
उदित वाणी, जमशेदपुर : शहर के मानगो थाना क्षेत्र स्थित गौड़ बस्ती से शुक्रवार को ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई जिसने इलाके को झकझोर कर रख दिया। छह महीने पहले शादी के बंधन में बंधे एक नवदंपति की कहानी अब एक रहस्य बन गई है। पहले पति ने आत्महत्या की और अब पत्नी ने भी उसी रास्ते को चुन लिया, जिससे पूरे मोहल्ले में मातम पसरा हुआ है। पुलिस अब दोनों मौतों के पीछे की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, लेकिन जवाब अभी भी सवालों के साए में है।
सुबह मायके में थी सरोज, फिर हुआ अनहोनी का खुलासा
घटना शुक्रवार सुबह की है जब 24 वर्षीय सरोज कुमारी, जो अपने मायके में रह रही थी, सुबह देर तक कमरे से बाहर नहीं निकली। परिवार को कुछ अनहोनी की आशंका हुई। जब कई बार दरवाजा खटखटाने के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तब परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची मानगो थाना पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से कमरे का दरवाजा तोड़ा।
दरवाजा खुलते ही जो दृश्य सामने आया उसने सबको सन्न कर दिया—सरोज फंदे से लटकी हुई थी। पुलिस ने तुरंत शव को उतारकर पंचनामा किया और पोस्टमार्टम के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज भेज दिया।
पति अभिषेक की आत्महत्या के बाद टूटी थी सरोज
बताया जाता है कि सरोज की शादी बीते वर्ष 6 दिसंबर 2024 को अभिषेक कुमार के साथ हुई थी। दोनों की शादी सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ पूरे धूमधाम से संपन्न हुई थी। लेकिन, यह वैवाहिक जीवन लंबा नहीं चल सका। कुछ सप्ताह पहले ही अभिषेक ने भी आत्महत्या कर ली थी। उसके मौत की गुत्थी अभी तक पुलिस सुलझा नहीं पाई थी, तभी सरोज ने भी यह खौफनाक कदम उठा लिया।
सरोज के पिता ब्रम्हदेव शर्मा के अनुसार, पति की मौत के बाद बेटी मानसिक रूप से पूरी तरह से टूट चुकी थी। वह अक्सर कहती थी, “अब जीने का कोई कारण नहीं बचा।” परिजन उसे समझाने का हरसंभव प्रयास कर रहे थे। उसके पास लगातार लोग थे, उसे भावनात्मक सहारा देने की कोशिश की गई, लेकिन वह अपनी दुनिया से इतनी अलग हो चुकी थी कि किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थी।
ससुराल वालों के पक्ष में खड़ी हुई सरोज, मायने तलाश रही पुलिस
मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि आत्महत्या करने से पहले सरोज ने अपने मायके वालों को साफ तौर पर कहा था कि उसके ससुराल वालों को किसी भी तरह से परेशान न किया जाए। यह कथन पुलिस और परिजनों दोनों के लिए अबूझ पहेली बना हुआ है। आम तौर पर ऐसी परिस्थितियों में पीड़ित परिवार ससुराल पक्ष पर आरोप लगाता है, लेकिन यहां स्थिति उलट है।
ब्रम्हदेव शर्मा ने भी इस बात की पुष्टि की है कि बेटी बार-बार कहती थी, “मम्मी-पापा, आप लोग मेरी मौत के बाद अभिषेक के माता-पिता को तंग मत करना।” यह सुनकर परिजन स्तब्ध रह गए थे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह केवल डिप्रेशन का मामला है या इसके पीछे कुछ और भी है।
पुलिस भी स्तब्ध, मौत के कारणों की जांच जारी
मानगो थाना प्रभारी ने बताया कि अभी तक घटना के पीछे कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। दोनों की आत्महत्या के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। प्रथम दृष्टया यह मामला डिप्रेशन का लग रहा है लेकिन पुलिस सभी कोणों से जांच कर रही है। उन्होंने कहा, “हमने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। इसके साथ ही मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और करीबी मित्रों से पूछताछ की जा रही है।”
इस त्रासदी ने एक बार फिर समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अभी भी उदासीन हैं? पति की आत्महत्या के बाद पत्नी की जिंदगी में जो खालीपन आया, क्या उस पर किसी ने गहराई से बात की? क्या परिवार, दोस्त, समाज—कोई उसकी पीड़ा को समझने की कोशिश कर सका?
काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहयोग की जरूरत को एक बार फिर रेखांकित करती है यह घटना। विशेषज्ञों का मानना है कि जीवन के झटकों को सहने के लिए मनोबल और समर्थन बेहद जरूरी है, और यही दोनों चीजें यदि समय रहते मिल जाएं, तो कई जानें बच सकती हैं।
मानगो थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दोनों आत्महत्याओं को जोड़कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है। पुलिस अभिषेक की आत्महत्या की पृष्ठभूमि को भी खंगाल रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या दोनों मामलों में कोई साझा कारण है या नहीं।
थाना प्रभारी ने यह भी बताया कि अभिषेक के परिवार से एक बार फिर से संपर्क किया जाएगा और उनकी ओर से कोई शिकायत या सूचना हो तो उसे भी जांच में शामिल किया जाएगा।
छह महीने पहले दो लोग एक-दूसरे के साथ जीवन शुरू करने की कसमें खा रहे थे। आज दोनों दुनिया से अलविदा कह चुके हैं। वजह—अभी अज्ञात। समाज, परिवार, और कानून—सब सवालों के घेरे में हैं।
