
उदित वाणी, रांची : रांची पुलिस की साइबर क्राइम थाना द्वारा निवेश घोटाले और डिजिटल फ्रॉड नेटवर्क के एक बड़े संगठित गिरोह का खुलासा किया है. साइबर पुलिस ने चीन के ठगों की मिलीभगत से रांची में साइबर अपराध में संलिप्त उन सात एजेंटों को गिरफ्तार किया है. जो रांची के जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र स्थित ओलिव गार्डन होटल से नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था. गिरोह निवेश का झांसा देकर घोटाला, डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी गतिविधियों में संलिप्त थे और म्यूल बैंक खातों की व्यवस्था कर चीनी ठगों की मिलीभगत से अवैध ट्रांजेक्शन कर रहे थे.
गिरोह का कनेक्शन चीन की संदिग्ध कंपनियों से जुड़ा पाया गया है. जो भारत में फर्जी निवेश योजनाओं, मोबाइल एप्स के जरिए आम लोगों को ठगने व मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों के लिए किया जा रहा था. बताया गया कि गिरफ्तार एजेंट चीन की मूनपे, ड्रेगनपे, सुपरपे व मैंगोपे इंडिया नामक कथित कंपनियों के लिए कार्य कर रहे थे. गिरफ्तार सातों एजेंटों में बिहार के सिवान जिले के टाउन थाना फतेहपुर बाईपास रोड निवासी कुमार दीपक और टाउन थाना क्षेत्र बबुनिया मोड़ निवासी प्रभात कुमार, नालंदा जिले के बिंद थाना क्षेत्र के घनेश्वर घाट निवासी कुमार सौरभ, नवादा जिले के रोह थाना क्षेत्र के कुजैला रोड निवासी शिवम कुमार, पटना जिले के दिदारगंज खाजपुर कच्छी दरगाह निवासी अनिल कुमार व गौरीचक थाना क्षेत्र के रामगंज का रहने वाला प्रदीप कुमार तथा मध्य प्रदेश के सागर जिले के गोपालगंज थाना क्षेत्र के तिलीवार्ड सागर काली मंदिर के पास मेंबर गली निवासी लखन चौरसिया शामिल हैं.
साइबर पुलिस ने आरोपियों के पास से 12 मोबाइल, 11 सिमकार्ड, 14 एटीएम कार्ड, एक लैपटॉप, एक चेकबुक समेत वॉट्सएप व टेलीग्राम चैट से प्राप्त 60 म्यूल खाता की विवरणी बरामद की गई है. पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि यह नेटवर्क देश के कई राज्यों में सक्रिय था. एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज निवेश घोटाले और डिजिटल फ्रॉड से संबंधित शिकायतों की जांच में 60 म्यूल अकाउंट और करीब 68 करोड़ रुपये की फर्जी ट्रांजैक्शन की जानकारी मिली है. व्हाट्सएप और टेलीग्राम चैट के जरिेये म्यूल अकाउंट्स का उपयोग अवैध धन हस्तांतरण के लिए किया जाता था. पुलिस के मुताबिक ठगी के इस नेटवर्क में शामिल एजेंट टेलीग्राम के जरिए एक एपीके फाइल [एप्लिकेशन] डाउनलोड कराते थे. जिसे लोगों के मोबाइल में इंस्टॉल कराकर उनका बैंकिंग डेटा चुराया जाता था.
यह एप्लिकेशन ओटीपी और अलर्ट को भी चुपचाप सर्वर पर भेज देता था. सीआईडी के अनुसार यह कार्रवाई झारखंड पुलिस की साइबर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत खुलासा हुआ है. राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को उजागर करने की दिशा में यह एक बड़ी सफलता है. वहीं सीआईडी झारखंड ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध निवेश योजना, अज्ञात लिंक या मोबाइल एप्लिकेशन से दूर रहें. किसी भी साइबर अपराध की सूचना साइबर क्राइम की बेवसाइट या हेल्पलाइन 1930 पर तत्काल दें.

