
उदित वाणी, जमशेदपुर : रांची में आयोजित झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) की मल्टी-ईयर टैरिफ याचिका पर सार्वजनिक सुनवाई में सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष मानव केडिया ने 59 प्रतिशत प्रस्तावित टैरिफ वृद्धि का कड़ा विरोध दर्ज कराया. उन्होंने 28 फीसदी वितरण हानि को भी अस्वीकार्य बताते हुए स्पष्ट कहा कि अक्षमता और प्रबंधन की विफलता का बोझ उद्योगों एवं उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता.अपने संबोधन में केडिया ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार कोई विद्यार्थी यदि पिछली और वर्तमान कक्षा में संतोषजनक प्रदर्शन नहीं करता तो उसे अगली कक्षा में प्रोन्नति नहीं मिलती, उसी प्रकार बिना बेहतर प्रदर्शन के किसी भी संस्था को अतिरिक्त मांग या “अपग्रेडेशन” का अधिकार नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि कोई क्रिकेट खिलाड़ी रणजी मैचों में अच्छा प्रदर्शन नहीं करता, तो वह आईपीएल या भारतीय टीम में स्थान की अपेक्षा नहीं कर सकता. इसी प्रकार जेबीवीएनएल ने पूर्व वर्षों में अपने लक्ष्य पूरे नहीं किए और वितरण हानि कम करने में असफल रही है, इसलिए अब उसी विफलता के आधार पर टैरिफ वृद्धि प्रस्तावित करना न्यायसंगत नहीं है.

पिछले तीन साल के वास्तविक टैरिफ को सार्वजनिक करने की मांग
चैंबर ने पावर परचेज कॉस्ट में वृद्धि के दावे पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि एनटीपीसी एवं डीवीसी द्वारा 5 प्रतिशत वृद्धि का हवाला दिया गया है, जबकि कोयले की कीमतें स्थिर या कम हुई हैं. पिछले तीन वर्षों के वास्तविक टैरिफ का वर्षवार विवरण सार्वजनिक करने की मांग की गई तथा फ्लेक्सिबिलाइजेशन लागत का भार उद्योगों पर डालने का विरोध किया गया. जेयूएसएनएल के इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन शुल्क में वृद्धि और 6-8 प्रतिशत लागत बढ़ोतरी को अक्षमता का परिणाम बताते हुए चैंबर ने कहा कि आरडीएसएस योजना के तहत जब हानियां कम करने के प्रयास हो रहे हैं, तब पुरानी हानियों का भार उद्योगों पर डालना अनुचित है.
टैरिफ में चरणबद्ध बढ़ोतरी हो
एसीओएस-एबीआर अंतर एवं रेगुलेटरी एसेट के मुद्दे पर चैंबर ने कहा कि अचानक भारी टैरिफ वृद्धि के बजाय चरणबद्ध समाधान अपनाया जाना चाहिए. एमवायटी लक्ष्यों को पूरा न कर पाने की जिम्मेदारी सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डाली जा सकती.चैंबर ने कहा कि प्रस्तावित बिजली दर वृद्धि से उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर गंभीर आर्थिक बोझ पड़ेगा, जबकि वर्तमान में व्यवसाय पहले ही कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और चुनौतीपूर्ण बाजार परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं. लगभग 50 प्रतिशत ऊर्जा शुल्क और 25 प्रतिशत फिक्स्ड चार्ज वृद्धि अनुचित एवं असंगत है.
जमशेदपुर के उद्योगों पर प्रतिकूल असर होगा
जमशेदपुर जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्र पर इसके प्रतिकूल प्रभाव की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए चैंबर ने कहा कि 15-20 प्रतिशत उत्पादन लागत वृद्धि से रोजगार, निवेश और राज्य की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी. राज्य में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और समग्र आर्थिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाना आवश्यक है. सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने आशा व्यक्त की कि उद्योग जगत की चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा तथा अंतिम निर्णय लेने से पूर्व संतुलित एवं उद्योग हितैषी टैरिफ संरचना सुनिश्चित की जाएगी. चैंबर ने माननीय आयोग से प्रस्तावित टैरिफ वृद्धि को अस्वीकार करने और जेबीवीएनएल को पहले टीएंडडी हानियों को राष्ट्रीय मानक 15-18 प्रतिशत तक लाने तथा संचालनात्मक सुधारों का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करने का निर्देश देने की मांग की.सुनवाई के दौरान चैंबर प्रतिनिधिमंडल में महासचिव पुनीत काउंटिया, उपाध्यक्ष हर्ष बांकेरवाल एवं सचिव विनोद शर्मा भी उपस्थित थे.

