
उदित वाणी, जमशेदपुर : बिष्टुपुर कैरव अपहरणकांड में पुलिस मुठभेड़ के दौरान घायल हुए तीनों बदमाशों को मंगलवार को इलाज के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. बीते पांच दिनों से एमजीएम अस्पताल में भर्ती नालंदा जिले के इस्लामपुर थाना क्षेत्र के माधरवेन निवासी गुड्डू सिंह, सिलहरी के मो. इमरान आलम उर्फ आमिर तथा रमीज राजा को स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद पुलिस ने कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया गया.
पुलिस के अनुसार, 29 जनवरी की रात करीब 2.15 बजे बिष्टुपुर थाना क्षेत्र स्थित साई मंदिर के पास नाले किनारे झाड़ियों में हथियार बरामदगी के दौरान यह कथित मुठभेड़ हुई थी. पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में तीनों बदमाशों के पैर में गोली लगी थी. घटना के बाद उन्हें तत्काल एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां चिकित्सकीय निगरानी में उनका इलाज चल रहा था.
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि चिकित्सकों द्वारा फिट घोषित किए जाने के बाद मंगलवार को तीनों आरोपियों को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया. न्यायालय के आदेश के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. पुलिस अब भी इस अपहरणकांड से जुड़े गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है.
बताया गया कि इस मामले में पुलिस पहले ही 28 जनवरी की तड़के बिहार के गया और नवादा जिलों में छापेमारी कर कुल छह बदमाशों को गिरफ्तार कर चुकी है. गिरफ्तार आरोपियों को पूछताछ के बाद जमशेदपुर लाया गया था. पूछताछ के क्रम में यह बात सामने आई कि अपहरणकांड में प्रयुक्त हथियारों को बिष्टुपुर के साई मंदिर के पास नाले में छिपाकर रखा गया है.
इसी क्रम में पुलिस टीम गुड्डू सिंह, मो. इमरान और रमीज राजा को हथियारों की बरामदगी के लिए मौके पर लेकर गई थी. पुलिस का दावा है कि जैसे ही झाड़ियों से हथियार बरामद किए गए, उसी दौरान मो. इमरान आलम ने मौके का फायदा उठाते हुए जवान हरिपद महतो की कार्बाइन छीन ली और पुलिस टीम पर छह राउंड फायरिंग कर दी. गनीमत रही कि इस फायरिंग में कोई भी पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ.
पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में कुल पांच गोलियां चलाई गईं, जिनमें से तीनों बदमाशों के पैर में गोली लगी और वे मौके पर ही गिर पड़े. इसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए तीनों को गिरफ्तार कर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया.
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस अपहरणकांड में शहर के भीतर कैरव की गतिविधियों की जानकारी देने वाले दो संदिग्धों की भी तलाश की जा रही है. आशंका जताई जा रही है कि स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों ने गिरोह को सहयोग प्रदान किया था. इसी कड़ी में बिहार के विभिन्न इलाकों में लगातार छापेमारी की जा रही है, हालांकि अब तक पुलिस को इस दिशा में कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई है.
पुलिस का कहना है कि यह गिरोह संगठित तरीके से अपहरण की घटनाओं को अंजाम देता था और फिरौती की रकम वसूलने की योजना बनाता था. बिष्टुपुर कैरव अपहरणकांड के खुलासे के बाद शहर में सक्रिय अपराधी गिरोहों पर पुलिस की पैनी नजर बनी हुई है. आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा.

