
उदित वाणी, नई दिल्ली : इस्पात मंत्रालय ने उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस्पात और इस्पात उत्पाद (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 2024 के अंतर्गत अधिसूचित कुल 55 भारतीय मानकों के प्रवर्तन को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है. यह निर्णय गैर-वित्तीय नियामक सुधारों पर उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी-एनएफआरआर) की सिफारिशों के आधार पर व्यापक प्रभावों की समीक्षा के बाद लिया गया है.
मंत्रालय ने यह मूल्यांकन किया कि गुणवत्ता नियंत्रण आदेश के कड़े प्रवर्तन का डाउनस्ट्रीम मूल्य निर्धारण पर क्या असर पड़ सकता है, साथ ही एमएसएमई और उपभोक्ता उद्योगों के लिए इस्पात की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना भी एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है. कुछ विशेष इस्पात ग्रेड के लिए आयात पर निर्भरता, अनुचित व्यापार प्रथाओं की रोकथाम, छोटे इस्पात उत्पादकों को समर्थन और घरेलू आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने जैसे पहलुओं का भी मंत्रालय द्वारा समग्र रूप से आकलन किया गया.
इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने 42 भारतीय मानकों पर क्यूसीओ के प्रवर्तन को तीन वर्ष के लिए निलंबित कर दिया है. ये मानक मुख्य रूप से इंजीनियर्ड उत्पादों, ऑटोमोटिव उद्योग और टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं के निर्माण में उपयोग होने वाले इस्पात ग्रेड से जुड़े हैं. इस निर्णय को औपचारिक रूप देने के लिए इस्पात मंत्रालय ने इस्पात एवं इस्पात उत्पाद (गुणवत्ता नियंत्रण) संशोधन आदेश, 2025 जारी किया है.
इसके अतिरिक्त, मंत्रालय ने एक वर्ष की अवधि के लिए अनुसूची 1 में शामिल 13 भारतीय मानकों पर क्यूसीओ प्रवर्तन को भी निलंबित किया है. ये मानक विशेष इस्पात ग्रेड से संबंधित हैं, जिनका उपयोग उच्च-परिशुद्धता और विशिष्ट अनुप्रयोगों में किया जाता है, जहां असाधारण शक्ति, कठोरता, आयामी सटीकता और तापीय स्थिरता की आवश्यकता होती है.

