
उदित वाणी, जमशेदपुर : गैंगस्टर विक्रम शर्मा की हत्या ने अपराध जगत और पुलिस तंत्र दोनों को झकझोर दिया है. घटना के चार दिन बीत जाने के बावजूद जांच एजेंसियां अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी हैं. शहर में यह चर्चा आम है कि यदि यह वारदात जमशेदपुर में हुई होती, तो संभवतः स्थानीय पुलिस अब तक मामले का उद्भेदन कर चुकी होती. लेकिन चूंकि हत्या देहरादून में हुई, इसलिए जांच की दिशा और रफ्तार को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं.
दर्जन भर टीमें, फिर भी खाली हाथ
हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने दर्जन भर से अधिक विशेष टीमें गठित की हैं. ये टीमें तकनीकी साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, मुखबिर नेटवर्क और पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर अलग-अलग एंगल पर काम कर रही हैं. बावजूद इसके, अब तक कोई निर्णायक सुराग हाथ नहीं लगा है. पुलिस अधिकारी आधिकारिक बयान में केवल इतना कह रहे हैं कि “जांच जारी है” और संवेदनशीलता के कारण अधिक जानकारी साझा नहीं की जा सकती.
सर्विलांस की चुनौती: डिजिटल ट्रेल गायब
आम तौर पर ऐसी हाई-प्रोफाइल वारदातों में सर्विलांस अहम भूमिका निभाता है, पर इस केस में तकनीकी जांच अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही. बागबेड़ा निवासी आकाश, विशाल और जुगसलाई के आशुतोष के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाए गए हैं, लेकिन उनकी सटीक लोकेशन ट्रेस नहीं हो सकी. सूत्रों का कहना है कि आरोपियों ने संभवतः अपने मोबाइल डिवाइस या सिम कार्ड बदल लिए हैं, जिससे डिजिटल ट्रेल लगभग खत्म हो गया है.
हरिद्वार-यूपी सीमा तक आखिरी लोकेशन
तकनीकी इनपुट के आधार पर संदिग्धों की अंतिम लोकेशन हरिद्वार से लेकर उत्तर प्रदेश सीमा तक ट्रेस की गई थी. इसके बाद से उनका कोई विश्वसनीय डिजिटल फुटप्रिंट सामने नहीं आया. इस स्थिति ने पुलिस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, क्योंकि फरार आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाना अब और जटिल हो गया है.
पत्नी से पूछताछ: संपत्ति विवाद पर फोकस
देहरादून पुलिस ने विक्रम शर्मा की पत्नी से लंबी पूछताछ की. पूछताछ के दौरान उसने बताया कि जब विक्रम जेल में बंद था, तब उसके छोटे भाई अरविंद ने कथित तौर पर उसकी संपत्ति पर कब्जा कर लिया था. जेल से रिहा होने के बाद दोनों भाइयों के बीच विवाद गहरा गया. पत्नी ने आशंका जताई कि इस विवाद के चलते अरविंद की भूमिका हत्या में हो सकती है. पुलिस ने इस बयान को जांच का महत्वपूर्ण आधार माना है.
अरविंद हिरासत में, पूछताछ जारी
घटना के दिन से ही अरविंद को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, संपत्ति विवाद, व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा और पुराने आपराधिक संबंधों के पहलुओं की गहन जांच की जा रही है. हालांकि, पुलिस ने अभी तक अरविंद की संलिप्तता पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
मानगो का प्रभात उर्फ ‘बकरी’ फरार
पूरे मामले में मानगो निवासी प्रभात उर्फ ‘बकरी’ का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है. आरोप है कि उसने अरविंद को पहले जमशेदपुर में पनाह दी थी और कथित शूटरों—आकाश, विशाल और आशुतोष—से संपर्क स्थापित कराया. दून पुलिस की टीम पिछले तीन दिनों से जमशेदपुर में डेरा डाले हुए है और स्थानीय पुलिस के सहयोग से लगातार दबिश दे रही है, लेकिन प्रभात का अब तक कोई ठिकाना नहीं मिल सका.
गैंगवार या निजी रंजिश?
जांच एजेंसियां इस एंगल पर भी काम कर रही हैं कि हत्या गैंगवार का नतीजा है या निजी रंजिश का. विक्रम शर्मा पर जमशेदपुर के विभिन्न थानों में दर्ज कई मामलों में वह कोर्ट से बरी हो चुका था. 2021 में जेल से बाहर आने के बाद उसने सार्वजनिक जीवन में सक्रियता बढ़ाई और राजनीति में पैठ बनाने की कोशिशें शुरू कीं. ऐसे में यह सवाल अहम हो गया है कि हत्या के पीछे पुरानी दुश्मनी है या हालिया विवाद.
फरारी, गिरफ्तारी और कानूनी लड़ाई
विक्रम शर्मा को 14 अप्रैल 2017 को देहरादून से गिरफ्तार किया गया था. इससे पहले वह लगभग दस वर्षों तक फरार रहा. इसी दौरान अरविंद पर संपत्ति कब्जाने के आरोप लगे. 30 जनवरी 2021 को जमानत पर रिहा होने के बाद विक्रम ने संपत्ति वापस लेने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की, जो अभी अदालत में लंबित है. जांच एजेंसियां इस पृष्ठभूमि को हत्या के संभावित कारणों से जोड़कर देख रही हैं.
‘मोडस ऑपरेंडी’ में समानता
सूत्रों के अनुसार, विक्रम शर्मा की हत्या का तरीका गैंगस्टर अमरनाथ की बासुकीनाथ में हुई हत्या से मिलता-जुलता बताया जा रहा है. अमरनाथ हत्याकांड में विशाल सिंह पर आरोप लगे थे. वर्तमान केस में भी विशाल का नाम सामने आने से पुलिस पुराने आपराधिक पैटर्न और आपसी कड़ियों की पड़ताल कर रही है.
पुराने केसों का साया
आकाश का नाम परसुडीह के नामोटोला में शराब कारोबारी विजय साहू की हत्या में जुड़ा था, जिसमें वह जेल जा चुका है. वहीं, अरविंद शर्मा का नाम ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा हत्याकांड में आया था, हालांकि बाद में वह कोर्ट से बरी हो गया. अशोक शर्मा की पत्नी पिंकी शर्मा से अरविंद की शादी उस समय काफी विवादों में रही थी. इन पुराने मामलों के संदर्भ में पुलिस संभावित दुश्मनी और आपराधिक रिश्तों की जांच कर रही है.
गणेश सिंह गैंग से जुड़ाव
हत्या के संदिग्धों—आकाश, आशुतोष और विशाल—को गणेश सिंह गैंग से जुड़ा बताया जा रहा है. सीसीटीवी फुटेज में उनके चेहरे स्पष्ट नजर आने की बात कही जा रही है, जिससे पहचान आसान हुई है. लेकिन गिरफ्तारी अब भी चुनौती बनी हुई है.
दून और जमशेदपुर पुलिस संयुक्त रूप से छापेमारी, तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर नेटवर्क के जरिए आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि जांच कई स्तरों पर जारी है और जल्द ही महत्वपूर्ण खुलासे संभव हैं. फिलहाल, इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड ने दोनों राज्यों की पुलिस के सामने बड़ी परीक्षा खड़ी कर दी है.

