
उदित वाणी आदित्यपुर : मध्य-पूर्व में जारी संकट का असर अब झारखंड के औद्योगिक क्षेत्रों पर भी दिखने लगा है.. सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में कच्चे माल और ऊर्जा संसाधनों की किल्लत ने उद्यमियों की नींद उड़ा दी है.. आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र झारखंड का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है, जो लगभग 3200 हेक्टेयर में फैला है और यहां 1200 से अधिक औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं.. ये इकाइयां टाटा मोटर्स जैसे ऑटोमोबाइल दिग्गजों व इंजीनियरिंग उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा हैं..
घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश के कारण कई औद्योगिक इकाइयों को वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति में भारी परेशानी हो रही है, जिससे कई इकाइयों को उत्पादन घटाना पड़ रहा है या कामकाज प्रभावित हो रहा है..
टाटा मोटर्स एंसिलरी पर संकट, कटिंग गैस की कीमतों में 40% तक बढ़ोतरी
टाटा मोटर्स से जुड़ी एंसिलरी इंडस्ट्री इन दिनों गैस (LPG) सप्लाई की कमी के कारण बढ़ती लागत के दबाव का सामना कर रही है.. आयरन कटिंग में इस्तेमाल होने वाली कटिंग गैस की कीमतों में हाल के दिनों में लगभग 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.. उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आयरन कटिंग के लिए मुख्य रूप से कार्बन डाईऑक्साइड और एलपीजी गैस का उपयोग किया जाता है.. सप्लाई कम होने के कारण इन गैसों की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है..
कच्चे माल की कमी से उत्पादन प्रभावित
आदित्यपुर की कई छोटी और मध्यम इकाइयां (MSMEs) कच्चे माल की भारी कमी से जूझ रही हैं.. विशेष रूप से पीवीसी, एचडीपीई पाइप और पेट्रोकेमिकल आधारित उत्पाद बनाने वाली इकाइयों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है.. उद्यमियों का कहना है कि ऊंचे दाम देने के बावजूद आवश्यक सामग्री उपलब्ध नहीं हो पा रही है.. मार्च का महीना, जो सरकारी खरीद और परियोजनाओं के लिए सबसे अहम होता है, उसी समय उत्पादन में कटौती करना उद्योगों के लिए वित्तीय घाटे का सबब बन रहा है..
चैंबर ने प्रधानमंत्री से किया अनुरोध
सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप का अनुरोध किया है.. चैंबर ने मांग की है कि तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को निर्देशित किया जाए कि औद्योगिक क्षेत्रों के लिए वाणिज्यिक एलपीजी की न्यूनतम आपूर्ति सुनिश्चित की जाए.. इस पत्र की प्रतिलिपि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी भेजी गई है..
कीमतों में अस्थिरता और कच्चे माल की कमी न केवल उत्पादन को रोक रही है, बल्कि वैश्विक बाजार में स्थानीय इकाइयों की प्रतिस्पर्धात्मकता को भी कम कर रही है..
वैकल्पिक ऊर्जा और भविष्य की राह
संकट के इस दौर में अब वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर निवेश की चर्चा भी तेज हो गई है..
• बायोगैस: जमशेदपुर में जुस्को की बायोगैस पहल को एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है..
• कोल गैसीफिकेशन: झारखंड की कोयला संपदा को देखते हुए ‘अनबर्न्ट कोयले’ से गैस उत्पादन पर विचार किया जा रहा है..
अनुमान के मुताबिक: देश में एलपीजी की कुल खपत लगभग 31 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जिसमें से लगभग 84–87 प्रतिशत घरेलू क्षेत्र में जाता है.. विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक क्षेत्र को मिलने वाले महज 13-16 प्रतिशत हिस्से में थोड़ी भी कटौती, पूरी इकोनॉमी की चेन को प्रभावित कर सकती है.

