
उदित वाणी, जमशेदपुर/रांची : झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने पर्यावरणीय अनुमति लिए बिना 2 लाख टन रेड मड की आपूर्ति करने के मामले में हिन्डालको इंडस्ट्रीज के मूरी वर्क्स पर 37,96,875 रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति दंड लगाया है. यह जानकारी झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने झारखंड विधानसभा में विधायक सरयू राय के तारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में दी.
विभाग ने अपने उत्तर में बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (सीपीसीबी) के दिशा-निर्देशों के अनुसार बिना पर्यावरणीय अनुमति के किसी भी संस्था को परीक्षण या प्रयोग के लिए अधिकतम एक हजार किलोग्राम (एक टन) रेड मड ही उपलब्ध कराया जा सकता है. इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन करते हुए हिन्डालको इंडस्ट्रीज के मूरी वर्क्स ने गोला-ओरमांझी सड़क निर्माण के ट्रायल के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को करीब 2 लाख टन रेड मड की आपूर्ति कर दी.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह आपूर्ति 22 अक्टूबर 2024 को ही कर दी गई थी, लेकिन लगभग दो वर्षों तक झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की.
विधायक सरयू राय ने विधानसभा में प्रश्न उठाते हुए पूछा था कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त किए बिना इतनी बड़ी मात्रा में रेड मड की आपूर्ति करना पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है, ऐसे में सरकार ने इस पर क्या कार्रवाई की है.
सरकार की ओर से दिए गए उत्तर में बताया गया कि विधानसभा में मामला उठने के बाद झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने पत्रांक 506, दिनांक 26 फरवरी 2026 के माध्यम से हिन्डालको इंडस्ट्रीज पर 37,96,875 रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति दंड अधिरोपित किया है.
विधायक सरयू राय ने कहा कि अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस अर्थदंड की वसूली सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाती है.

