
उदित वाणी, जमशेदपुर : सिविल कोर्ट ने पांच लाख रुपये के कथित फर्जी चेक बाउंस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए एग्रीको निवासी एक व्यक्ति को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया. यह मामला पिछले पांच वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन था. न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी अर्पणा कुमारी की अदालत ने शुक्रवार 13 मार्च 2026 को अपना निर्णय सुनाते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया.
वादी पक्ष के अधिवक्ता मिथिलेश सिंह ने बताया कि वर्ष 2020 में सीतारामडेरा निवासी काशी प्रसाद ने बैंक में पहचान होने का हवाला देकर एग्रीको निवासी व्यक्ति को लोन दिलाने का आश्वासन दिया था. काशी की बातों पर भरोसा कर पीड़ित ने पांच लाख रुपये की सिक्योरिटी मनी के तौर पर एक ब्लैंक चेक उसे सौंप दिया. इसके बाद काशी प्रसाद लगातार उसे लोन दिलाने के नाम पर टालमटोल करता रहा.
बताया जाता है कि जब पीड़ित ने पैसे या चेक वापस करने के लिए दबाव बनाया, तो काशी प्रसाद ने अपने दामाद मोहित रंजन को वह चेक देकर बैंक में जमा कराया, जहां वह चेक बाउंस हो गया. खुद को ठगा हुआ महसूस करते हुए पीड़ित ने 2 सितंबर 2021 को काशी प्रसाद के खिलाफ न्यायालय में मामला दर्ज कराया.
इधर, न्यायालय से नोटिस मिलने के बाद काशी प्रसाद नाराज हो गया और करीब 20 दिन बाद 22 सितंबर 2021 को उसने भी उसी चेक के आधार पर वादी के खिलाफ फर्जी चेक बाउंस का केस दर्ज करा दिया. इसके बाद वादी के खिलाफ एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत मामला चलता रहा.
लगातार सुनवाई और प्रस्तुत साक्ष्यों की समीक्षा के बाद अदालत ने पाया कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं. इसी आधार पर न्यायालय ने वादी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया.
फैसले के बाद वादी समेत अधिवक्ता मिथिलेश सिंह, रमेश प्रसाद और हेमंत कुमार ने संतोष जताया. उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि किसी भी वित्तीय लेन-देन में सतर्क रहें और ठगी की आशंका होने पर समय रहते कानूनी सहायता अवश्य लें.

