह की शुरुआत सामान्य युवती की तरह हुई थी। वह दोस्तों के साथ घूमना-फिरना और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना पसंद करती थी। धीरे-धीरे उसकी संगत बदलती गई और उसका नाम मादक पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़ने लगा। बताया जाता है कि वह ब्राउन शुगर और गांजा जैसे नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल होने के आरोपों के कारण चर्चा में आई।
कई आपराधिक मामलों में दर्ज है नाम
पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रिया सिंह के खिलाफ सोनारी थाना समेत शहर के विभिन्न थानों में रंगदारी, मारपीट, लूट और अन्य गंभीर धाराओं में कई प्राथमिकी दर्ज हैं। वह कई बार जेल भी जा चुकी है। हाल के दिनों में पुलिस ने उसके खिलाफ झारखंड अपराध नियंत्रण अधिनियम (सीसीए) 2002 के तहत कार्रवाई करते हुए जिला निष्कासन (तड़ीपार) का आदेश जारी किया था।
इसके बावजूद जब पुलिस ने उसे सोनारी क्षेत्र में पाया तो उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान वह जिला निष्कासन के बावजूद अपने घर में रहने की बात स्वीकार करती बताई गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिला निष्कासन आदेश का उल्लंघन करना कानून के तहत दंडनीय अपराध है।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस हिरासत में उसने हंगामा भी किया और पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार करने लगी, जिसके बाद उसे काबू में किया गया।
कैसे पड़ा ‘चटनी डॉन’ नाम
मोहल्ले के लोगों के अनुसार इस अनोखे उपनाम के पीछे भी एक दिलचस्प किस्सा है। बताया जाता है कि प्रिया सिंह को चाट-पकौड़ी और खासकर चटनी खाने का काफी शौक था। दोस्तों के बीच मजाक में उसे ‘चटनी’ कहकर पुकारा जाने लगा।
समय के साथ जब उसके व्यवहार और दबंग छवि की चर्चा फैलने लगी तो यही नाम बदलकर ‘चटनी डॉन’ हो गया और धीरे-धीरे पूरे इलाके में प्रचलित हो गया।
निजी जीवन भी रहा विवादों में
प्रिया सिंह की शादी पवन यादव नामक युवक से हुई थी। स्थानीय सूत्रों के अनुसार शादी के बाद दोनों पर सोनारी और आसपास के क्षेत्रों में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में शामिल होने के आरोप लगे। कुछ मामलों में पड़ोसियों से रंगदारी मांगने की शिकायतें भी सामने आईं।
कहा जाता है कि इस दौरान दोनों पर जानलेवा हमले की घटनाएं भी हुईं, जिससे मामला और चर्चित हो गया।
आत्महत्या के प्रयास से भी सुर्खियों में
करीब पांच वर्ष पहले प्रिया सिंह ने सोनारी थाने में आत्महत्या का प्रयास किया था। नशे की हालत में उसने ब्लेड से अपना गला और हाथ की नस काट ली थी। उस समय थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे तत्काल एमजीएम अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के बाद उसकी जान बच गई। इस घटना की भी शहर में काफी चर्चा हुई थी।
चर्चाओं व वास्तविकता के बीच बनी छवि
सोनारी और आसपास के इलाकों में ‘चटनी डॉन’ का नाम आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहता है। चाय दुकानों से लेकर सोशल मीडिया तक इस नाम से जुड़े कई किस्से सुनने को मिलते हैं।
हालांकि स्थानीय लोगों का एक वर्ग यह भी मानता है कि कई बार किसी व्यक्ति की छवि वास्तविक घटनाओं से अधिक बढ़ा-चढ़ाकर भी प्रस्तुत कर दी जाती है। पुलिस का भी कहना है कि किसी भी मामले में तथ्य और साक्ष्यों के आधार पर ही कार्रवाई की जाती है।
कुल मिलाकर, सोनारी की ‘चटनी डॉन’ की कहानी यह दिखाती है कि कैसे किसी व्यक्ति का एक उपनाम धीरे-धीरे पूरे इलाके में पहचान बन जाता है और फिर वह चर्चा और विवाद—दोनों का हिस्सा बन जाता है।

