
उदित वाणी, जमशेदपुर: झारखंड सरकार ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में दिल्ली और पश्चिम बंगाल के मॉडल को लागू करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. इसके तहत स्कूलों की व्यवस्था दिल्ली के स्कूलों की तर्ज पर की जाएगी. इस फैसले के बाद, शिक्षा विभाग के अधिकारी दिल्ली का दौरा करेंगे और वहां की व्यवस्था का अध्ययन करेंगे.
जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई होगी प्रारंभ
झारखंड में पश्चिम बंगाल की तरह जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई भी शुरू की जाएगी. शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने बताया कि राज्य सरकार स्कूलों में जनजातीय भाषाओं की शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए कदम उठाएगी और इसका आरंभ प्राथमिक कक्षाओं से होगा. इस पहल के तहत, जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक विस्तार की जाएगी.
पश्चिम बंगाल में दौरे के दौरान जानकारी जुटाएंगे अधिकारी
शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस संबंध में मुलाकात की और योजना की जानकारी दी. मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव पर सहमति दी और अगले महीने के पहले सप्ताह में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की एक टीम पश्चिम बंगाल का दौरा करेगी. यह टीम वहां की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की शिक्षा की व्यवस्था की जानकारी जुटाएगी. टीम स्कूलों में शिक्षक की नियुक्ति, पाठ्यक्रम और अन्य संबंधित पहलुओं पर रिपोर्ट तैयार करेगी, ताकि झारखंड में इस व्यवस्था को लागू किया जा सके.
शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू
झारखंड के प्राथमिक स्कूलों में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी. इसके लिए कुछ समय पहले जिलों से रिपोर्ट मांगी गई थी, जिसमें स्कूलों में शिक्षकों की आवश्यकता का आंकलन किया गया. इन रिपोर्ट्स के आधार पर, राज्य में लगभग 12,000 नए शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे, जो जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा प्रदान करेंगे.

