
स्क्रैप से बनेगा स्टील, इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस तकनीक का होगा प्रयोग
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटा स्टील का 3,200 करोड़ का लुधियाना प्लांट भारत में पर्यावरण-अनुकूल स्टील उत्पादन के विस्तार की एक बड़ी मिसाल है. यह प्लांट, पंजाब के हाई-टेक वैली के पास मार्च 2026 से संचालन शुरू करने के लिए तैयार है. यह कंपनी का जमशेदपुर के बाद भारत में दूसरा सबसे बड़ा प्लांट होगा, जो इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएफ) तकनीक का उपयोग करेगा और 100 प्रतिशत स्टील स्क्रैप से उत्पादन करेगा, जिससे उत्सर्जन काफी कम होगा.
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
यह प्लांट 0.75 मिलियन टन प्रति वर्ष की स्टील बनाने की क्षमता वाला है, जिसमें रीबार मिल भी शामिल है. यह 115 एकड़ में फैला हुआ है. शुरुआती निवेश 2,600 करोड़ था, जो अब बढ़कर 3,200 करोड़ हो गया है. यह टाटा स्टील का पंजाब में सबसे बड़ा निवेश है और पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान की नीतियों के तहत औद्योगिक पुनरुत्थान का प्रतीक है.
आर्थिक प्रभाव
इससे लगभग 2,500 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. पंजाब सरकार ने समय पर परियोजना पूरी करने का श्रेय अपनी निवेशक-अनुकूल नीतियों को दिया है. ईएएफ प्रक्रिया पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस की तुलना में कार्बन उत्सर्जन को काफी कम करती है, जो टिकाऊ स्टील उत्पादन के लक्ष्यों से मेल खाती है.
रणनीतिक महत्व
पंजाब के मुख्यमंत्री ने राज्य की शासन व्यवस्था में उद्योगों के भरोसे की बात कही है, जिससे लुधियाना को हरा-भरा स्टील हब बनाने में मदद मिलेगी. टाटा स्टील ने भविष्य में विस्तार की संभावना जताई है और सरकार से पूरा सहयोग मिलने का आश्वासन दिया है. यह प्रोजेक्ट भारत में हरित स्टील उत्पादन और क्षेत्रीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

