
उदित वाणी, जमशेदपुर : शहर में 13 जनवरी को सामने आए 24 वर्षीय कैरव गाँधी के सनसनीखेज अपहरण कांड का पुलिस ने सफलतापूर्वक खुलासा कर दिया है. अपहरण की सूचना मिलते ही बिष्टुपुर थाना में मामला दर्ज किया गया और पुलिस ने त्वरित एवं गंभीर अनुसंधान शुरू किया. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरीय अधिकारियों के निर्देश पर विशेष टीमों का गठन किया गया, जिन्होंने तकनीकी साक्ष्यों और मानवीय आसूचना के समन्वय से बहुस्तरीय जांच चलाई.
पुलिस की सतर्क, योजनाबद्ध और तेज कार्रवाई के परिणामस्वरूप 26/27 जनवरी की रात अपहृत कैरव गाँधी को सकुशल बरामद कर लिया गया. इस सफलता के साथ ही कांड में संलिप्त छह अभियुक्तों-गुड्डु सिंह, उपेन्द्र सिंह, अर्जुन सिंह उर्फ आर्यन, मो. इमरान आलम उर्फ आमिर, रमीज राजा और मोहन कुमार प्रसाद-को गिरफ्तार किया गया. सभी आरोपियों को 30 जनवरी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
छह माह पहले रची गई थी साजिश
अनुसंधान के दौरान पुलिस के हाथ चौंकाने वाले तथ्य लगे. जांच में खुलासा हुआ कि इस अपहरण कांड के प्रमुख साजिशकर्ताओं में से एक फरार अपराधी करीब छह माह पूर्व अपने सह-साजिशकर्ता अमरिंदर सिंह उर्फ करतार सिंह के साथ जमशेदपुर आकर रहने लगा था. उसने साकची क्षेत्र में अमरिंदर सिंह के नाम से किराये पर कमरा लिया और वहीं से पूरे षड्यंत्र की रूपरेखा तैयार की गई.
पुलिस के अनुसार, इसी दौरान गुड्डु सिंह, मो. इमरान, मनप्रीत सिंह और गुरजित सिंह भी शहर पहुंचे. इन सभी ने अपहृत कैरव गाँधी की गतिविधियों की लगातार रेकी की और वारदात के लिए अनुकूल समय का इंतजार किया.
पहचान छिपाने की थी सख्त रणनीति
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि अपहरणकर्ताओं ने गिरफ्तारी की स्थिति में नेटवर्क का पर्दाफाश रोकने के लिए एक-दूसरे की पहचान जानबूझकर साझा नहीं की थी. योजना के तहत मनप्रीत सिंह ने वाहन चालक की भूमिका निभाई, जबकि अमरिंदर सिंह उर्फ करतार सिंह, गुड्डु, इमरान, रमीज एवं अन्य अपराधियों ने पुलिस वर्दी धारण कर घटनास्थल पर पहुंचकर वारदात को अंजाम दिया. इनके सहयोग के लिए राजकरण, संतोष और गुरदीत शेर सिंह भी मौजूद थे.
चांडिल के रास्ते शहर से फरार
अपहरण के बाद कैरव गाँधी को स्कॉर्पियो वाहन से चांडिल गोलचक्कर के समीप ले जाकर दूसरे वाहन में स्थानांतरित किया गया. इसके बाद दोनों वाहन अलग-अलग मार्गों से शहर छोड़कर फरार हो गए. अपहृत को दूसरे वाहन से रांची होते हुए डोभी ले जाया गया, जहां पहले से मौजूद अपराधियों को सौंपा गया. बाद में उसे गया जिला अंतर्गत बिसर गांव में रखा गया.
वारदात के बाद सभी आरोपी पंजाब, दिल्ली, कोलकाता और बिहार की ओर भाग निकले तथा गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदलते रहे.
अंतर्राज्यीय छापेमारी में पांच और गिरफ्तार
मामले के अंतर्राज्यीय स्वरूप को देखते हुए पीयूष पांडे के निर्देशानुसार पुलिस अधीक्षक (नगर) के मार्गदर्शन और पुलिस उपाधीक्षक (सीसीआर) के नेतृत्व में अलग-अलग विशेष छापामारी टीमों का गठन किया गया. इन टीमों ने पंजाब, दिल्ली, कोलकाता और बिहार के विभिन्न जिलों में संबंधित राज्य पुलिस के सहयोग से समन्वित एवं गोपनीय अभियान चलाया.
सुनियोजित कार्रवाई के दौरान पांच अन्य आरोपियों—मनप्रीत सिंह सेखों (उम्र करीब 50 वर्ष, निवासी लुधियाना, पंजाब), राजकरण यादव (23 वर्ष, निवासी शेखपुरा, बिहार), गुरदीत शेर सिंह (26 वर्ष, मूल निवासी लुधियाना, पंजाब, वर्तमान पता कोलकाता), अमरिंदर सिंह उर्फ करतार सिंह (उम्र करीब 74 वर्ष, निवासी लुधियाना, पंजाब) तथा संतोष कुमार उर्फ संतोष विलेन (26 वर्ष, निवासी शेखपुरा, बिहार)—को गिरफ्तार किया गया.
मोबाइल फोन बरामद, आपराधिक इतिहास भी उजागर
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त पांच मोबाइल फोन बरामद किए हैं. जांच में यह भी सामने आया कि संतोष कुमार, गुरदीत शेर सिंह और अमरिंदर सिंह उर्फ करतार सिंह पूर्व में अन्य आपराधिक कांडों में जेल जा चुके हैं.
पुलिस का दावा: समन्वय और तकनीक की बड़ी सफलता
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई तकनीकी निगरानी, मानवीय आसूचना और विभिन्न राज्यों की पुलिस के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है. अधिकारियों के अनुसार, फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए अभियान जारी है और पूरे आपराधिक नेटवर्क की विस्तृत जांच की जा रही है.

