
उदित वाणी देवघर : बाबा बैद्यनाथ धाम में होली के पावन अवसर पर हरिहर मिलन की अनूठी परंपरा आज दोपहर सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी है. हरिहर मिलन के साथ ही देवघर में होली की शुरूआत हो जाती है. हरिहर मिलन में हरि का मतलब भगवान विष्णु और हर का मतलब देवाधिदेव महादेव है. यह प्रथा बेहद खास है. इस दिन कृष्ण जी की प्रतिमा साल में एक बार बाहर निकलती है. वे बैजू मंदिर के पास जाकर झूला झुलाते हैं. इसके बाद उनका आगमन बाबा बैद्यनाथ मंदिर में होता है. जहां पर श्रीकृष्ण भगवान शिव के साथ रंग और गुलाल खेलते हैं.
इस दिन भगवान को विशेष भोग भी लगता है. भक्त उत्साह के साथ गुलाल चढ़ाते हैं और दोनों देवताओं से आशीर्वाद लेते हैं. भगवान को प्राकृतिक गुलाल चढ़ाया जाता है, जिसे प्रसाद स्वरूप भक्त अपने साथ लेकर लौटते हैं और घर-परिवार के लोगों को टीका लगाकर पुण्य के भागी बनते हैं. हरिहर मिलन के बाद भगवान श्रीकृष्ण अपने स्थान पर लौट जाते हैं. कल दोपहर 4 बजे बाबा मंदिर का पट खुला. सरदार पंडा ने सबसे पहले बाबा पर गुलाल अर्पित कर देवघर की होली का शुभारंभ किया. रात साढ़े दस बजे बड़ा बाजार के दोल मंच पर होलिका पूजा हुई. भंडारियों ने भगवान कृष्ण को झूला झुलाया. पालकी यात्रा पूर द्वार होते हुए मंदिर पहुंची.
आज दोपहर हरिहर मिलन शुभ मुहूर्त में संपन्न हो चुका है. इसके बाद शृंगार पूजा हुई. पश्चिम द्वार से शोभा यात्रा निकली. रास्ते के राधाकृष्ण मंदिरों पर मालपुआ भोग अर्पित हुआ. भक्तों ने प्राकृतिक गुलाल चढ़ाकर प्रसाद ग्रहण किया. दोपहर के बाद भी भक्तगण बाबा धाम में उमड़ रहे हैं.
देवघर में हरिहर मिलन का इतिहास
मान्यता है कि फाल्गुन पूर्णिमा को भगवान विष्णु ने रावण से शिवलिंग लेकर देवघर में स्थापित किया. रावण शिवलिंग ले जा रहा था जब बैजू बालक (श्रीकृष्ण) के हाथ सौंपा. बैजू ने वहीं प्रतिष्ठित कर दिया. तब से हरिहर मिलन की परंपरा चली आ रही है. यह बाबा भोलेनाथ की स्थापना दिवस भी है. सदियों पुरानी यह रस्म आध्यात्मिक एकता का प्रतीक बनी हुई है.

