
उदित वाणी, रांची: हजारीबाग के वन भूमि घोटाला से जुड़े मामले में आरोपी विनय कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजरिया की पीठ ने अंतरिम जमानत दे दी. शीर्ष अदालत ने अपना आदेश तत्काल हजारीबाग के एसीबी जांच अधिकारी को भेजने का निर्देश दिया और मामले में राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर शपथ पत्र दाखिल करने को कहा. मामले में अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी. विनय कुमार सिंह पर आरोप है कि उन्होंने खाता नंबर 95 प्लाट नंबर 848 का राजस्व रिकार्ड अपने नाम करवा लिया. जबकि जमीन गैर मजरुआ खास वन भूमि थी.
एसीबी का आरोप है कि मामले में संबंधित सर्कल अधिकारी, इंस्पेक्टर, राजस्व अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे और उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर घोआले को अंजाम दिया. जबकि विनय कुमार सिंह का दावा है कि उन्होंने यह ज़मीन 10 फरवरी 2010 को एक पंजीकृत बिक्री दस्तावेज के माध्यम से खरीदी थी. सुनवाई के दौरान अदालत ने इस तथ्य पर गौर किया कि बिक्री दस्तावेज़ बर्ष 2010 में पंजीकृत हुआ था. जबकि शिकायतकर्ता का बयान सितंबर 2025 में दर्ज किया गया और वर्तमान में प्राथमिकी दर्ज की गई. राज्य सरकार की ओर से वरीय वकील मुकुल रोहतगी ने जमानत का विरोध किया था. उन्होंने कहा कि यह राज्य के अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीन बेचने का एक बड़ा घोटाला है और याचिकाकर्ता उसी का हिस्सा है. इसलिए उसे जमानत नहीं मिलनी चाहिए.

