
उदित वाणी, जमशेदपुर : मुजफ्फरपुर की महिला द्वारा करीब 30 लाख रुपये के गबन से जुड़े मामले में जिला अतिरिक्त एवं सत्र न्यायाधीश (तीन) निति कुमारी की अदालत ने अहम आदेश सुनाया है. अदालत ने बिहार के मुजफ्फरपुर जिला अंतर्गत बरियारपुर थाना क्षेत्र के चिंतामणपुर अदवाड़ा निवासी सुषमा पांडे एवं रंजीत कुमार की अग्रिम जमानत याचिका नामंजूर कर दी है. वहीं, इस मामले में सह-आरोपी निशांत कुमार एवं आयुष कुमार को सशर्त जमानत की राहत दी गई है. दोनों को तीन सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत में आत्मसमर्पण कर जमानत आदेश प्राप्त करने तथा अनुसंधानक को हर संभव सहयोग करने का निर्देश दिया गया है.
यह मामला सोनारी निवासी केयर ट्रेडर्स के मालिक संजय कुमार द्वारा साकची थाना में दर्ज कराई गई प्राथमिकी से जुड़ा है. प्राथमिकी के अनुसार, आयुष कुमार एवं शत्रुंजय सिंह संजय कुमार के कार्यालय पहुंचे और रंजीत कुमार व सुषमा पांडे से बातचीत कराई. बातचीत के दौरान आरोपियों ने एमआरपीएल मंगलौर में 50 लाख रुपये का फायर सेफ्टी कार्य और लगभग दो करोड़ रुपये के स्क्रैप शिफ्टिंग कार्य का प्रस्ताव दिया और इसे अत्यंत लाभकारी बताया.
सूचक के अनुसार, नवंबर 2023 में वर्क ऑर्डर मिलने के बाद उसने कार्य शुरू किया. करीब छह माह बाद आरोपियों ने अचानक रॉयल्टी की दर बढ़ा दी तथा टीडीएस और जीएसटी की राशि भी अपने पास रख ली. कार्य पूरा हो जाने के बावजूद कुल 30,87,586 रुपये का भुगतान बकाया रह गया. बार-बार तकादा करने के बाद जब भुगतान नहीं हुआ तो सूचक ने वकील के माध्यम से नोटिस भेजा.
नोटिस के बाद आरोपी सूचक के कार्यालय पहुंचे और एक रसीद दिखाई, जिस पर राशि प्राप्त करने का हस्ताक्षर बताया गया. हालांकि, सूचक ने अदालत में स्पष्ट किया कि वह हस्ताक्षर उसका नहीं बल्कि फर्जी है. मामले की सुनवाई के दौरान सूचक की ओर से अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू, पूर्व लोक अभियोजक सुशील कुमार जायसवाल एवं अधिवक्ता बबीता जैन ने अदालत में सशक्त दलीलें प्रस्तुत कीं, जिसके बाद अदालत ने यह आदेश पारित किया.

