
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा समर्थित आदिवासी सम्मेलन संवाद, मुंबई स्थित ईशारा के सहयोग से 22 से 25 जनवरी 2026 तक एक ट्राइबल क्यूज़ीन पॉप-अप का आयोजित हो रहा है. इस पहल के माध्यम से प्रामाणिक आदिवासी व्यंजनों को मुख्यधारा के रेस्तरां मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा.इस पहल का उद्देश्य आदिवासी पाक ज्ञान का जश्न मनाने के साथ-साथ एक समावेशी और सुसंगठित भोजन अनुभव के ज़रिये आदिवासी समुदायों को सम्मान, विजिबिलिटी और उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है.
इन प्रदेशों के आदिवासी घरेलू व्यंजन
पॉप-अप में आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, असम और झारखंड की विविध जनजातीय आदिवासी समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले छह आदिवासी घरेलू रसोइयों द्वारा तैयार किए गए पारंपरिक व्यंजन प्रस्तुत किए जाएंगे. इन छह सहभागी रसोइयों में से पांचमहिलाएं हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी आदिवासी खाद्य परंपराओं के संरक्षण और उनके हस्तांतरण में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करता है. इन सहभागी घरेलू रसोइयों में आंध्र प्रदेश के कोया जनजाति से किरण क्रांति, हिमाचल प्रदेश के नेगी जनजाति से पनमा लामो और छेवांग डोलमा, असमके कार्बी आंगलोंग क्षेत्र के कार्बी जनजाति से जोरलिन तारोपी तथा झारखंड से संथाल जनजाति की लक्ष्मी हांसदा और असुर जनजाति की नीलम मिंज शामिल हैं.
यह सहयोग आदिवासी समुदायों के साथ संवाद के सात वर्षों के निरंतर जुड़ाव, विशेष रूप से आतिथ्य के माध्यम से आदिवासी व्यंजनों पर किए गए कार्य पर पर आधारित है, जो समुदाय-नेतृत्व वाली आतिथ्य और खाद्य परंपराओं को सामने लाता है.मूक और वधिर व्यक्तियों को रोजगार देने के लिए पहचाने जाने वाले समावेशी कैफ़े और रेस्तरां ईशारा के साथ यह साझेदारी सहानुभूति, समावेशन, सम्मान और सततता जैसे साझा मूल्यों पर आधारित एक मजबूत सामंजस्य को दर्शाती है.
22 जनवरी को हुआ शुभारंभ
पॉप-अप का शुभारंभ 22 जनवरी 2026 को ईशारा में आयोजित एक विशेष रूप से क्यूरेटेड स्टोरीटेलिंग टेबल के साथ होगा, जहां आदिवासी घरेलू रसोइये चुनिंदा व्यंजनों को अपनी व्यक्तिगत खाद्य कहानियों के साथ प्रस्तुत करेंगे.23 से 25 जनवरी 2026 तक ट्राइबल क्यूज़ीन पॉप-अप ईशारा के रेस्तरां मेन्यू का हिस्सा बनकर अतिथियों के लिए खुला रहेगा, जिससे मेहमान प्रामाणिक आदिवासी व्यंजनों का अनुभव कर सकेंगे. इन व्यंजनों के साथ मेन्यू नोट्स भी दिए जाएंगे, जो उनकी उत्पत्ति, उपयोग की गई सामग्रियों और सांस्कृतिक महत्व को उजागर करेंगे.पॉप-अप के दौरान प्रस्तुत सभी व्यंजन ईशारा और घरेलू रसोइयों द्वारा संयुक्त रूप से क्यूरेट किए गए हैं, ताकि प्रामाणिकता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके. इसमें पारंपरिक सामग्रियों, मौसमी उपज और न्यूनतम खाद्य अपशिष्ट पर विशेष जोर दिया गया है.
समावेशिता का दर्शन
इस सहयोग पर अपने विचार साझा करते हुए, ईशारा के संस्थापक प्रशांत इस्सर ने कहा,
“ईशारा में समावेशिता का हमारा दर्शन हमेशा केवल सेवा तक सीमित नहीं रहा है; यह उन विविध विचारों और कहानियों को अपनाने से जुड़ा है, जो मानवीय अनुभव को आकार देती हैं। हेरिटेज एंड रूट्स के माध्यम से हम इसी संवाद की भावना को थाली तक लेकर आ रहे हैं.
