
टाटा स्टील बोर्ड ने तीन बड़े फैसले लिए
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटा स्टील लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने मंगलवार 17 मार्च 2026 को हुई बैठक में तीन अहम प्रस्तावों को मंजूरी दे दी. ये फैसले कंपनी की कॉर्पोरेट संरचना को सरल बनाने, परिचालन दक्षता बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. बोर्ड की बैठक दोपहर 2 बजे शुरू हुई और शाम 5:15 बजे समाप्त हुई. ये हुए फैसले-
1. नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (एनआईएनएल) का टाटा स्टील में विलय-बोर्ड ने नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड, जो टाटा स्टील की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है, को टाटा स्टील में पूर्ण विलय ( Scheme of Amalgamation) को मंजूरी दे दी. यह विलय कंपनियों अधिनियम 2013 की धारा 230-232, इनकम टैक्स एक्ट की धारा 2(1B) और अन्य लागू कानूनों के तहत किया जाएगा.
विलय की मुख्य विशेषताएं
एनआईएनएल का पूरा इक्विटी और प्रिफरेंस शेयर कैपिटल रद्द हो जाएगा. नया शेयर जारी नहीं होगा और नकद भुगतान भी नहीं किया जाएगा. टाटा स्टील के एनआईएनएल में निवेश वाले शेयर भी रद्द हो जाएंगे.
विलय का उद्देश्य
लांग प्रोडक्ट्स के कारोबार को एक छत्र के नीचे लाना, परिचालन लागत घटाना, कच्चे माल की सुरक्षा बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स और प्रोक्योरमेंट में बचत तथा शेयरधारकों के मूल्य में वृद्धि. इससे सिनर्जी आएगी. प्रशासनिक खर्च कम होने के साथ इन्वेंटरी मैनेजमेंट बेहतर, रॉ मटेरियल सिक्योरिटी में सुधार, प्रोजेक्ट्स का तेजी से क्रियान्वयन और सस्टेनेबिलिटी-सेफ्टी प्रैक्टिस में सुधार होगा. उल्लेखनीय है कि एनआईएनएल, ओडिशा के कालिंगानगर में 0.98 मिलियन टन क्षमता का इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट संचालित करता है और उसके पास सुंदरगढ़-क्योंझर में कैप्टिव आयरन ओर माइन भी है.
2. विदेशी सहायक कंपनी में 2 अरब डॉलर (लगभग 18,488 करोड़ रुपये) का निवेश-बोर्ड ने टाटा स्टील होल्डिंग पी लिमिटेड (T Steel Holdings Pte. Ltd. (TSHP) — सिंगापुर में स्थित टाटा स्टील की पूर्ण स्वामित्व वाली विदेशी सहायक कंपनी में दो अरब डॉलर (लगभग ₹18,488.10 करोड़) तक का इक्विटी शेयर सब्सक्रिप्शन मंजूर किया. यह निवेश वित्तीय वर्ष 2026-27 से कई किस्तों में किया जाएगा.
उद्देश्य- विदेशी सहायक कंपनियों के कैपेक्स, रिस्ट्रक्चरिंग और मौजूदा कर्ज चुकाने में सहायता. टाटा स्टील का विदेशी कारोबार मजबूत करना. टीएसएचपी पहले से ही टाटा स्टील की सभी विदेशी निवेशों का होल्डिंग वाहन है. आरबीआई की विदेशी निवेश नीति के तहत एक बिलियन यूएस डॉलर से अधिक निवेश के लिए आरबीआई की पूर्व अनुमति ली जाएगी.
3. मेडिका टीएस हॉस्पिटल का पूर्ण स्वामित्व हासिल-टाटा स्टील ने मेडिका टीएस हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड में बाकी हिस्सेदारी खरीदने का फैसला किया. मणिपाल हॉस्पिटल्स ईस्टर्न इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से 1.49 करोड़ में 7,40,000 इक्विटी शेयर (49 प्रतिशत हिस्सेदारी) खरीदा जाएगा.
परिणाम: सौदा पूरा होते ही मेडिका टीएस हॉस्पिटल टाटा स्टील की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बन जाएगी. कालिंगानगर इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स में स्थित यह 100 बेड का मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल, टाटा स्टील के कर्मचारियों, ठेकेदारों और स्थानीय समुदाय के लिए एकमात्र प्रमुख स्वास्थ्य सुविधा है. पूर्ण नियंत्रण से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच बढ़ेगी.
शेयरधारिता पर कोई प्रभाव नहीं
टाटा स्टील के प्रमोटर और पब्लिक शेयरधारिता में कोई बदलाव नहीं होगा. एनआईएनएल के सभी शेयर रद्द हो जाएंगे. कंपनी सेक्रेटरी एंड चीफ लीगल ऑफिसर परवथीसम कांचिनाधम ने इसकी जानकारी बीएसई और एनएसई को दी है. विश्लेषकों की राय है कि ये फैसले टाटा स्टील की “सिंप्लिफिकेशन, स्केल और सस्टेनेबिलिटी” रणनीति को मजबूत करेंगे. एनआईएनएल विलय से ओडिशा में लांग प्रोडक्ट्स का कारोबार और मजबूत होगा, जबकि विदेशी निवेश वैश्विक विस्तार में मदद करेगा. मेडिका अस्पताल का अधिग्रहण सीएसआर और कर्मचारी कल्याण दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा. यह बोर्ड मीटिंग का आउटकम बाजार के लिए सकारात्मक माना जा रहा है. आगे की प्रक्रिया में एनसीएलटी, आरबीआई और अन्य नियामक अनुमतियों की प्रतीक्षा रहेगी.

