
उदित वाणी जमशेदपुर : दक्षिण-पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल के लिए शनिवार का दिन उपलब्धियों भरा रहा। मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) तरुण हुरिया ने बोंडामुंडा स्थित इलेक्ट्रिक लोको शेड से 295वें इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर अधिकारियों और कर्मचारियों में उत्साह का माहौल देखा गया।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह आधुनिक लोकोमोटिव अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। इसमें सीमेंस की उन्नत प्रणोदन प्रणाली के साथ मेधा कंपनी का डिस्ट्रीब्यूटेड पावर वायरलेस कंट्रोल सिस्टम (डीपीडब्ल्यूसीएस) लगाया गया है। यह तकनीक ट्रेनों के संचालन को अधिक सुगम और तेज बनाती है। डीपीडब्ल्यूसीएस प्रणाली की मदद से इंजन को बार-बार रिवर्स करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, जिससे लोडिंग और अनलोडिंग पॉइंट्स पर रेक के ठहराव का समय काफी कम हो जाता है। इससे मालगाड़ियों के संचालन में गति और दक्षता दोनों बढ़ती हैं।
रेलवे के शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बोंडामुंडा इलेक्ट्रिक लोको शेड ने ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण पहल की है। मिशन मोड में 125 लोकोमोटिव में विशेष ऊर्जा संरक्षण योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत प्रत्येक लोकोमोटिव प्रतिदिन लगभग 1000 यूनिट बिजली की बचत कर रहा है।
अधिकारियों के अनुसार इन 125 लोकोमोटिव से सालाना बिजली बिल में करीब 43 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। यह पहल न केवल रेलवे के खर्च को कम करेगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को भी मजबूती देगी।
इस उपलब्धि पर डीआरएम तरुण हुरिया ने बोंडामुंडा इलेक्ट्रिक लोको शेड की कार्यकुशलता और टीमवर्क की सराहना की। उन्होंने इंजीनियरों और कर्मचारियों की मेहनत को देखते हुए उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए 25 हजार रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा भी की। डीआरएम ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी यह टीम इसी तरह नई उपलब्धियां हासिल करती रहेगी।

